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कैटल फ्री : कागजों में चार बार योजनाएं बनीं, धरातल पर एक न उतरी
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शहर की विभिन्न गलियों, बाजारों व मुख्य सड़कों पर घूम रहे 800 से अधिक बेसहारा गोवंश से शहरवासी परेशान है। पिछले छह सालों में इन बेसहारा गोवंश को सहारा देने के लिए कागजों में करीब चार बार योजनाएं बन चुकी है लेकिन धरातल पर कोई भी नहीं उतर पाई है।
अब हालात यह हैं कि आए दिन हिंसक हो रहे सांड़ों की चपेट में आने से आए दिन लोग घायल हो रहे हैं। वहीं आपसी लड़ाई के दौरान कई वाहन भी चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अक्सर बीच सड़कों पर बैठे इस गोवंश के कारण हादसों में भी बढ़ोतरी होती जा रही है। सुबह स्कूलों में जाने वाले बच्चों, कार्यालय में जाने वाली महिलाओं व अन्य राहगीरों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि कहीं बेसहारा गोवंश आपस में भिड़ गए तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। बेसहारा गोवशों द्वारा टक्कर मारने से गत अगस्त माह में ही एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं पिछले तीन सालों में करीब पांच लोग इनकी चपेट में आकर असमय काल के गाल में समा गए हैं। लोगों का कहना है कि नगरपालिका एवं प्रशासन सुध नहीं ले रहे हैं। प्रतिदिन शहर के मुख्य बाजारों से लेकर स्टेट हाईवे तक घूमने वाले इनके झुंडों के कारण हादसे हो रहे हैं। शहर की गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजार, सड़कों पर इनका जमावड़ा है जिससे दुकानदार से लेकर आम आदमी तक परेशान हैं। आए दिन कहीं न कहीं इनकी वजह से दुर्घटना होने की खबर आती रहती है। नगर पालिका ने कई बार बेसहारा गोवंशों को छोड़ने के लिए नंदी गोशाला के लिए प्रस्ताव पास किए जा चुके है लेकिन वह भी कागजों में सिमट कर रह गई।
पांच वर्ष पूर्व चला था अभियान
पांच वर्ष पूर्व शहर को कैटल फ्री करने के लिए नगरपालिका द्वारा बेसहारा पशुओं को पकड़कर आसपास की गोशालाओं में छोड़ा गया था। उस समय रंग के हिसाब से पशुओं को टैग लगाकर गोशालाओं में छोड़ा गया था। टैग के आधार पर गोशाला की पहचान होती थी, लेकिन अब यह टैग लगे पशु भी सैकड़ों की संख्या में शहर में घूम रहे हैं।
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शहर के आसपास एक दर्जन से अधिक गोशालाएं
शहर के आसपास एक दर्जन से अधिक गोशालाएं हैं जिन्हें सरकार द्वारा समय-समय पर आर्थिक सहायता दी जाती है लेकिन शहरवासियों को बेसहारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए न तो गोशालाएं आगे आ रही हैं और न ही नगरपालिका व प्रशासन। पिछले चार साल से इनका आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। शहर के मुख्य चौक-चौराहों से लेकर बाजारों में इनकी हिंसक घटनाओं के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। वाहनों को क्षतिग्रस्त करने से लेकर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
इन स्थानों पर अधिक समस्या
शहर के बालाजी चौक, परशुराम चौक, सब्जी मंडी, शॉपिंग कांपलेक्स, आईटीआई रोड, रेलवे रोड, गोशाला रोड, अनाज मंडी, स्टेट हाईवे, सतनाली चौक, ब्रह्मचारी रोड सहित शहर की गलियों तक इनका जमावड़ा रहता है।
मोदाश्रम के आसपास नंदीशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेज रखा है। स्वीकृति आने के तुरंत बाद ही नंदीशाला का निर्माण करवाकर गोवंशों को उसमें भेज दिया जाएगा।
-रमेश सैनी, प्रधान, नगरपालिका।
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अब हालात यह हैं कि आए दिन हिंसक हो रहे सांड़ों की चपेट में आने से आए दिन लोग घायल हो रहे हैं। वहीं आपसी लड़ाई के दौरान कई वाहन भी चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। अक्सर बीच सड़कों पर बैठे इस गोवंश के कारण हादसों में भी बढ़ोतरी होती जा रही है। सुबह स्कूलों में जाने वाले बच्चों, कार्यालय में जाने वाली महिलाओं व अन्य राहगीरों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यदि कहीं बेसहारा गोवंश आपस में भिड़ गए तो कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। बेसहारा गोवशों द्वारा टक्कर मारने से गत अगस्त माह में ही एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। वहीं पिछले तीन सालों में करीब पांच लोग इनकी चपेट में आकर असमय काल के गाल में समा गए हैं। लोगों का कहना है कि नगरपालिका एवं प्रशासन सुध नहीं ले रहे हैं। प्रतिदिन शहर के मुख्य बाजारों से लेकर स्टेट हाईवे तक घूमने वाले इनके झुंडों के कारण हादसे हो रहे हैं। शहर की गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य बाजार, सड़कों पर इनका जमावड़ा है जिससे दुकानदार से लेकर आम आदमी तक परेशान हैं। आए दिन कहीं न कहीं इनकी वजह से दुर्घटना होने की खबर आती रहती है। नगर पालिका ने कई बार बेसहारा गोवंशों को छोड़ने के लिए नंदी गोशाला के लिए प्रस्ताव पास किए जा चुके है लेकिन वह भी कागजों में सिमट कर रह गई।
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पांच वर्ष पूर्व चला था अभियान
पांच वर्ष पूर्व शहर को कैटल फ्री करने के लिए नगरपालिका द्वारा बेसहारा पशुओं को पकड़कर आसपास की गोशालाओं में छोड़ा गया था। उस समय रंग के हिसाब से पशुओं को टैग लगाकर गोशालाओं में छोड़ा गया था। टैग के आधार पर गोशाला की पहचान होती थी, लेकिन अब यह टैग लगे पशु भी सैकड़ों की संख्या में शहर में घूम रहे हैं।
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शहर के आसपास एक दर्जन से अधिक गोशालाएं
शहर के आसपास एक दर्जन से अधिक गोशालाएं हैं जिन्हें सरकार द्वारा समय-समय पर आर्थिक सहायता दी जाती है लेकिन शहरवासियों को बेसहारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए न तो गोशालाएं आगे आ रही हैं और न ही नगरपालिका व प्रशासन। पिछले चार साल से इनका आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। शहर के मुख्य चौक-चौराहों से लेकर बाजारों में इनकी हिंसक घटनाओं के कारण कई बार हादसे हो चुके हैं। वाहनों को क्षतिग्रस्त करने से लेकर दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
इन स्थानों पर अधिक समस्या
शहर के बालाजी चौक, परशुराम चौक, सब्जी मंडी, शॉपिंग कांपलेक्स, आईटीआई रोड, रेलवे रोड, गोशाला रोड, अनाज मंडी, स्टेट हाईवे, सतनाली चौक, ब्रह्मचारी रोड सहित शहर की गलियों तक इनका जमावड़ा रहता है।
मोदाश्रम के आसपास नंदीशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेज रखा है। स्वीकृति आने के तुरंत बाद ही नंदीशाला का निर्माण करवाकर गोवंशों को उसमें भेज दिया जाएगा।
-रमेश सैनी, प्रधान, नगरपालिका।