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Mahendragarh-Narnaul News: अहीरवाल में सैनी समाज को एकजुट करने की आज हुंकार भरेंगे सीएम नायब सिंह

Sun, 16 Nov 2025 01:31 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 16 Nov 2025 01:31 AM IST
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CM Nayab Singh will today call for the unification of the Saini community in Ahirwal
फोटो नंबर-17राज्य स्तरीय शूर सैनी जयंती को लेकर तैयार किया जा रहा मंच।संवाद - फोटो : udhampur news
नारनौल। दक्षिण हरियाणा के अंतिम छोर और अहीरवाल का गढ़ माने जाने वाले महेंद्रगढ़ जिले में इस बार राजनीतिक माहौल खासा गर्म है। रविवार को नारनौल की अनाजमंडी में होने वाले राज्य स्तरीय महाराजा शूर सैनी जयंती समारोह में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। इस सम्मेलन को लेकर पूरे अहीरवाल में चर्चा का दौर तेज है क्योंकि इसे भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाले महत्वपूर्ण कार्यक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अहीरवाल में पहली बार किसी राज्य स्तरीय सैनी सम्मेलन का आयोजन कर भाजपा एक बड़ा संदेश देने जा रही है। जिले में अहीरवाल बिरादरी का बहुमत है, जबकि सैनी समाज दूसरी सबसे बड़ी सामाजिक शक्ति है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी इस सम्मेलन में सैनी समाज को एकजुट करने का बिगुल बजाएंगे, जो आने वाले चुनावों में राजनीतिक हलचल मचा सकता है।
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बीते कुछ वर्षों में भाजपा अहीरवाल क्षेत्र के दबाव और राजनीतिक समीकरणों के कारण कई बार रणनीति बदलने को मजबूर हुई है। ऐसे में सैनी समाज को संगठित कर भाजपा इस दबाव को कम करना चाहती है। नायब सिंह सैनी सैनी समाज को एक सूत्र में बांधने में सफल रहते हैं, तो भाजपा ब्राह्मण, वैश्य, पंजाबी व अन्य बिरादरी के सहयोग से अहीरवाल के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक समीकरण को बदल सकती है।
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जिले की चार विधानसभा सीटों में फिलहाल तीन पर अहीरवाल का वर्चस्व है। नारनौल, महेंद्रगढ़ और नांगल चौधरी सीट से ब्राह्मण, वैश्य व गुर्जर समाज के नेता भी विजयी हो चुके हैं। हाल ही में नारनौल नगर परिषद चेयरमैन चुनाव में सैनी समाज की जीत इस बात का उदाहरण है कि यदि सैनी समाज एकजुट हो जाए और अन्य बिरादरी साथ आ जाएं तो यहां समीकरण बदले जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री का यह दौरा सामाजिक कार्यक्रम के रूप में दर्ज किया गया है लेकिन इस राज्य स्तरीय सम्मेलन की भव्यता और तैयारियों ने राजनीतिक रंगत ला दी है। सैनी समाज के सभी बड़े नेताओं ने इस आयोजन में अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रविवार को होने वाली इस महाराजा शूर सैनी जयंती समारोह में सैनी समाज की कितनी बड़ी भीड़ जुटती है और यह भीड़ भविष्य की राजनीति को किस दिशा में मोड़ती है।


सैनी जाति के प्रवर्तक माने जाते हैं महाराजा शूर सैनी
सैनी समाज की उत्पत्ति के संबंध में अनेक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से कई शूरसैनी वंश से अपनी उत्पत्ति का दावा करते हैं। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार महाराजा शूर सैनी, सैनी जाति के प्रवर्तक माने जाते हैं। इस बारे में सैनी सभा के प्रधान बिशन सैनी ने बताया कि शूरसैनी क्षत्रिय वंश की उत्पत्ति और विकास शूरसेन देश के तहत हुआ था। महाराजा शूरसैनी महाराजा दशरथ के पुत्र और भगवान श्री राम के छोटे भाई शत्रुघ्न के पुत्र के रूप में पैदा हुए थे। शत्रुघ्न ने युद्ध में यमुना तट पर स्थित मधुवन को जीत लिया था और उनके स्थान पर मथुरापुरी नगर बसाया था जो वर्तमान में मथुरा है। मथुरापुरी के लगभग 20 योजन के क्षेत्र में शत्रुघ्न ने अपने पुत्र शूरसेन के नाम पर शूरसेन देश की स्थापना की थी। इसकी जिम्मेदारी शूरसैनी को सौंपी गई थी। सैनी समाज के महाराजा शूरसैनी का जन्म इसी शूरसेन देश में हुआ था और यहीं पर सैनी समुदाय की उत्पत्ति हुई जो अब भारत के विभिन्न भागों में फैल गई है।
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