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टोकन देने के चार दिन बाद भी नहीं हुई सरसों खरीद
Updated Tue, 08 May 2018 01:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
टोकन देने के चार दिन बाद भी हैफेड द्वारा सरसों नहीं खरीद किए जाने से गुस्साए किसानों ने सोमवार को फिर से नांगल चौधरी रोड स्थित नई अनाज के गेट के सामने नेशनल हाइवे नंबर 11 पर जाम लगा दिया। सुबह साढ़े नौ बजे से करीब ढाई बजे तक पांच घंटे लगे जाम के चलते कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। इतना ही नहीं तपती गर्मी में जाम लगने के कारण एक बुजुर्ग किसान चक्कर खाकर गिर पड़ा जिसे उपचार के लिए अस्पताल में लेकर जाना पड़ा। जाम लगने के करीब तीन घंटे बाद पुलिस व मार्केट कमेटी सचिव मौके पर पहुंची जिसने किसानों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन किसान हैफेड डीएम को मौके पर बुलाकर खरीद शुरू करवाने की बात पर अड़ गए।
इस पर पुलिस व मार्केट कमेटी सचिव अनेक कई हैफेड डीएम को फोन कर मौके पर बुलाने की बात कही, लेकिन डीएम काफी देर तक भी मौके पर किसानों को समझाने के नहीं पहुंचे तो पुलिस व अन्य कर्मचारी भी थक हारकर बैठ गए, क्योंकि खरीद हैफेड द्वारा की जानी थी।
जाम लगा रहे किसानों ने बताया कि रसुलपुर, शाहपुर-2 व कारोता गांवों के किसानों को तीन व चार मई को सरसों खरीद के लिए टोकन वितरित किए गए थे, लेकिन तीन से चार दिन बीतने के बाद भी हैफेड द्वारा उनकी सरसों खरीद नहीं गई है। ऐसे में पिछले तीन-चार दिनों मंडी ही अपनी सरसों खुले आसमान में रखकर खरीद की बाट जो रहे हैं जिससे उनके अन्य कार्य भी प्रभावित हो गए हैं जबकि हैफेड अधिकारी मंडी से सरसों उठान नहीं होने की बात कहकर खरीद नहीं कर रहे हैं।
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मौसम खराब होने की संभावना से आज भी नहीं होगी खरीद : हैफेड अधिकारी
सोमवार को भी मौके पर पहुंचे हैफेड अधिकारी ने किसानों की सरसों दो दिन नहीं खरीदने की बात कही। हैफेड अधिकारी का तर्क था कि सोमवार व मंगलवार को मौसम विभाग ने तेज आंधी व बरसात की चेतावनी जारी की है। ऐसे में अगर उनकी सरसों खरीद ली जाती है तो मंडी में टीन शेड के नीचे रखने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए किसान अपनी बुधवार को अपनी सरसों लेकर मंडी में आए उनकी खरीद ली जाएगी।
हमारी सरसों भी तो खुले में पड़ी है: किसान
परंतु किसान ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि अगर खुले में पड़ी उनकी सरसों नहीं खरीदी गई तो उनकी भी आंधी व बरसात में भीग जाएगी। वहीं कहा कि अभी तक मौसम बिल्कुल साफ है अगर मौसम में बदलाव हो तो बेशक अधिकारी खरीद न करे। इस प्रकार हैफेड अधिकारियों व किसानों के बीच काफी देर तक बहस चलती रही। वहीं किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी सरसों नहीं खरीदी नहीं की गई तो वे जाम नहीं खोलेंगे। इसके बाद हैफेड अधिकारी ने टीन शेड के नीचे रखे सरसों के बैग को एक तरफ लगाकर शेड में जगह बनाकर खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया। तब जाकर किसानों ने जाम खोला।
जाम में फंसे यात्री कोसते रहे प्रशासन व सरकार को
जाम में सुबह से फंसे यात्री प्रशासन व सरकार को कोसते दिखाई दिए, क्योंकि तीन घंटे तक न तो कोई अधिकारी जाम खुलवाने पहुंचा और न ही कोई पुलिस प्रशासन। कई घंटों से जाम में फंसे परेशान चालकों ने कही से नंबर लेकर पुलिस मुखिया के पास मोबाइल से अपनी समस्या उनके सामने रखी। परंतु पुलिस मुखिया ने उन्हें आश्वासन देने की बजाय अपनी असमर्थता जाहिर कर दी जिससे हताश होकर चालक भी एक ओर छांव में जाकर बैठ गए।
