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स्कूलों पर सीबीएसई सख्त, अभिभावकों को राहत
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:25 PM IST
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सीबीएसई से संबद्ध ऐसे स्कूलों की अब खैर नहीं जो बच्चों को प्राइवेट पब्लिशर की किताबें पढ़ने को मजबूर करते हैं। सीबीएसई की ओर से पुख्ता सबूत के शिकायत मिलने पर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करने संबंधी सर्कुलर जारी होना जिले के 150 निजी स्कूलों के लगभग एक लाख बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि इनको प्राइवेट पब्लिशर की किताबें खरीदनी पड़ रही हैं।
एनसीईआरटी की किताबें सस्ती होती हैं जबकि प्राइवेट पब्लिशर की किताबें कई गुना महंगी। प्राइवेट पब्लिशर की किताबें लगवाने में भारी भरकम कमीशन का खेल होता है। इसमें मोटी कमाई है इसलिए विद्यार्थियों को इन्हीं किताबों को पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है।
लाखों की कमाई
किताबों का कोई भी सैट 15 सौ रुपये से कम नहीं है। छठी से आठवीं तक की किताबें 2500 हजार से 3500 तक के आ रहे हैं। एक सेट में 10 के लगभग किताबें होती हैं। एक किताब पर कंपनी बेचने वाले को 50 प्रतिशत तक छूट देती है लेकिन अभिभावकों को नाम मात्र की छूट पर ये किताबें दी जाती हैं। जो स्कूल किताबें भी बेच रहे हैं वह केवल किताबों में ही 10 लाख रुपये तक कमा ले रहे हैं।
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क्या विभाग कर पाएगा कार्रवाई
पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर की किताबें बेची जा रही हैं और पढ़ाई जा रही हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया कि किसी भी स्कूल के विरुद्ध प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है। अगर परिजन उनकी शिकायत भी देते हैं तो नाम मात्र की कार्रवाई कर छोड़ दिया जाता है। सीबीएसई ने अब नया सर्कुलर जारी तो कर दिया है लेकिन अभिभावकों के मन में अब भी निजी स्कूलों पर कार्रवाई को लेकर संदेह है। हालांकि सीबीएसई की अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुगंध शर्मा का कहना है कि पुख्ता सबूत पेश करने पर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी। उनका कहना है कि स्कूलों को मान्यता देते समय भी बताया जाता है कि अगर सीबीएसई के नियमों के विरुद्ध काम किया तो मान्यता रद्द की जा सकती है।
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एनसीईआरटी की किताबें सस्ती होती हैं जबकि प्राइवेट पब्लिशर की किताबें कई गुना महंगी। प्राइवेट पब्लिशर की किताबें लगवाने में भारी भरकम कमीशन का खेल होता है। इसमें मोटी कमाई है इसलिए विद्यार्थियों को इन्हीं किताबों को पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है।
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लाखों की कमाई
किताबों का कोई भी सैट 15 सौ रुपये से कम नहीं है। छठी से आठवीं तक की किताबें 2500 हजार से 3500 तक के आ रहे हैं। एक सेट में 10 के लगभग किताबें होती हैं। एक किताब पर कंपनी बेचने वाले को 50 प्रतिशत तक छूट देती है लेकिन अभिभावकों को नाम मात्र की छूट पर ये किताबें दी जाती हैं। जो स्कूल किताबें भी बेच रहे हैं वह केवल किताबों में ही 10 लाख रुपये तक कमा ले रहे हैं।
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क्या विभाग कर पाएगा कार्रवाई
पिछले कई वर्षों से निजी स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर की किताबें बेची जा रही हैं और पढ़ाई जा रही हैं लेकिन अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया कि किसी भी स्कूल के विरुद्ध प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है। अगर परिजन उनकी शिकायत भी देते हैं तो नाम मात्र की कार्रवाई कर छोड़ दिया जाता है। सीबीएसई ने अब नया सर्कुलर जारी तो कर दिया है लेकिन अभिभावकों के मन में अब भी निजी स्कूलों पर कार्रवाई को लेकर संदेह है। हालांकि सीबीएसई की अतिरिक्त निदेशक डॉ. सुगंध शर्मा का कहना है कि पुख्ता सबूत पेश करने पर ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द की जाएगी। उनका कहना है कि स्कूलों को मान्यता देते समय भी बताया जाता है कि अगर सीबीएसई के नियमों के विरुद्ध काम किया तो मान्यता रद्द की जा सकती है।