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Mahendragarh-Narnaul News: रत्नकुमार सांभरिया की लाठी पुस्तक का किया विमोचन
Tue, 07 Oct 2025 11:37 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 07 Oct 2025 11:37 PM IST
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फोटो संख्या:-58 हकेंवि मं रत्नकुमार सांभरिया की लाठी तथा अन्य कहानियां पुस्तक का विमोचन करते हु
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शिक्षक डॉ. कामराज सिंधु द्वारा संपादित पुस्तक रत्नकुमार सांभरिया की लाठी और अन्य कहानियों की पुस्तक का विमोचन किया।
पुस्तक जनकथाकार रत्नकुमार सांभरिया की दस प्रतिनिधि कहानियों का संकलन है जिनमें समाज की विभिन्न परिस्थितियों, जातीय असमानताओं, स्त्री सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं का चित्रण किया गया है। समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. कमलेश कुमारी और अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया की कहानियां भारतीय समाज की आत्मा को छूती हैं। डॉ. कामराज सिंधु का यह संपादन साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो युवा पीढ़ी को समाज की सच्चाइयों और मूल्यों से अवगत कराएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे साहित्यिक कार्यों को सदैव प्रोत्साहित करता रहेगा, जो समाज में संवेदनशीलता, समानता और मानवीय दृष्टिकोण को सशक्त करें।
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विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया की लाठी तथा अन्य कहानियां जैसी पुस्तकें समाज को सोचने और आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया की कहानियां केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के संवाहक हैं। पुस्तक में सम्मिलित लाठी, फुलवा, हथौड़ा, गाड़िया, हिरणी, बूढ़ी, मियांजान की मुर्गी, खेत और भभूल्या जैसी कहानियां समाज के विविध पक्षों को गहराई से उजागर करती हैं।
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पुस्तक जनकथाकार रत्नकुमार सांभरिया की दस प्रतिनिधि कहानियों का संकलन है जिनमें समाज की विभिन्न परिस्थितियों, जातीय असमानताओं, स्त्री सशक्तीकरण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं का चित्रण किया गया है। समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा, प्रो. अशोक कुमार, डॉ. कमलेश कुमारी और अन्य शिक्षक भी उपस्थित रहे।
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कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया की कहानियां भारतीय समाज की आत्मा को छूती हैं। डॉ. कामराज सिंधु का यह संपादन साहित्य जगत के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है, जो युवा पीढ़ी को समाज की सच्चाइयों और मूल्यों से अवगत कराएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे साहित्यिक कार्यों को सदैव प्रोत्साहित करता रहेगा, जो समाज में संवेदनशीलता, समानता और मानवीय दृष्टिकोण को सशक्त करें।
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विश्वविद्यालय के समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया की लाठी तथा अन्य कहानियां जैसी पुस्तकें समाज को सोचने और आत्ममंथन करने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि रत्नकुमार सांभरिया की कहानियां केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के संवाहक हैं। पुस्तक में सम्मिलित लाठी, फुलवा, हथौड़ा, गाड़िया, हिरणी, बूढ़ी, मियांजान की मुर्गी, खेत और भभूल्या जैसी कहानियां समाज के विविध पक्षों को गहराई से उजागर करती हैं।