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Mahendragarh-Narnaul News: भीषण गर्मी में हांफने लगे पशु, दूध का उत्पादन बचा आधा

Thu, 23 May 2024 01:48 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 23 May 2024 01:48 AM IST
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Animals panting in the scorching heat, milk production saved half
फोटो संख्या:57- कनीना में पशुओं का उपचार करते पशु चिकित्सक डॉ. पवन कांगड़ा --स्रोत-संवाद
कनीना (महेंद्रगढ़)। पिछले एक पखवाड़े से अत्याधिक गर्मी के चलते क्षेत्र में दूध उत्पादन भी 50 प्रतिशत प्रभावित हो गया है। गर्मी के चलते पशु हांफने लगे हैं व पशुओं की दूध देने की क्षमता भी आधी हो गई है। इस समय कनीना क्षेत्र में दुधारू पशुओं की संख्या का आंकड़ा 44 हजार है, जबकि पिछले वर्ष 38 दुधारू पशु थे। गर्मी के मौसम में हरे चारे की कमी व लगातार बढ़ रहे तापमान का असर पशुओं की सेहत पर भी होने लगा है।
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राजकीय पशु चिकित्सालय के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पवन कांगड़ा ने बताया कि मई माह में गर्मी चरम पर है व तापमान में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे पशुधन में भी दुग्ध कम होता जा रहा है। तापमान बढ़ने के साथ-साथ पशुओं का शारीरिक तापमान बढ़ जाता है एवं पशु हांफना शुरू कर देते हैं। पशु चरना पीना कम कर देते हैं जिससे पशुओं में दुग्ध उत्पादन कम हो जाता है एवं पशुओं की प्रजनन क्षमता भी कम हो जाती है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो पशु में ताप घात की समस्या उत्पन्न हो सकती है एवं पशु की मृत्यु भी हो सकती है।
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पशुपालकों को किया जा रहा है देखभाल के लिए जागरूक
राजकीय पशु अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पवन कांगड़ा ने बताया कि पशु पालकों तक सूचना पहुंचाने के लिए व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाया है। ग्रुप के माध्यम से मौसम के हिसाब से आने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उनका समाधान करने की जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है। वहीं पशुपालकों का कहना है कि गर्मी के कारण इस बार पशुओं की दूध देने की क्षमता काफी प्रभावित हुई है। भीषण गर्मी और लू के चलते जो पशु पहले प्रतिदिन 15 लीटर दूध देता था वह इस समय 7 से 8 लीटर दूध ही दे पा रहा है। ऊपर से इस मौसम में हरे चारे की कमी भी दूध देने की क्षमता घटने का कारण है।
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गर्मी में पशुओं में तनाव बढ़ जाता है। इस मौसम में पशुपालक हरा चारा डालें, पशुओं को गुड़ व पानी का घोल पिलाएं, सुबह-शाम नहलाएं व पर्याप्त पानी दें। कैल्शियम व मिनरल मिक्चर भी दिया जा सकता है। पशु बांधने की जगह पर हवा की व्यवस्था करें व सीधे गर्म हवा के प्रभाव से बचाएं। पशु में गर्मी के लक्षण या हीट स्ट्रोक से ग्रस्त होता है तो चिकित्सकों से सलाह लेकर ही उपचार दें।
--- डॉ. पवन कांगड़ा, राजकीय पशु चिकित्सालय कनीना।

फोटो संख्या:57- कनीना में पशुओं का उपचार करते पशु चिकित्सक डॉ. पवन कांगड़ा --स्रोत-संवाद

फोटो संख्या:57- कनीना में पशुओं का उपचार करते पशु चिकित्सक डॉ. पवन कांगड़ा --स्रोत-संवाद

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