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गिरोह का पर्दाफाश: नौकरी लगवाने के नाम पर ठगी कर करते थे ऑनलाइन सट्टेबाजी, 100 खाते सीज, 1.40 करोड़ रुपये फ्रीज
Mon, 04 Apr 2022 06:55 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल/महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल/महेंद्रगढ़ (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 04 Apr 2022 06:55 PM IST
सार
गिरोह के सदस्य फर्जी नियुक्ति पत्र देकर युवाओं से ठग रहे थे। गिरोह के सदस्यों के 100 खातों को सील कर 1.40 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज करवाई गई है। ऑनलाइन सट्टेबाजी गिरोह का रैकेट जयपुर, मुंबई तक फैला है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में पुलिस ने नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे ठगकर ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है। 29 अक्तूबर 2021 को यह मामला सामने आया था, लेकिन इसका खुलासा करने में पुलिस ने पांच महीने का समय लगा दिया। आईजी ने कहा कि वित्तीय वर्ष होने की वजह से खुलासा नहीं कर पाए थे और इस मामले में कुछ कार्रवाई अभी चल रही है। आरोपी हरियाणा पुलिस, फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और न्यायालय समेत विभिन्न विभागों में नौकरी दिलवाने के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन कर ऑनलाइन सट्टेबाजी करते थे।
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बता दें कि गांव बचीनी निवासी अश्वनी कुमार ने 29 अक्तूबर 2021 कोसदर थाना महेंद्रगढ़ में पुलिस को हरियाणा पुलिस में एसआई के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर परीक्षित निवासी नांगल हरनाथ, धोलाराम उर्फ धोलिया निवासी कुराहवटा, रवि झांझड़िया निवासी जयपुर तथा प्रदीप निवासी चिड़ावा जिला झुंझुनू, राजस्थान को गिरफ्तार किया।
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सबसे पहले आरोपी परीक्षित को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया था। उससे बाद भी पुलिस को शेष तीन आरोपियों का गिरफ्तार करने में पांच महीने का समय लगा दिया। तीन आरोपी मार्च महीने में गिरफ्तार हुए हैं जबकि अंतिम आरोपी 22 मार्च को गिरफ्तार किया गया था लेकिन आरोपियों का खुलासा पुलिस ने सोमवार को किया है।
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परीक्षित से यह सामान किया था बरामद
जिससे पूछताछ में पुलिस ने उसके पास से ढाई लाख रुपये बरामद किए। पूछताछ में पुलिस ने आरोपी के पास से दिल्ली द्वारका से लैपटॉप, फर्जी नियुक्ति पत्र और काफी संख्या में युवकों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, मार्कशीट और अन्य कागजात बरामद किए थे। इसके बाद मार्च में अलग-अलग तारीख को तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मामला बड़ा होने की वजह से पुलिस ने इसका खुलासा नहीं किया। अभी भी इस मामले में तफ्तीश चल रही है।
आरोपी साथी के साथ मिलकर बनाता था फर्जी नियुक्त पत्र
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी परीक्षित ने एक गिरोह बनाया हुआ है। जिनके के साथ मिलकर वह फर्जी नियुक्ति पत्र बनाता था। आरोपी ने स्वयं का फूड कार्पोरेशन इंडिया का फर्जी नियुक्त पत्र बनाया हुआ था। पुलिस ने गिरोह के सदस्य रवि झांझडिया को जयपुर से गिरफ्तार कर उसके पास से 10 लाख रुपये बरामद किए है।
इसके अलावा गिरोह के सदस्य धोलाराम उर्फ धोलिया व प्रदीप को गिरफ्तार किया है। प्रदीप के पास से एक लाख 60 हजार रुपये बरामद किए। पुलिस ने जांच करते हुए पता लगाया कि आरोपी परीक्षित ने स्वयं का फूड कार्पोरेशन इंडिया का फर्जी नियुक्ति पत्र बनाया हुआ था। आरोपी परीक्षित ने एमसीए की हुई है जबकि रवि ने इंजीनियरिंग तथा प्रदीप ने बीसीए की हुई है। वहीं धोलाराम खेती का कार्य करता है।
