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आयुष्मान भारत योजना : 50 शिकायतों में से 48 नाम शामिल कराने को आईं
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ayushman
- फोटो : Narnol
नारनौल। आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को अभी तक 50 शिकायतें मिली है। इसमें 48 मामले आयुष्मान भारत में नाम शामिल करने से संबंधित है। जबकि, दो केस निजी अस्पतालों से संबंधित है। इसमें से 48 शिकायतों की जांच पूरी हो चुकी है।
बता दें कि गरीबों को निशुल्क और बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत पिछले साल की थी। इस योजना के अब एक साल पूरे होने वाले हैं। इस योजना में शामिल 2,08,158 में से करीब 42000 लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं। इस योजना में काफी संख्या में लोग अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं। ऐसे में सरकार के विभिन्न शिकायत केंद्रों के माध्यम से आयुष्मान भारत में जुड़वाने की शिकायत दी थी।
लोगों का तर्क था कि लंबे समय से बीपीएल और इस योजना में शामिल होने के मानक को पूरा करते हैं। ऐसे में उनका नाम भी इस योजना में शामिल किया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी शिकायतों की जांच करने के बाद उसका निस्तारण कर दिया गया। विभाग के अनुसार साल 2011 में हुए सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर सूची में शामिल लोग ही पात्र है। सूची में शामिल लोग अपने परिवार के लोगों के नाम जुड़वा सकते हैं। नए लोगों के नाम अभी नहीं जोड़े जा रहे हैं। दो मामले निजी अस्पतालों से जुड़े थे। इसमें पात्र होने के बाद पैसे लेने के आरोप लगे थे। इसमें एक मामले में जांच टीम ने पाया कि मरीज पात्र होने के बाद भी गोल्डन कार्ड नहीं बनाया गया। दूसरे मामले में पीड़ित ने अपने बच्चे का निजी अस्पताल में उपचार करा लिया। बाद में अस्पताल के खिलाफ शिकायत दे दी। निजी अस्पतालों के अनुसार कई बार मरीज के उपचार का आयुष्मान भारत से प्राथमिक स्वीकृति नहीं मिल पाती है जबकि, मरीज को लगता है कि उसका कार्ड बना हुआ है तो उपचार मिलना चाहिए।
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विभाग से मिली शिकायतें
सीएम विंडो आयुष्मान भारत पर सात, सीएम विंडो सीएस आफिस-पांच, डीसी आफिस ग्रीवांस-31 व जीआरएमएस पर सात शिकायतें मिली थी। इसमें से दो को छोड़कर सभी शिकायतों का समाधान हो गया है।
अमर उजाला की ओर से आयुष्मान भारत पर चल रहे अभियान कितनी सुधरी सेहत पर कई लोगों ने सवाल पूछे हैं। जिसका जवाब आयुष्मान भारत के सूचना प्रबंधक उमेश सैनी ने दिया।
प्रश्न- ओेम प्रकाश नारनौल- दस साल से बीपीएल कार्ड बना हुआ है। इसके बाद भी आयुष्मान योजना में नाम नहीं है।
उत्तर- साल 2011 सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर लोगों को शामिल किया गया है।
प्रशन- राधेश्याम, महेंद्रगढ़- गोल्डन कार्ड धारक हूं व दांत की समस्या है, कौन का अस्पताल बेहतर होगा।
उत्तर- नारनौल के दो अस्पतालों में यह सेवा उपलब्ध है। टोल फ्री नंबर 14555 पर जानकारी ले सकते है।
प्रश्न- श्याम सुंदर, महेंद्रगढ़- आंत की बीमारी है, बेहतर अस्पताल कौन होगा।
उत्तर-जिले में पांच अस्पतालों में सेवा उपलब्ध है। 14555 नंबर पर जानकारी ले सकते है।
प्रश्न- एचआईवी व टीबी का मरीज हूं, गोल्डन नहीं बनवा पाया हूं। कहां कार्ड बनेगा।
उत्तर- कार्ड किसी भी आयुष्मान केंद्र से बनवाया जा सकता है, लिस्ट में नाम होना चाहिए
आयुष्मान भारत के प्रति लोगों को किया जागरूक
नारनौल। आयुष्मान भारत पखवाड़ा के तहत मंगलवार को उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसमें ओपीडी, अस्पताल कैंपस के बाहर समेत अन्य विंगों में लोगों को आयुष्मान योजना के बारे में जानकारी दी गई। आयुष्मान भारत योजना से संबंधित पंपलेट भी बांटे गए। आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ. डीके सैनी ने बताया की इसके तहत 15 दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इस मौके पर डॉ. प्रतीक, सूचना प्रबंधन उमेश सैनी व सक्षम युवा मौजूद थे।
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बता दें कि गरीबों को निशुल्क और बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए केंद्र सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत पिछले साल की थी। इस योजना के अब एक साल पूरे होने वाले हैं। इस योजना में शामिल 2,08,158 में से करीब 42000 लोगों के गोल्डन कार्ड बने हैं। इस योजना में काफी संख्या में लोग अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं। ऐसे में सरकार के विभिन्न शिकायत केंद्रों के माध्यम से आयुष्मान भारत में जुड़वाने की शिकायत दी थी।
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लोगों का तर्क था कि लंबे समय से बीपीएल और इस योजना में शामिल होने के मानक को पूरा करते हैं। ऐसे में उनका नाम भी इस योजना में शामिल किया जाए। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सभी शिकायतों की जांच करने के बाद उसका निस्तारण कर दिया गया। विभाग के अनुसार साल 2011 में हुए सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर सूची में शामिल लोग ही पात्र है। सूची में शामिल लोग अपने परिवार के लोगों के नाम जुड़वा सकते हैं। नए लोगों के नाम अभी नहीं जोड़े जा रहे हैं। दो मामले निजी अस्पतालों से जुड़े थे। इसमें पात्र होने के बाद पैसे लेने के आरोप लगे थे। इसमें एक मामले में जांच टीम ने पाया कि मरीज पात्र होने के बाद भी गोल्डन कार्ड नहीं बनाया गया। दूसरे मामले में पीड़ित ने अपने बच्चे का निजी अस्पताल में उपचार करा लिया। बाद में अस्पताल के खिलाफ शिकायत दे दी। निजी अस्पतालों के अनुसार कई बार मरीज के उपचार का आयुष्मान भारत से प्राथमिक स्वीकृति नहीं मिल पाती है जबकि, मरीज को लगता है कि उसका कार्ड बना हुआ है तो उपचार मिलना चाहिए।
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विभाग से मिली शिकायतें
सीएम विंडो आयुष्मान भारत पर सात, सीएम विंडो सीएस आफिस-पांच, डीसी आफिस ग्रीवांस-31 व जीआरएमएस पर सात शिकायतें मिली थी। इसमें से दो को छोड़कर सभी शिकायतों का समाधान हो गया है।
अमर उजाला की ओर से आयुष्मान भारत पर चल रहे अभियान कितनी सुधरी सेहत पर कई लोगों ने सवाल पूछे हैं। जिसका जवाब आयुष्मान भारत के सूचना प्रबंधक उमेश सैनी ने दिया।
प्रश्न- ओेम प्रकाश नारनौल- दस साल से बीपीएल कार्ड बना हुआ है। इसके बाद भी आयुष्मान योजना में नाम नहीं है।
उत्तर- साल 2011 सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर लोगों को शामिल किया गया है।
प्रशन- राधेश्याम, महेंद्रगढ़- गोल्डन कार्ड धारक हूं व दांत की समस्या है, कौन का अस्पताल बेहतर होगा।
उत्तर- नारनौल के दो अस्पतालों में यह सेवा उपलब्ध है। टोल फ्री नंबर 14555 पर जानकारी ले सकते है।
प्रश्न- श्याम सुंदर, महेंद्रगढ़- आंत की बीमारी है, बेहतर अस्पताल कौन होगा।
उत्तर-जिले में पांच अस्पतालों में सेवा उपलब्ध है। 14555 नंबर पर जानकारी ले सकते है।
प्रश्न- एचआईवी व टीबी का मरीज हूं, गोल्डन नहीं बनवा पाया हूं। कहां कार्ड बनेगा।
उत्तर- कार्ड किसी भी आयुष्मान केंद्र से बनवाया जा सकता है, लिस्ट में नाम होना चाहिए
आयुष्मान भारत के प्रति लोगों को किया जागरूक
नारनौल। आयुष्मान भारत पखवाड़ा के तहत मंगलवार को उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसमें ओपीडी, अस्पताल कैंपस के बाहर समेत अन्य विंगों में लोगों को आयुष्मान योजना के बारे में जानकारी दी गई। आयुष्मान भारत योजना से संबंधित पंपलेट भी बांटे गए। आयुष्मान भारत के नोडल अधिकारी अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ. डीके सैनी ने बताया की इसके तहत 15 दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। इस मौके पर डॉ. प्रतीक, सूचना प्रबंधन उमेश सैनी व सक्षम युवा मौजूद थे।