अधिकारी कर रहे सरकार की छवि धूमिल
जाम लगा रहे किसानों ने कहा कि सरकार किसानों की सरसों समर्थन मूल्य पर खरीदकर उन्हें सम्मान देने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसी सरकार के अधिकारी अपनी मनमानी कर किसानों की सरसों खरीद करने में आनाकानी कर सरकार की छवि को धूमिल करने में जुटे हुए हैं। यही कारण है कि किसान पिछले एक सप्ताह में तीन बार जाम लगा चुके हैं, लेकिन अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं।
जाम के दौरान चक्कर खाकर गिरा बुजुर्ग किसान
इस उमस भरी गर्मी में जाम लगा रहे किसानों में ही शामिल एक बुजुर्ग किसान चक्कर खाकर गिर पड़ा। इस पर अन्य किसानों ने बुजुर्ग किसानों को पानी पिलाया। इसके बाद लोग उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर गए।
पांच घंटे जाम, कई किमी तक लगी वाहनों की कतारें
सरसों खरीद नहीं पर किसानों द्वारा जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे नंबर 11 पर पांच घंटे तक लगाए गए जाम के चलते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। नारनौल की ओर वाहनों की कतार काफी कम रही क्योंकि नारनौल से नांगल चौधरी जाने वाले जाने वाहन चालक जाम देखकर अन्य लिंक रास्तों से होकर निकले। परंतु नांगल चौधरी से नारनौल आने वाले वाहन जाम में ही फंसे रहे। इस कारण एक तरफ कई किलोमीटर वाहनों की लाइन लग गई।
वर्जन
उठान नहीं होने से नई अनाज मंडी में बना टीन शेड पूरी तरह से सरसों के बैग से भरा हुआ है। वहीं मौसम विभाग ने भी दो दिन का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में अगर किसानों की सरसों खरीद शुरू नहीं की गई थी। किसानों की मांग पर टीन शेड में जगह बनाकर खरीद शुरू करवा दी गई है।
-रामकुंवार डीएम हैफेड नारनौल।
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नारनौल।
टोकन देने के चार दिन बाद भी हैफेड द्वारा सरसों नहीं खरीद किए जाने से गुस्साए किसानों ने सोमवार को फिर से नांगल चौधरी रोड स्थित नई अनाज के गेट के सामने नेशनल हाइवे नंबर 11 पर जाम लगा दिया। सुबह साढ़े नौ बजे से करीब ढाई बजे तक पांच घंटे लगे जाम के चलते कई किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई। इतना ही नहीं तपती गर्मी में जाम लगने के कारण एक बुजुर्ग किसान चक्कर खाकर गिर पड़ा जिसे उपचार के लिए अस्पताल में लेकर जाना पड़ा। जाम लगने के करीब तीन घंटे बाद पुलिस व मार्केट कमेटी सचिव मौके पर पहुंची जिसने किसानों को समझा-बुझाकर जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन किसान हैफेड डीएम को मौके पर बुलाकर खरीद शुरू करवाने की बात पर अड़ गए।
इस पर पुलिस व मार्केट कमेटी सचिव अनेक कई हैफेड डीएम को फोन कर मौके पर बुलाने की बात कही, लेकिन डीएम काफी देर तक भी मौके पर किसानों को समझाने के नहीं पहुंचे तो पुलिस व अन्य कर्मचारी भी थक हारकर बैठ गए, क्योंकि खरीद हैफेड द्वारा की जानी थी।
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जाम लगा रहे किसानों ने बताया कि रसुलपुर, शाहपुर-2 व कारोता गांवों के किसानों को तीन व चार मई को सरसों खरीद के लिए टोकन वितरित किए गए थे, लेकिन तीन से चार दिन बीतने के बाद भी हैफेड द्वारा उनकी सरसों खरीद नहीं गई है। ऐसे में पिछले तीन-चार दिनों मंडी ही अपनी सरसों खुले आसमान में रखकर खरीद की बाट जो रहे हैं जिससे उनके अन्य कार्य भी प्रभावित हो गए हैं जबकि हैफेड अधिकारी मंडी से सरसों उठान नहीं होने की बात कहकर खरीद नहीं कर रहे हैं।
