{"_id":"631639f7ea5f291236214ecb","slug":"cleanliness-is-not-being-done-in-the-city-even-after-spending-rs-76-lakh-per-month-narnol-news-rtk657167782","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतिमाह 76 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी शहर में नहीं हो पा रही सफाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतिमाह 76 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी शहर में नहीं हो पा रही सफाई
विज्ञापन
शहर में प्रति माह 76 लाख रुपये सफाई पर खर्च किए जाते हैं। बावजूद इसके शहर की सफाई ठीक तरीके से नहीं हो पा रही है। प्रतिदिन कचरा गाड़ी नहीं पहुंचने की वजह से लोग चौक चौराहों पर कूड़ा डाल देते हैं वहां पर कूड़ादान नहीं होने की वजह से बेसहारा गोवंश उसे बिखेर देते हैं। प्रतिदिन उठान नहीं होने की वजह से वहां मक्खी मच्छर पनपने लगते हैं तथा बदबू भी आती है। नगर परिषद(नप) प्रशासन सफाई को लेकर गंभीर नहीं होने की वजह से नारनौल की स्वच्छता रैंकिंग 2021 उत्तर भारत के 90 शहरों में 85वीं रैंकिंग रही थी। सफाई का यह हाल तब है जब नप प्रशासन की ओर से सफाई पर प्रति वर्ष लगभग 9 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं।
बता दें कि नारनौल शहर में लगभग 31 वार्डों में 25 हजार घर हैं तथा उनमें लगभग 105308 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा लगभग पांच हजार छोटे बड़े प्रतिष्ठान हैं। शहर के घरों एवं प्रतिष्ठानों से प्रतिदिन करीब 43 टन कचरा निकलता है। सोमवार को टीम ने दौरा किया तो पुरानी सराय, टेेलीफोन एक्सचेंज के पीछे, मोहल्ला जमालपुर, वाल्मीकि चौक सहित अन्य स्थानों पर लोगों द्वारा कचरा डाला हुआ था। गोवंश उनके अंदर मुंह मा रहे थे। मोहल्लों के अंदर कहीं भी डस्टबिन नहीं मिले। लोग नाक दबाकर वहां से निकल रहे थे। शहर से कूड़ा उठाने के लिए नप की ओर से छह ट्रैक्टर व 30 टैंपों लगाए हुए हैं। उसके बाद सफाई का यह हाल है। इन सब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नप सफाई को लेकर कितनी गंभीर है। इससे शहर की स्वच्छता को ग्रहण लग रहा है।
चेयरपर्सन ने नहीं ली अभी तक कोई बैठक
बता दें कि 19 जून को नप के चुनाव संपन्न हो गए थे और 22 जून का परिणाम भी जारी हो गया था। 16 जुलाई को नप चेयरपर्सन कमलेश सैनी ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था। उनको कार्यभार ग्रहण किए हुए लगभग डेढ़ महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन अभी तक पार्षदों की बैठक बुलाकर शहर की साफ सफाई को लेकर कोई योजना नहीं बनाई।
विज्ञापन
स्वच्छता रैंकिंग में दो वर्षों से शहर आ रहा फिसड्डी
शहर में ठीक से सफाई नहीं होने की वजह से स्वच्छता रैंकिंग में दो वर्षों से फिसड्डी चल रहा है। 2021 में उत्तर भारत में नगर परिषद के 90 शहरों को स्वच्छता रैंकिंग में शामिल किया गया था जिसमें नारनौल शहर की रैंकिंग 85वीं रही थी। वहीं 2020 में 83वीं रैंकिंग थी।
हमने शहर में कूड़ा कलेक्शन गाड़ियों के लिए टेंडर लगाए हुए हैं। 29 अगस्त को टेंडर क्लॉज हो चुके हैं। एक या दो दिन में इनको ओपन करवा दिया जाएगा। उसके बाद निरंतर सफाई जारी रहेगी।
-अनिल कुमार, एमई।
विज्ञापन
बता दें कि नारनौल शहर में लगभग 31 वार्डों में 25 हजार घर हैं तथा उनमें लगभग 105308 लोग रह रहे हैं। इसके अलावा लगभग पांच हजार छोटे बड़े प्रतिष्ठान हैं। शहर के घरों एवं प्रतिष्ठानों से प्रतिदिन करीब 43 टन कचरा निकलता है। सोमवार को टीम ने दौरा किया तो पुरानी सराय, टेेलीफोन एक्सचेंज के पीछे, मोहल्ला जमालपुर, वाल्मीकि चौक सहित अन्य स्थानों पर लोगों द्वारा कचरा डाला हुआ था। गोवंश उनके अंदर मुंह मा रहे थे। मोहल्लों के अंदर कहीं भी डस्टबिन नहीं मिले। लोग नाक दबाकर वहां से निकल रहे थे। शहर से कूड़ा उठाने के लिए नप की ओर से छह ट्रैक्टर व 30 टैंपों लगाए हुए हैं। उसके बाद सफाई का यह हाल है। इन सब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नप सफाई को लेकर कितनी गंभीर है। इससे शहर की स्वच्छता को ग्रहण लग रहा है।
विज्ञापन
चेयरपर्सन ने नहीं ली अभी तक कोई बैठक
बता दें कि 19 जून को नप के चुनाव संपन्न हो गए थे और 22 जून का परिणाम भी जारी हो गया था। 16 जुलाई को नप चेयरपर्सन कमलेश सैनी ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था। उनको कार्यभार ग्रहण किए हुए लगभग डेढ़ महीने से अधिक समय हो गया है लेकिन अभी तक पार्षदों की बैठक बुलाकर शहर की साफ सफाई को लेकर कोई योजना नहीं बनाई।
विज्ञापन
स्वच्छता रैंकिंग में दो वर्षों से शहर आ रहा फिसड्डी
शहर में ठीक से सफाई नहीं होने की वजह से स्वच्छता रैंकिंग में दो वर्षों से फिसड्डी चल रहा है। 2021 में उत्तर भारत में नगर परिषद के 90 शहरों को स्वच्छता रैंकिंग में शामिल किया गया था जिसमें नारनौल शहर की रैंकिंग 85वीं रही थी। वहीं 2020 में 83वीं रैंकिंग थी।
हमने शहर में कूड़ा कलेक्शन गाड़ियों के लिए टेंडर लगाए हुए हैं। 29 अगस्त को टेंडर क्लॉज हो चुके हैं। एक या दो दिन में इनको ओपन करवा दिया जाएगा। उसके बाद निरंतर सफाई जारी रहेगी।
-अनिल कुमार, एमई।