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40 युवाओं को दिया स्वरोजगार स्थापित करने के लिए मधुमक्खी पालन व केंचुआ खाद बनाने का प्रशिक्षण
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कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को संबोधित करते कृषि अधिकारी
- फोटो : Narnol
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महेंद्रगढ़। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की आर्या परियोजना के तहत 5 अक्तूबर से शुरू हुए शिविर का वीरवार को समापन हुआ। कार्यक्रम के प्रथम चरण में पांच दिन 20 बेरोजगार युवाओं को मधुमक्खी पालन व द्वितीय चरण में 20 युवाओं को केंचुआ खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि इन प्रशिक्षणों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। जिससे वे कृषि की ओर आकर्षित हों और उन्हें स्वरोजगार से आय प्राप्त हो सके। परियोजना का उद्देश्य युवाओं को उधम स्थापित करने में उचित सहायता प्रदान करना है। मधुमक्खी पालक प्रशिक्षण के आयोजक डॉ. जयलाल यादव ने मधुमक्खी पालन कब और कैसे करें, सहायक यंत्र, उपयोगी पौधे, बीमारियां व उनसे बचाव, कृषि में मधुमक्खी पालन का योगदान व मधुमक्खी पालन से जुड़े आर्थिक लेखाजोखा तैयार करने के बारे में अवगत कराया।
केंचुआ खाद प्रशिक्षण के आयोजक डॉ. आशीष श्योराण ने जैविक खेती का महत्व एवं उपयोग, खाद एवं केंचुआ खाद में विभिन्नता, केंचुओं का वर्गीकरण, वर्मीकंपोस्ट खाद बनाने की विधियां आदि विषयों पर जानकारी दी।
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केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि इन प्रशिक्षणों का मुख्य उद्देश्य युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। जिससे वे कृषि की ओर आकर्षित हों और उन्हें स्वरोजगार से आय प्राप्त हो सके। परियोजना का उद्देश्य युवाओं को उधम स्थापित करने में उचित सहायता प्रदान करना है। मधुमक्खी पालक प्रशिक्षण के आयोजक डॉ. जयलाल यादव ने मधुमक्खी पालन कब और कैसे करें, सहायक यंत्र, उपयोगी पौधे, बीमारियां व उनसे बचाव, कृषि में मधुमक्खी पालन का योगदान व मधुमक्खी पालन से जुड़े आर्थिक लेखाजोखा तैयार करने के बारे में अवगत कराया।
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केंचुआ खाद प्रशिक्षण के आयोजक डॉ. आशीष श्योराण ने जैविक खेती का महत्व एवं उपयोग, खाद एवं केंचुआ खाद में विभिन्नता, केंचुओं का वर्गीकरण, वर्मीकंपोस्ट खाद बनाने की विधियां आदि विषयों पर जानकारी दी।
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