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Mahendragarh-Narnaul News: गुलाबी सुंडी के नियंत्रण के लिए कृषि विभाग अलर्ट
Wed, 03 Apr 2024 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 03 Apr 2024 12:45 AM IST
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नारनौल। कपास में बीटी कपास आने से पहले तीन सूंडियों का जबरदस्त प्रकोप था। इन तीन सूंडियों में अमेरिकन सुंडी, गुलाबी सुंडी व चितकबरी सुंडी प्रमुख थी। पिछले कुछ वर्षों से मध्य व दक्षिणी भारत में बीटी कपास में गुलाबी सुंडी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण इसका प्रकोप देखा गया।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग नारनौल के उप निदेशक डा. देवेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि अधिकारी नियमित तौर पर फील्ड में उतरकर कपास फसल की निगरानी करेंगे और जिन क्षेत्रों में कपास का उत्पादन अधिक होता है उन गांव में गुलाबी सुंडी की पहचान और रोकथाम के लिए किसानों को जागरूक करेंगे।
वर्ष 2018-19 के दौरान उत्तरी भारत में गुलाबी सुंडी का प्रकोप पहली बार जींद जिले की कपास मिलों के आसपास देखा गया। इसका प्रकोप केवल कपास जिनिंग मिल व बिनौले से तेल निकालने वाली मिल के आसपास देखा गया। जिन किसानों ने पिछले साल के कपास की लकड़ियों का ढेर अपने खेत में लगा रखे हैं वहां पर ज्यादा देखने को मिला हैं।
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गुलाब सुंडी की पहचान व उसके आर्थिक कगार को जाने के लिए खेत में लगाए गए फेरोमोन ट्रैप में 8 प्रोढ़ पतंगे प्रति फेरोमोन ट्रैप में लगातार तीन दिन तक मिले या खेत में कपास के पौधों पर लगे हुए 100 फूलों में से 10 फूल गुलाब की तरह बंद दिखाई देते हैं तथा इन फूलों को खोलने पर इनमें गुलाबी सुंडी या इसके द्वारा बनाया हुआ जाल दिखाई पड़ता है या 20 हरे ठंडे (10-15 दिन पुरानी बड़े आकार के) को खोलने पर 2 टिंडो में गुलाबी या सफेद लारवा दिखाई दे, तो गुलाबी सुंडी को नियंत्रण करने की आवश्यकता है।
गुलाबी सुंडी के रोक के लिए ये हैं उपाय
गुलाबी सुंडी बीटी नरमे के दो बीजों को जोड़कर या भंडारित लकड़ियों में निवास करती है। इसलिए लकड़ी या बिनौलों का भंडारण सावधानीपूर्वक करना चाहिए। बीटी नरमे की लकड़ियों से निकलने वाले गुलाबी सुंडी के पतंगों को रोकने के लिए अप्रैल महीने से भंडारित लकड़ियों को पॉलीथिन शीट या मच्छरदानी से ढकें। पिछले साल जिन खेतों में या गांव में गुलाबी सुंडी की समस्या थी, उन खेतों की लकड़ियों से टिंडे व पत्तों को झाड़कर नष्ट कर दें।
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कृषि एवं किसान कल्याण विभाग नारनौल के उप निदेशक डा. देवेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि अधिकारी नियमित तौर पर फील्ड में उतरकर कपास फसल की निगरानी करेंगे और जिन क्षेत्रों में कपास का उत्पादन अधिक होता है उन गांव में गुलाबी सुंडी की पहचान और रोकथाम के लिए किसानों को जागरूक करेंगे।
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वर्ष 2018-19 के दौरान उत्तरी भारत में गुलाबी सुंडी का प्रकोप पहली बार जींद जिले की कपास मिलों के आसपास देखा गया। इसका प्रकोप केवल कपास जिनिंग मिल व बिनौले से तेल निकालने वाली मिल के आसपास देखा गया। जिन किसानों ने पिछले साल के कपास की लकड़ियों का ढेर अपने खेत में लगा रखे हैं वहां पर ज्यादा देखने को मिला हैं।
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गुलाब सुंडी की पहचान व उसके आर्थिक कगार को जाने के लिए खेत में लगाए गए फेरोमोन ट्रैप में 8 प्रोढ़ पतंगे प्रति फेरोमोन ट्रैप में लगातार तीन दिन तक मिले या खेत में कपास के पौधों पर लगे हुए 100 फूलों में से 10 फूल गुलाब की तरह बंद दिखाई देते हैं तथा इन फूलों को खोलने पर इनमें गुलाबी सुंडी या इसके द्वारा बनाया हुआ जाल दिखाई पड़ता है या 20 हरे ठंडे (10-15 दिन पुरानी बड़े आकार के) को खोलने पर 2 टिंडो में गुलाबी या सफेद लारवा दिखाई दे, तो गुलाबी सुंडी को नियंत्रण करने की आवश्यकता है।
गुलाबी सुंडी के रोक के लिए ये हैं उपाय
गुलाबी सुंडी बीटी नरमे के दो बीजों को जोड़कर या भंडारित लकड़ियों में निवास करती है। इसलिए लकड़ी या बिनौलों का भंडारण सावधानीपूर्वक करना चाहिए। बीटी नरमे की लकड़ियों से निकलने वाले गुलाबी सुंडी के पतंगों को रोकने के लिए अप्रैल महीने से भंडारित लकड़ियों को पॉलीथिन शीट या मच्छरदानी से ढकें। पिछले साल जिन खेतों में या गांव में गुलाबी सुंडी की समस्या थी, उन खेतों की लकड़ियों से टिंडे व पत्तों को झाड़कर नष्ट कर दें।