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Mahendragarh-Narnaul News: दिव्यांग कर्मचारियों के हित में पुनर्विचार की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा पत्र
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नारनौल। हरियाणा सिविल सर्विसेज (जनरल) रूल्स, 2016 के नियम-143 में किए गए हालिया संशोधन को लेकर राज्य में चर्चा तेज हो गई है। इस संशोधन के तहत दिव्यांग और नेत्रहीन कर्मचारियों को 60 वर्ष तक सेवा में बनाए रखने से जुड़े विशेष प्रावधानों को समाप्त कर दिया गया है। इसके लिए प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री सैनी को पत्र लिखा है।
प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा ने दिव्यांगजनों की व्यावहारिक कठिनाइयों और सामाजिक संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार से सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार की मांग की है। डॉ. शर्मा ने कहा कि दिव्यांग कर्मचारी सामान्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हैं।
उन्हें पूर्व में प्रदान की गई अतिरिक्त सेवा अवधि किसी प्रकार की विशेष सुविधा नहीं, बल्कि समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने का एक आवश्यक माध्यम थी। इन प्रावधानों के हटने से कई दिव्यांग कर्मचारियों एवं उनके परिवारों पर आर्थिक एवं मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
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अध्यक्ष शर्मा ने बताया कि पत्र में आग्रह किया गया है कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए या तो पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए व उनके लिए कोई वैकल्पिक सहायक नीति बनाई जाए। जिससे वे सेवा-काल के अंतिम वर्षों में असुरक्षा की भावना से मुक्त रह सकें।
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प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. संजय शर्मा ने दिव्यांगजनों की व्यावहारिक कठिनाइयों और सामाजिक संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार से सहानुभूतिपूर्वक पुनर्विचार की मांग की है। डॉ. शर्मा ने कहा कि दिव्यांग कर्मचारी सामान्य कर्मचारियों की तुलना में अधिक शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हैं।
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उन्हें पूर्व में प्रदान की गई अतिरिक्त सेवा अवधि किसी प्रकार की विशेष सुविधा नहीं, बल्कि समान अवसर और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने का एक आवश्यक माध्यम थी। इन प्रावधानों के हटने से कई दिव्यांग कर्मचारियों एवं उनके परिवारों पर आर्थिक एवं मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका है।
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अध्यक्ष शर्मा ने बताया कि पत्र में आग्रह किया गया है कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए या तो पूर्व व्यवस्था बहाल की जाए व उनके लिए कोई वैकल्पिक सहायक नीति बनाई जाए। जिससे वे सेवा-काल के अंतिम वर्षों में असुरक्षा की भावना से मुक्त रह सकें।