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बीईओ मिड डे मील की नियमित जांच करें : सुनील
Fri, 19 Sep 2025 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 19 Sep 2025 11:30 PM IST
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फोटो नंबर-34मिड डे मील की जांच करते क्लस्टर हैड। स्रोत-विभाग
नारनौल। शिक्षा निदेशालय के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त ने मिड डे मील की गुणवत्ता की जांच को लेकर निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को स्पष्ट किया है कि वे अपने क्षेत्र में मिड डे मील की नियमित जांच करें। इसके साथ ही जिले के सभी 85 क्लस्टर हेड को भी आदेश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन कम से कम एक विद्यालय में मिड डे मील की जांच अनिवार्य रूप से करें।
जिलेभर में रोजाना 85 से अधिक विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और मानकों की जांच सुनिश्चित हो सकेगी। मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके लेकिन कई बार शिकायतें मिलती हैं कि भोजन की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती।
सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि भविष्य में यदि नए बर्तन खरीदे जाएं तो वे लोहे के ही हों। इस संबंध में लोहे के बर्तनों का उपयोग सभी स्कूलों में अनिवार्य कर दिया गया है।
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नियमित निरीक्षण से न केवल बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध होगा, बल्कि विद्यालयों में स्वच्छता और अनुशासन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा विभाग का यह कदम मिड डे मील योजना को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
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शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को स्पष्ट किया है कि वे अपने क्षेत्र में मिड डे मील की नियमित जांच करें। इसके साथ ही जिले के सभी 85 क्लस्टर हेड को भी आदेश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन कम से कम एक विद्यालय में मिड डे मील की जांच अनिवार्य रूप से करें।
जिलेभर में रोजाना 85 से अधिक विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और मानकों की जांच सुनिश्चित हो सकेगी। मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके लेकिन कई बार शिकायतें मिलती हैं कि भोजन की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती।
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सभी विद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि भविष्य में यदि नए बर्तन खरीदे जाएं तो वे लोहे के ही हों। इस संबंध में लोहे के बर्तनों का उपयोग सभी स्कूलों में अनिवार्य कर दिया गया है।
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नियमित निरीक्षण से न केवल बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध होगा, बल्कि विद्यालयों में स्वच्छता और अनुशासन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा विभाग का यह कदम मिड डे मील योजना को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।