गिरोह के सदस्यों ने 22 लोगों से ठगे एक करोड़ 60 लाख रुपये
पुलिस के अनुसार गिरोह ने करीब 22 लोगों से नौकरी लगवाने के नाम पर करीब 1 करोड़ 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी की हुई है। पुलिस ने आरोपियों से अब तक करीब 14 लाख की नकदी बरामद की है और उनके करीब 100 खातों को सील करवाकर लगभग 1 करोड़ 40 लाख रुपये राशि फ्रिज करवाई है। इस मामले में गिरफ्तार सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा का चुका है। पुलिस के अनुसार मामले में अभी और गिरफ्तारियां होनी बाकी हैं।
नौकरी के नाम पर देते थे झांसा
आरोपी धोलाराम उर्फ धोलिया निवासी कुराहवटा रेवाड़ी, चरखी दादरी, भिवानी, महेंद्रगढ़, नारनौल सहित अन्य क्षेत्रों में ग्राहक ढूंढता था और हरियाणा पुलिस, फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और न्यायालय समेत विभिन्न विभागों में नौकरी दिलवाने के नाम युवाओं को झांसा देता था।
युवाओं से कहता कि चंडीगढ़ में उनका कोई रिश्तेदार बड़े पद पर है उसके माध्यम से वो नौकरी लगवा देगा। अब तक वह कई युवाओं को नौकरी लगवा चुका है। ऐसे में युवा झांसे में आ जाते थे। इसके बाद वो उनसे सौदा तय करते थे। वह लोगों से पैसे की उगाही करता था और उन्हें सरगना द्वारा बताए गए खातों में भेजता था। नौकरी के नाम पर उनका कोई फिक्स रेट नहीं था। ग्राहक को देखकर उसी हिसाब से पैसा ठग लेता था।
लोगों से पैसे ठगकर आरोपी करते थे ऑनलाइन सट्टेबाजी
पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ में पता लगाया कि वे लोगों से नौकरी लगवाने के नाम पर ठगे गए पैसों से ऑनलाइन सट्टेबाजी का कार्य करते थे। आरोपियों के पास मोबाइल एप था उसके माध्यम से वो सट्टेबाजी का कार्य करते थे। इसके अलावा आईपीएल तथा अन्य लीग मैचों में भी सट्टेबाजी करते थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह में सोशल मीडिया के माध्यम से करीब 70 हजार लोग जुड़े हुए हैं, जो सट्टेबाजी करते हैं। गिरोह का नेटवर्क जयपुर, मुंबई तक फैला हुआ है। इस प्रकार गिरोह के सदस्यों का किसी बड़े गिरोह के साथ होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। पुलिस द्वारा गिरोह पर जुआ अधिनियम के तहत अलग से मामला दर्ज किया गया है।
25 लाख रुपये में हुआ था सौदा तय
अश्वनी ने शिकायत में बताया कि आरोपी परीक्षित निवासी नांगल हरनाथ एवं उसके एक रिश्तेदार से हरियाणा पुलिस में उप निरीक्षक के पद पर नौकरी लगवाने के लिए 25 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। आरोपियों ने दावा किया था कि नौकरी न लगने पर दस दिन में पैसे वापस कर देंगे।
एक दिन अश्वनी ने 14 लाख रुपये खाते में तथा इसके बाद अलग-अलग समय पर कभी खाते तो कभी ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए थे। पीड़ित उनको 22.50 लाख रुपये उनको दे चुका था। इसके बाद आरोपी न तो उसको नौकरी लगवाई और न ही पैसे वापस दिए। शिकायत अनुसार पैसे मांगने पर जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस ने नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी से पैसे ठगकर ऑनलाइन सट्टेबाजी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। चारा आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं जिनसे 14 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। 1 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि फ्रिज करवा दी गई है। अब इस मामले में जांच जारी हैं। जल्द ही अन्य आरोपी भी इस मामले में गिरफ्तार होंगे। - चंद्रमोहन, पुलिस अधीक्षक, महेंद्रगढ़।
तफ्तीश में समय लगता है और दूसरा वित्तीय वर्ष में व्यस्त होने की वजह से भी इसका खुलासा नहीं कर पाए। इस मामले में आगे भी तफ्तीश जारी है। -रवि किरण, आईजी, रेवाड़ी