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बायोगैस संयंत्र की ओर बढ़ रहा किसानों रूझान
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नारनौल। दो पशु रखने वाले किसान भी अब अपने घर में बायोगैस संयंत्र लगवाने में रुचि दिखा रहे हैं। जिले में ऐसे किसानों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। किसानों का कहना है कि ऐसा करने से एलपीजी के झंझट से छुटकारा तो मिल ही रहा है। साथ ही उनकी अच्ची खासी बचत भी हो रही है।
जिले में अब तक लगभग 50 किसान बाये गैस संयंत्र लगा चुके हैं, जो पिछले वर्ष की मुकाबले लगभग दस गुणा अधिक हैं। सरकारी नियमों के अनुसार व न्यू नेशनल बायोगैस एवं आर्गेनिक मैन्योर प्रोग्राम के तहत जिले के जिन किसानों के पास 2 पशुओं से अधिक हैं वे किसान गोबर की उपलब्धता के आधार पर बायोगैस संयंत्र लगवा सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को 12 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। पशुपालक किसान अपने घरों में बायोगैस प्लांट लगाकर प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार रुपए की बचत कर सकता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से सहायक कृषि अभिय3ता डीएस यादव ने बताया कि पहले किसान इस योजना को अपनाने से कतराते थे। मगर जब 1-2 किसानों ने इसको शुरू किया तो दूसरे किसानों ने भी इस ओर रुझान दिखाया। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे किसानों को उत्तम खाद के साथ-साथ ईंधन भी आसानी से मिल मिलता है। इसके अलावा बायोगैस संयंत्र के प्रयोग करने से प्रदूषण भी नहीं होता है क्योंकि यह धूआं रहित संयंत्र है। बायोगैस के कारण लकड़ी की भी बचत होती है। इसलिए किसान बायोगैस प्लांट लगाकर और ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
बायोगैस संयंत्र को शौचालय से जोड़ने पर मिलेगा 16 सौ रुपये का अतिरिक्त लाभ
सहायक कृषि अभियंता डीएस यादव ने बताया कि इस योजना के तहत बायोगैस संयंत्र के साथ शौचालय से जोड़ने पर 16 सौ रुपये का अतिरिक्त अनुदान अलग से दिया जाता है। किसान 2 से 6 घन मीटर क्षमता के बायोगैस संयंत्र लगवा सकते हैं। इसके लिए किसानों को उपरोक्त योजना के तहत 12 हजार रुपये का अनुदान सरकार की ओर से दिया जा रहा है।
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गोबर निस्तारण से लाभ
नारनौल मोहल्ला बड़ा बाग निवासी किसान हेतराम ने बताया कि वह खेती के अलावा डेयरी का भी व्यवसाय करते हैं। बायोगैस संयंत्र लगाने से पूर्व उनके सामने गोबर के निस्तारण की बहुत बड़ी समस्या थी लेकिन पहले जिस गोबर को वह समस्या मानते थे, वही अब उनके लिए मुनाफे का सौदा बन गया है। वह बायोगैस का प्रयोग पशुओं की चाट एवं खाना इत्यादि बनाने के लिए कर रहे हैं। बायोगैस प्लांट से खेतों के लिए अत्यंत लाभकारी पोषक तत्वों से भरपूर बायो खाद की प्राप्ति भी हो रही है। इससे फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।
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जिले में अब तक लगभग 50 किसान बाये गैस संयंत्र लगा चुके हैं, जो पिछले वर्ष की मुकाबले लगभग दस गुणा अधिक हैं। सरकारी नियमों के अनुसार व न्यू नेशनल बायोगैस एवं आर्गेनिक मैन्योर प्रोग्राम के तहत जिले के जिन किसानों के पास 2 पशुओं से अधिक हैं वे किसान गोबर की उपलब्धता के आधार पर बायोगैस संयंत्र लगवा सकते हैं। इसके लिए सरकार द्वारा किसानों को 12 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। पशुपालक किसान अपने घरों में बायोगैस प्लांट लगाकर प्रतिवर्ष 40 से 50 हजार रुपए की बचत कर सकता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से सहायक कृषि अभिय3ता डीएस यादव ने बताया कि पहले किसान इस योजना को अपनाने से कतराते थे। मगर जब 1-2 किसानों ने इसको शुरू किया तो दूसरे किसानों ने भी इस ओर रुझान दिखाया। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे किसानों को उत्तम खाद के साथ-साथ ईंधन भी आसानी से मिल मिलता है। इसके अलावा बायोगैस संयंत्र के प्रयोग करने से प्रदूषण भी नहीं होता है क्योंकि यह धूआं रहित संयंत्र है। बायोगैस के कारण लकड़ी की भी बचत होती है। इसलिए किसान बायोगैस प्लांट लगाकर और ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
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बायोगैस संयंत्र को शौचालय से जोड़ने पर मिलेगा 16 सौ रुपये का अतिरिक्त लाभ
सहायक कृषि अभियंता डीएस यादव ने बताया कि इस योजना के तहत बायोगैस संयंत्र के साथ शौचालय से जोड़ने पर 16 सौ रुपये का अतिरिक्त अनुदान अलग से दिया जाता है। किसान 2 से 6 घन मीटर क्षमता के बायोगैस संयंत्र लगवा सकते हैं। इसके लिए किसानों को उपरोक्त योजना के तहत 12 हजार रुपये का अनुदान सरकार की ओर से दिया जा रहा है।
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गोबर निस्तारण से लाभ
नारनौल मोहल्ला बड़ा बाग निवासी किसान हेतराम ने बताया कि वह खेती के अलावा डेयरी का भी व्यवसाय करते हैं। बायोगैस संयंत्र लगाने से पूर्व उनके सामने गोबर के निस्तारण की बहुत बड़ी समस्या थी लेकिन पहले जिस गोबर को वह समस्या मानते थे, वही अब उनके लिए मुनाफे का सौदा बन गया है। वह बायोगैस का प्रयोग पशुओं की चाट एवं खाना इत्यादि बनाने के लिए कर रहे हैं। बायोगैस प्लांट से खेतों के लिए अत्यंत लाभकारी पोषक तत्वों से भरपूर बायो खाद की प्राप्ति भी हो रही है। इससे फसलों की पैदावार और गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है।