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डीसी को ज्ञापन सौंपकर लगाया स्कील ट्रेनिंग सेंटरों पर फर्जीवाड़े का आरोप
Updated Thu, 17 Aug 2017 11:08 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। शहर के जागरूक लोगों ने वीरवार को जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर एनयूूएलएम कम्पोनेंट स्कीम के तहत चल रहे एक स्किल ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़े को अंकुश लगाने की मांग की।
उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में कपिल कुमार, बसंत कुमार, श्यामसुंदर, रतनलाल, बाबूलाल, ओमप्रकाश, रामकिशन, अमेश शर्मा व गोपाल आदि ने बताया कि एनयूएलएम कम्पोनेंट स्कीम के तहत स्कील ट्रेनिंग दिखावे के रूप में चलाये जा रहे हैं। जोकि सरकार के नियमानुसार गरीब व बेरोजगार पढ़े-लिखे युवाओं को ट्रेनिंग करवाने के बाद रोजगार दिलवाने का कार्य करता है, लेकिन वास्तव में यहां ऐसा कुछ नहीं है। इस ट्रेनिंग सेंटर का सब कार्य सिर्फ कागजों में दिखाकर पूर्ण किया जा रहा है। नियमानुसार बच्चों की ट्रेनिंग की क्लास भी नहीं लगाई जा रही हैं और ना ही कोई प्रशिक्षित अध्यापक है। इसके अलावा कोर्स के अनुरूप बच्चों को दिया जाने वाला सामान भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब नगर परिषद के एक कर्मचारी की मिलीभगत से हो रहा है। लोगों ने बताया कि यह सेंटर पिछले पांच माह से चलाया जा रहा है। जिसमें गरीब व बेरोजगार युवाओं का एडमिशन व उनकी हाजिरी दिखाकर न तो उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा और न ही प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत परीक्षा ली जा रही है। इस प्रकार कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के लिए सरकार से प्राप्त राशि को दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने उपायुक्त से इस मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की। ताकि गरीब व बेरोजगारों युवाओं को सही प्रशिक्षण मिल सके और प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार भी प्राप्त हो सके।
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नारनौल। शहर के जागरूक लोगों ने वीरवार को जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौंपकर एनयूूएलएम कम्पोनेंट स्कीम के तहत चल रहे एक स्किल ट्रेनिंग सेंटर के नाम पर किए जा रहे फर्जीवाड़े को अंकुश लगाने की मांग की।
उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में कपिल कुमार, बसंत कुमार, श्यामसुंदर, रतनलाल, बाबूलाल, ओमप्रकाश, रामकिशन, अमेश शर्मा व गोपाल आदि ने बताया कि एनयूएलएम कम्पोनेंट स्कीम के तहत स्कील ट्रेनिंग दिखावे के रूप में चलाये जा रहे हैं। जोकि सरकार के नियमानुसार गरीब व बेरोजगार पढ़े-लिखे युवाओं को ट्रेनिंग करवाने के बाद रोजगार दिलवाने का कार्य करता है, लेकिन वास्तव में यहां ऐसा कुछ नहीं है। इस ट्रेनिंग सेंटर का सब कार्य सिर्फ कागजों में दिखाकर पूर्ण किया जा रहा है। नियमानुसार बच्चों की ट्रेनिंग की क्लास भी नहीं लगाई जा रही हैं और ना ही कोई प्रशिक्षित अध्यापक है। इसके अलावा कोर्स के अनुरूप बच्चों को दिया जाने वाला सामान भी नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सब नगर परिषद के एक कर्मचारी की मिलीभगत से हो रहा है। लोगों ने बताया कि यह सेंटर पिछले पांच माह से चलाया जा रहा है। जिसमें गरीब व बेरोजगार युवाओं का एडमिशन व उनकी हाजिरी दिखाकर न तो उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा और न ही प्रशिक्षण पूर्ण होने के उपरांत परीक्षा ली जा रही है। इस प्रकार कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के लिए सरकार से प्राप्त राशि को दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने उपायुक्त से इस मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की। ताकि गरीब व बेरोजगारों युवाओं को सही प्रशिक्षण मिल सके और प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार भी प्राप्त हो सके।
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