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मौसम खराब होने की संभावना से आज भी नहीं होगी खरीद : हैफेड अधिकारी
सोमवार को भी मौके पर पहुंचे हैफेड अधिकारी ने किसानों की सरसों दो दिन नहीं खरीदने की बात कही। हैफेड अधिकारी का तर्क था कि सोमवार व मंगलवार को मौसम विभाग ने तेज आंधी व बरसात की चेतावनी जारी की है। ऐसे में अगर उनकी सरसों खरीद ली जाती है तो मंडी में टीन शेड के नीचे रखने की व्यवस्था नहीं है। इसलिए किसान अपनी बुधवार को अपनी सरसों लेकर मंडी में आए उनकी खरीद ली जाएगी।
हमारी सरसों भी तो खुले में पड़ी है: किसान
परंतु किसान ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि अगर खुले में पड़ी उनकी सरसों नहीं खरीदी गई तो उनकी भी आंधी व बरसात में भीग जाएगी। वहीं कहा कि अभी तक मौसम बिल्कुल साफ है अगर मौसम में बदलाव हो तो बेशक अधिकारी खरीद न करे। इस प्रकार हैफेड अधिकारियों व किसानों के बीच काफी देर तक बहस चलती रही। वहीं किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी सरसों नहीं खरीदी नहीं की गई तो वे जाम नहीं खोलेंगे। इसके बाद हैफेड अधिकारी ने टीन शेड के नीचे रखे सरसों के बैग को एक तरफ लगाकर शेड में जगह बनाकर खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया। तब जाकर किसानों ने जाम खोला।
जाम में फंसे यात्री कोसते रहे प्रशासन व सरकार को
जाम में सुबह से फंसे यात्री प्रशासन व सरकार को कोसते दिखाई दिए, क्योंकि तीन घंटे तक न तो कोई अधिकारी जाम खुलवाने पहुंचा और न ही कोई पुलिस प्रशासन। कई घंटों से जाम में फंसे परेशान चालकों ने कही से नंबर लेकर पुलिस मुखिया के पास मोबाइल से अपनी समस्या उनके सामने रखी। परंतु पुलिस मुखिया ने उन्हें आश्वासन देने की बजाय अपनी असमर्थता जाहिर कर दी जिससे हताश होकर चालक भी एक ओर छांव में जाकर बैठ गए।
अधिकारी कर रहे सरकार की छवि धूमिल
जाम लगा रहे किसानों ने कहा कि सरकार किसानों की सरसों समर्थन मूल्य पर खरीदकर उन्हें सम्मान देने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसी सरकार के अधिकारी अपनी मनमानी कर किसानों की सरसों खरीद करने में आनाकानी कर सरकार की छवि को धूमिल करने में जुटे हुए हैं। यही कारण है कि किसान पिछले एक सप्ताह में तीन बार जाम लगा चुके हैं, लेकिन अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं।
जाम के दौरान चक्कर खाकर गिरा बुजुर्ग किसान
इस उमस भरी गर्मी में जाम लगा रहे किसानों में ही शामिल एक बुजुर्ग किसान चक्कर खाकर गिर पड़ा। इस पर अन्य किसानों ने बुजुर्ग किसानों को पानी पिलाया। इसके बाद लोग उसे उपचार के लिए अस्पताल लेकर गए।
पांच घंटे जाम, कई किमी तक लगी वाहनों की कतारें
सरसों खरीद नहीं पर किसानों द्वारा जयपुर-दिल्ली नेशनल हाईवे नंबर 11 पर पांच घंटे तक लगाए गए जाम के चलते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। नारनौल की ओर वाहनों की कतार काफी कम रही क्योंकि नारनौल से नांगल चौधरी जाने वाले जाने वाहन चालक जाम देखकर अन्य लिंक रास्तों से होकर निकले। परंतु नांगल चौधरी से नारनौल आने वाले वाहन जाम में ही फंसे रहे। इस कारण एक तरफ कई किलोमीटर वाहनों की लाइन लग गई।
वर्जन
उठान नहीं होने से नई अनाज मंडी में बना टीन शेड पूरी तरह से सरसों के बैग से भरा हुआ है। वहीं मौसम विभाग ने भी दो दिन का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में अगर किसानों की सरसों खरीद शुरू नहीं की गई थी। किसानों की मांग पर टीन शेड में जगह बनाकर खरीद शुरू करवा दी गई है।
-रामकुंवार डीएम हैफेड नारनौल।