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चिकित्सकों की गिरफ्तारी नहीं होने पर जड़वा के ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
Updated Sat, 04 Aug 2018 12:38 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। जड़वा गांव के ग्रामीण शुक्रवार को चिकित्सकों की गिरफ्तारी को लेकर एसडीएम की अनुपस्थित में नायब तहसीलदार रमेश कुमार को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि चिकित्सकों के खिलाफ जून में मुकदमा दर्ज करवाया था। लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई। थाना प्रभारी महेंद्रगढ़ से भी वो कई बार मिल चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही चिकित्सकों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो अस्पताल के सामने धरना देंगे।
पीड़ित सोमवीर ने बताया कि उसकी माता को पेट में दर्द था। जिसपर माता बाला देवी को 21 मई को डॉ. सुनील यादव के पास अल्ट्रासाड एवं इको सेंटर महेंद्रगढ़ लेकर आया था। डॉ. सुनील ने उसकी मां को पीत की थैली में पथरी बताई थी। इस संबंध में उसने ऑपरेशन के बारे में पूछा तो डॉक्टर ने 35 हजार रुपये फीस बताई थी। 20 हजार रुपये फीस देने के बाद डॉ. सुनील उसकी माता को निजी अस्पताल में डॉ. प्रदीप के पास लेकर गया। वहां चिकित्सक ने ऑपरेशन कर दिया। 23 मई को उसकी माता की तबीयत बिगड़ी और चिकित्सक ने रेफर कर दिया। इसके बाद वह अपनी माता को जयपुर एक निजी अस्पताल में लेकर गया था जहां पर चिकित्सकों ने दोबार ऑपरेशन की बात कही थी। जयपुर के चिकित्सक ने उनकी माता के ऑपरेशन में लापरवाही बरतने की बात कही थी। जयपुर के चिकित्सकों ने उसकी माता का दोबार ऑपरेशन किया। जहां पांच लाख रुपये का खर्चा आया।
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महेंद्रगढ़। जड़वा गांव के ग्रामीण शुक्रवार को चिकित्सकों की गिरफ्तारी को लेकर एसडीएम की अनुपस्थित में नायब तहसीलदार रमेश कुमार को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि चिकित्सकों के खिलाफ जून में मुकदमा दर्ज करवाया था। लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई। थाना प्रभारी महेंद्रगढ़ से भी वो कई बार मिल चुके हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही चिकित्सकों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो अस्पताल के सामने धरना देंगे।
पीड़ित सोमवीर ने बताया कि उसकी माता को पेट में दर्द था। जिसपर माता बाला देवी को 21 मई को डॉ. सुनील यादव के पास अल्ट्रासाड एवं इको सेंटर महेंद्रगढ़ लेकर आया था। डॉ. सुनील ने उसकी मां को पीत की थैली में पथरी बताई थी। इस संबंध में उसने ऑपरेशन के बारे में पूछा तो डॉक्टर ने 35 हजार रुपये फीस बताई थी। 20 हजार रुपये फीस देने के बाद डॉ. सुनील उसकी माता को निजी अस्पताल में डॉ. प्रदीप के पास लेकर गया। वहां चिकित्सक ने ऑपरेशन कर दिया। 23 मई को उसकी माता की तबीयत बिगड़ी और चिकित्सक ने रेफर कर दिया। इसके बाद वह अपनी माता को जयपुर एक निजी अस्पताल में लेकर गया था जहां पर चिकित्सकों ने दोबार ऑपरेशन की बात कही थी। जयपुर के चिकित्सक ने उनकी माता के ऑपरेशन में लापरवाही बरतने की बात कही थी। जयपुर के चिकित्सकों ने उसकी माता का दोबार ऑपरेशन किया। जहां पांच लाख रुपये का खर्चा आया।
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