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Mahendragarh-Narnaul News: कारीगर दीये बनाने में जुटे
Tue, 07 Oct 2025 11:36 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 07 Oct 2025 11:36 PM IST
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फोटो नंबर- 04नारनौल में चाक पर मिट्टी के दीए बनाते बुजुर्ग कारीगर। संवाद
नारनौल। दिवाली पास आते ही कारीगर दीये बनाने में जुट गए हैं। अभी से शहर के मुख्य बाजारों में दीये बेचे जा रहे हैं। दूसरों का घर उजियारा करने के लिए बुजर्ग भी दीये बना रहे हैं।
नारनौल में थोक में 70 रुपये में 100 दीये और खुदरा में 100 रुपये में 100 बेचे जा रहे हैं। कारीगरों के अनुसार 100 दीयों को बनाने में करीब 50 रुपये का खर्च आता है। इस वर्ष जिले में दीयों का कारोबार करीब 70 लाख रुपये रहने की उम्मीद है।
इस बार मोमबत्ती व कई अन्य प्रकार के लाइट वाले दीये आकर्षण का केंद्र बने हैं।कारिगरों ने बताया कि पहले की तुलना में दीये की मांग में करीब 30% की गिरावट बनी है।
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वहीं मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कई कारीगर कम बचत के कारण पारंपरिक कार्य छोड़कर अन्य व्यवसाय को अपना रहे हैं। कारीगरों ने बताया कि अब मिट्टी के बर्तन व दीये की मांग अब केवल त्योहार व शादी-समारोह में रह गई है और लोग केवल शगुन के लिए मिट्टी के बर्तन खरीद रहे हैं। जिस कारण बचत नहीं निकल पाती, इसलिए लोग पारंपरिक कार्य को छोड़ रहे हैं।
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नारनौल में थोक में 70 रुपये में 100 दीये और खुदरा में 100 रुपये में 100 बेचे जा रहे हैं। कारीगरों के अनुसार 100 दीयों को बनाने में करीब 50 रुपये का खर्च आता है। इस वर्ष जिले में दीयों का कारोबार करीब 70 लाख रुपये रहने की उम्मीद है।
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इस बार मोमबत्ती व कई अन्य प्रकार के लाइट वाले दीये आकर्षण का केंद्र बने हैं।कारिगरों ने बताया कि पहले की तुलना में दीये की मांग में करीब 30% की गिरावट बनी है।
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वहीं मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कई कारीगर कम बचत के कारण पारंपरिक कार्य छोड़कर अन्य व्यवसाय को अपना रहे हैं। कारीगरों ने बताया कि अब मिट्टी के बर्तन व दीये की मांग अब केवल त्योहार व शादी-समारोह में रह गई है और लोग केवल शगुन के लिए मिट्टी के बर्तन खरीद रहे हैं। जिस कारण बचत नहीं निकल पाती, इसलिए लोग पारंपरिक कार्य को छोड़ रहे हैं।