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Mahendragarh-Narnaul News: सोलह शृंगार कर महिलाओं ने छलनी से अपने चांद को देखा
Fri, 10 Oct 2025 11:30 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 10 Oct 2025 11:30 PM IST
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फोटो नंबर-20नारनौल में सामूहिक रूप से करवा चौथ की कहानी सुनती परिवार की महिलाएं। संवाद
नारनौल। करवा चौथ पर्व शुक्रवार को महिलाओं ने मनाया। सोलह शृंगार कर महिलाओं ने छलनी से अपने चांद का दीदार किया। पति की दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना की।
विवाहिताओं ने सुबह शुभ मुहूर्त में स्नान कर सोलह शृंगार किया और परिवार की अन्य महिलाओं के साथ पूजा की। इस दौरान उन्होंने करवा चौथ की कथा सुनी और पारंपरिक विधि-विधान से माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और चंद्रमा का पूजन किया। इसके बाद छोटी महिलाओं ने बड़ी महिलाओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
शाम ढलते ही बाजारों और गलियों में सजी-धजी महिलाओं का उत्साह देखने लायक था। रात को जैसे ही साढ़े आठ बजे चांद का दर्शन हुआ। महिलाओं ने छलनी से चांद को देखा, अर्घ अर्पित किया और फिर पति के दर्शन कर उनके हाथों से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ा। इसके बाद महिलाओं ने पति के चरण स्पर्श कर दीर्घायु और सौभाग्य की कामना की।
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करवा चौथ का यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पूरे दिन उपवास के बावजूद महिलाओं के चेहरों पर उत्साह और भक्ति का भाव झलकता रहा। शहरभर में करवा चौथ का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया।
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विवाहिताओं ने सुबह शुभ मुहूर्त में स्नान कर सोलह शृंगार किया और परिवार की अन्य महिलाओं के साथ पूजा की। इस दौरान उन्होंने करवा चौथ की कथा सुनी और पारंपरिक विधि-विधान से माता पार्वती, भगवान शिव, गणेश जी और चंद्रमा का पूजन किया। इसके बाद छोटी महिलाओं ने बड़ी महिलाओं के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
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शाम ढलते ही बाजारों और गलियों में सजी-धजी महिलाओं का उत्साह देखने लायक था। रात को जैसे ही साढ़े आठ बजे चांद का दर्शन हुआ। महिलाओं ने छलनी से चांद को देखा, अर्घ अर्पित किया और फिर पति के दर्शन कर उनके हाथों से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ा। इसके बाद महिलाओं ने पति के चरण स्पर्श कर दीर्घायु और सौभाग्य की कामना की।
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करवा चौथ का यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पूरे दिन उपवास के बावजूद महिलाओं के चेहरों पर उत्साह और भक्ति का भाव झलकता रहा। शहरभर में करवा चौथ का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया।