फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   At the age of 26, Ram Singh sacrificed his life while fighting the enemies.

Mahendragarh-Narnaul News: 26 साल की आयु में दुश्मनों से लड़ते रामसिंह ने दी थी प्राणों की आहुति

Thu, 25 Jul 2024 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 25 Jul 2024 11:39 PM IST
विज्ञापन
At the age of 26, Ram Singh sacrificed his life while fighting the enemies.
फोटों नंबर-03शहीद विरेंद्र सिंह का फाईल फोटो।
मंडी अटेली। आज समूचा राष्ट्र कारगिल विजय दिवस मनाते हुए शहीदों को सलामी दे रहा है। 26 जुलाई 1999 को जब भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ते हुए पाक सेना को मुंह तोड़ जवाब दिया तो देश में खुशी माहौल बन गया था। शहीदों की कुर्बानियों के कारण ही आज हम देश में सुरक्षित है। कारगिल युद्ध के दौरान 25 साल पहले जब अटेली के गांव रामपुरा में शहीद रामसिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा आया, तब उनकी आयु महज 26 वर्ष थी। हवलदार रामसिंह दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। शहीद के शव को देखकर माता-पिता की आंखें नम थीं, वहीं 3 वर्षीय बेटे भूदेव को अपनी छाती से लिपटाए शहीद की पत्नी तारावती अवाक दृष्टि से पति के पार्थिव शरीर को निहार रही थीं।
विज्ञापन

कारगिल विजय दिवस पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में तारावती ने कहा कि अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देना किसी भी व्यक्ति के लिए गौरव की बात होती है। पति की शहादत पर मुझे भी गर्व है। 25 साल पहले परिवार के लिए वह समय संकट का था। विशेष कर उस मासूम बच्चे के भविष्य को लेकर लेकिन हमने हिम्मत नही हारी और उसका पालन पोषण किया। जो आज पढ़ लिखकर अपने कार्य में व्यस्त हैं। नम आंखों से तारावती ने कहा कि सरकार की ओर से शहीद परिवारों को सम्मान स्वरूप गैस एजेंसी व पेट्रोल पंप इत्यादि की सुविधा देने का प्रावधान किया था, लेकिन उनके परिवार को अभी तक कुछ नहीं मिला। उस समय बेटा भूदेव मासूम बच्चा था और उसके लिए कोई भी व्यवसाय कर पाना संभव नहीं था। अब बेटा बड़ा हो गया है तो सरकार को सरकारी नौकरी या कुछ व्यवसाय से संबंधित सहायता करनी चाहिए। समय के साथ संघर्षरत शहीद रामसिंह के बेटे भूदेव का कहना है कि उसके अंदर एक जांबाज सैनिक का रक्त संचरण कर रहा है। यदि उसे भारतीय सेना में सेवा का अवसर मिले तो वह अपने पिता का अधूरा सपना पूरा कर सकता है।
विज्ञापन

कारगिल में दुश्मन से लड़ते हुए बिरेंद्र सिंह ने दी थी प्राणों की कुर्बानी

मंडी अटेली। अहीरवाल क्षेत्र रणबांकुरों की पावन स्थली रही है। भारत-चीन युद्ध से लेकर पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों सहित कारगिल युद्ध में भी यहां के वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी है। गांव गढ़ी रुथल निवासी स्वर्गीय बिरेंद्र सिंह ने भी अपने देश की रक्षा में अपनी शहादत दी थी, जो भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गई है। कारगिल विजय दिवस पर अमर उजाला से बातचीत में शहीद की पत्नी मनभावती देवी ने कहा कि मुझे अपने पति की शहादत पर गर्व है।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मेरे पति को शहीद का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन दो दशक बीत जाने के बावजूद भी न तो उनका कोई स्मारक स्थल बना है और न ही उनके नाम पर किसी स्कूल या मार्ग का नामकरण किया गया है। पिता की शहादत को प्रेरणा मानते हुए शहीद बिरेंद्र सिंह का बड़ा बेटा प्रवीण एमएससी तथा छोटा बेटा टिंकू भी एमएससी पास करके उच्च पद की तैयारियां कर रहे हैं। इसके साथ ही केंद्र सरकार द्वारा आवंटित गैस एजेंसी को चला रहे हैं। शहीद बिरेंद्र सिंह के भाई ओमप्रकाश लांबा ने बताया कि बिरेंद्र सिंह के मन में बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा था। कारगिल में दुश्मनों से लड़ते हुए अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी। ओमप्रकाश लांबा ने बताया कि भाई के चले जाने का दुख तो है, लेकिन शहीद का भाई होने के गौरव से सीना चौड़ा हो जाता है। शहादत दिवस पर शहीद बिरेंद्र सिंह के भतीजे व गढ़ी रुथल के सरपंच राहुल लांबा ने कहा कि शहीद मर कर भी अमर रहते हैं। हमें शहीद बिरेंद्र सिंह की शहादत पर गर्व है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed