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Mahendragarh-Narnaul News: सर्दी में बच्चों की सेहत पर संकट, 125 तक पहुंची ओपीडी
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बहादुरगढ़। ठंड बढ़ने के साथ ही बच्चों में निमोनिया, खांसी-जुकाम और वायरल बुखार के मामलों में इजाफा हो रहा है। नागरिक अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे मासूमों की संख्या में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। डॉक्टर अभिभावकों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे है।
नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अहिभूषण ने कहा कि ठंडी हवा के कारण बच्चों में सर्दी, खांसी संबंधी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। विशेष रूप से छोटे बच्चों और नवजातों में निमोनिया का खतरा अधिक देखा जा रहा है।
125 तक पहुंची ओपीडी
बाल रोग विभाग की ओपीडी में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लगभग 100 मरीज आते थे लेकिन हफ्ते भर से इनकी संख्या 125 तक पहुंच गई है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को ठंडी हवा से बचाएं, धूप सेंके, गर्म कपड़े पहनाएं और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
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डॉ. अहिभूषण ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। फिजिशियन डॉ. सुंदरम ने ठंड से बचाव की सलाह दी है।
ये हैं लक्षण
- तेज या लगातार बुखार
- सर्दी, खांसी और सीने में जकड़न
- सांस लेने में तकलीफ या तेज सांस चलना
- बच्चे का सुस्त रहना या दूध व भोजन कम करना
- सीने से घरघराहट की आवाज आना
- होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना
- बार-बार उल्टी या कमजोरी महसूस होना
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नागरिक अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अहिभूषण ने कहा कि ठंडी हवा के कारण बच्चों में सर्दी, खांसी संबंधी संक्रमण तेजी से फैल रहा है। विशेष रूप से छोटे बच्चों और नवजातों में निमोनिया का खतरा अधिक देखा जा रहा है।
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125 तक पहुंची ओपीडी
बाल रोग विभाग की ओपीडी में दिसंबर के अंतिम सप्ताह में लगभग 100 मरीज आते थे लेकिन हफ्ते भर से इनकी संख्या 125 तक पहुंच गई है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को ठंडी हवा से बचाएं, धूप सेंके, गर्म कपड़े पहनाएं और किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।
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डॉ. अहिभूषण ने बताया कि ठंड बढ़ने के साथ ही अस्पताल में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। फिजिशियन डॉ. सुंदरम ने ठंड से बचाव की सलाह दी है।
ये हैं लक्षण
- तेज या लगातार बुखार
- सर्दी, खांसी और सीने में जकड़न
- सांस लेने में तकलीफ या तेज सांस चलना
- बच्चे का सुस्त रहना या दूध व भोजन कम करना
- सीने से घरघराहट की आवाज आना
- होंठ या नाखूनों का नीला पड़ना
- बार-बार उल्टी या कमजोरी महसूस होना