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Mahendragarh-Narnaul News: 2.13 करोड़ से होगा बीरबल का छत्ता का कायाकल्प, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
Tue, 27 May 2025 01:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 27 May 2025 01:22 AM IST
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फोटो नंबर-01नारनौल का ऐतिहासिक स्मारक राय बाल मुकुंददास का छत्ता। संवाद
नारनौल।
शहर के बीचोबीच स्थित ऐतिहासिक इमारत बीरबल का छत्ता का जल्द ही कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए लोकनिर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तरफ से 2.13 करोड़ रुपये में टेंडर भी लगा दिया है।
शहरवासियों को बीरबल का छत्ता का नया रूप देखने को मिलेगा। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, वहीं लोगों की आय भी बढ़ेगी।
राजस्थान की तरफ जाने वाली ज्यादातर विदेशी पर्यटक नारनौल में ठहरते हैं। ऐसे में अब बीरबल के छत्ता का भी कायाकल्प हो जाएगा तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वैसे भी नारनौल शहर में बीरबल के छत्ता के अलावा जलमहल, चोर गुंबद, अलीजान की बावड़ी जैसे ऐतिहासिक इमारतें हैं, वहीं ढोसी की पहाड़ी पर बन रहा रोप वे आने वाले समय में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
बीरबल का छत्ता शहर की घनी आबादी के बीच स्थित है, जो करीब 365 साल पुरानी है। यह इमारत पत्थर व चूने से बना हुआ है। जिसका निर्माण नारनौल के दीवान राय बालमुकुंद दास ने करवाया था।
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पांच मंजिला इमारत का आकार चौकोर
बीरबल का छत्ता पांच मंजिला है, जिसका आकार चौकोर है। बीरबल छत्ता में लगे संगमरमर के विशाल स्तंभ, लंबे-चौड़े बरामदे, भव्य दरबार हाॅल और कलात्मक छतरियां वास्तुकला का अनूठा नमूना हैं। इस भवन के भीतर पानी की आपूर्ति व निकासी तथा भूमिगत मंजिलों में प्रकाश पहुंचने की व्यवस्था भी अपने आप में बेजोड़ है। इतना ही नहीं फव्वारों तथा झरने भी छत्ते की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं।
ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोद्धार होने से बढ़ेगी लोगों की आय
नारनौल व आसपास के क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं है, जिसकी वजह से युवाओं को रोजगार के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है। अगर नारनौल के ऐतिहासिक स्थलों की कायाकल्प कर दी जाएगी तो पर्यटक आकर्षित होंगे। जिससे युवाओं को शहर में ही रोजगार के अवसर मिलने शुरू हो जाएंगे।
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बीरबल का छत्ता का 2.13 करोड़ रुपये में जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसका टेंडर लगा दिया है। आगामी पांच-छह माह में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
जितेंद्र कुमार, कनिष्ठ अभियंता, लोकनिर्माण विभाग, नारनौल।
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शहर के बीचोबीच स्थित ऐतिहासिक इमारत बीरबल का छत्ता का जल्द ही कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए लोकनिर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की तरफ से 2.13 करोड़ रुपये में टेंडर भी लगा दिया है।
शहरवासियों को बीरबल का छत्ता का नया रूप देखने को मिलेगा। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, वहीं लोगों की आय भी बढ़ेगी।
राजस्थान की तरफ जाने वाली ज्यादातर विदेशी पर्यटक नारनौल में ठहरते हैं। ऐसे में अब बीरबल के छत्ता का भी कायाकल्प हो जाएगा तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। वैसे भी नारनौल शहर में बीरबल के छत्ता के अलावा जलमहल, चोर गुंबद, अलीजान की बावड़ी जैसे ऐतिहासिक इमारतें हैं, वहीं ढोसी की पहाड़ी पर बन रहा रोप वे आने वाले समय में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा।
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बीरबल का छत्ता शहर की घनी आबादी के बीच स्थित है, जो करीब 365 साल पुरानी है। यह इमारत पत्थर व चूने से बना हुआ है। जिसका निर्माण नारनौल के दीवान राय बालमुकुंद दास ने करवाया था।
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पांच मंजिला इमारत का आकार चौकोर
बीरबल का छत्ता पांच मंजिला है, जिसका आकार चौकोर है। बीरबल छत्ता में लगे संगमरमर के विशाल स्तंभ, लंबे-चौड़े बरामदे, भव्य दरबार हाॅल और कलात्मक छतरियां वास्तुकला का अनूठा नमूना हैं। इस भवन के भीतर पानी की आपूर्ति व निकासी तथा भूमिगत मंजिलों में प्रकाश पहुंचने की व्यवस्था भी अपने आप में बेजोड़ है। इतना ही नहीं फव्वारों तथा झरने भी छत्ते की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं।
ऐतिहासिक स्थलों का जीर्णोद्धार होने से बढ़ेगी लोगों की आय
नारनौल व आसपास के क्षेत्र में कोई उद्योग नहीं है, जिसकी वजह से युवाओं को रोजगार के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता है। अगर नारनौल के ऐतिहासिक स्थलों की कायाकल्प कर दी जाएगी तो पर्यटक आकर्षित होंगे। जिससे युवाओं को शहर में ही रोजगार के अवसर मिलने शुरू हो जाएंगे।
बीरबल का छत्ता का 2.13 करोड़ रुपये में जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसका टेंडर लगा दिया है। आगामी पांच-छह माह में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
जितेंद्र कुमार, कनिष्ठ अभियंता, लोकनिर्माण विभाग, नारनौल।