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एक-दूसरे के सहयोग से चलता है परिवार: आचार्य पूर्णदेव
Wed, 07 May 2025 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Wed, 07 May 2025 12:21 AM IST
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फोटो संख्या:-51 गांव धनौंदा में कथा का रसपान करवाते हुए कथा वाचक आचार्य पूर्ण देव महाराज---संवा
कनीना। गांव धनौंदा की दक्ष प्रजापति धर्मशाला में चल रही श्रीमद् शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन सती चरित्र कथा सुनाई गई। कथा वाचक आचार्य पूर्णदेव महाराज ने कहा कि परिवार एक-दूसरे के सहयोग से चलता है।
सभी अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने माता सती की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि उनके पिता दक्ष ने एक यज्ञ किया था जिसमें सभी सगे संबंधियों को बुलाया, लेकिन बेटी सती के पति भगवान शंकर को निमंत्रण नहीं भेजा। जब सती को यह पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी।
भगवान शिव ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि बिना बुलाए कहीं जाने से सम्मान में कमी आती है, लेकिन माता सती नहीं मानी और यज्ञ में पहुंच गई। वहां पहुंचने पर सती ने अपने पिता सहित सभी को शंकर भगवान के न बुलाने पर बुरा भला कहा और स्वयं को यज्ञ अग्नि में स्वाहा कर दिया। जब भगवान शिव को ये पता चला तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर राजा दक्ष की समस्त नगरी तहस-नहस कर दिया।
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उन्होंने बताया कि परिवार में सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए। सबसे बड़े व्यक्ति का या फर्ज बनता है कि वह सबसे छोटे व्यक्ति तक सबका ख्याल रखे। जब भी कोई कार्य करें तो परिवार की सहमति लेकर कार्य करें जिससे सफलता मिलेगी। यह सात दिवसीय श्रीमद शिव महापुराण कथा 12 मई तक चलेगी। दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक कथा का रसपान कराया जाएगा। इस दौरान भानुप्रताप, पंकज, अशोक कुमार, तुलसी, नेत्रपाल, मंजू, राजबाला, नीरज, मंजीत, दीपा, प्रियंका, भारती, नेहा, रजनी, अंजना शर्मा, बलवंती देवी आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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सभी अपने बच्चों को संस्कारवान बनाएं, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने माता सती की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि उनके पिता दक्ष ने एक यज्ञ किया था जिसमें सभी सगे संबंधियों को बुलाया, लेकिन बेटी सती के पति भगवान शंकर को निमंत्रण नहीं भेजा। जब सती को यह पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ और उन्होंने भगवान शिव से उस यज्ञ में जाने की अनुमति मांगी।
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भगवान शिव ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया कि बिना बुलाए कहीं जाने से सम्मान में कमी आती है, लेकिन माता सती नहीं मानी और यज्ञ में पहुंच गई। वहां पहुंचने पर सती ने अपने पिता सहित सभी को शंकर भगवान के न बुलाने पर बुरा भला कहा और स्वयं को यज्ञ अग्नि में स्वाहा कर दिया। जब भगवान शिव को ये पता चला तो उन्होंने अपना तीसरा नेत्र खोलकर राजा दक्ष की समस्त नगरी तहस-नहस कर दिया।
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उन्होंने बताया कि परिवार में सभी को मिलजुल कर रहना चाहिए। सबसे बड़े व्यक्ति का या फर्ज बनता है कि वह सबसे छोटे व्यक्ति तक सबका ख्याल रखे। जब भी कोई कार्य करें तो परिवार की सहमति लेकर कार्य करें जिससे सफलता मिलेगी। यह सात दिवसीय श्रीमद शिव महापुराण कथा 12 मई तक चलेगी। दोपहर एक बजे से शाम चार बजे तक कथा का रसपान कराया जाएगा। इस दौरान भानुप्रताप, पंकज, अशोक कुमार, तुलसी, नेत्रपाल, मंजू, राजबाला, नीरज, मंजीत, दीपा, प्रियंका, भारती, नेहा, रजनी, अंजना शर्मा, बलवंती देवी आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे।

फोटो संख्या:-51 गांव धनौंदा में कथा का रसपान करवाते हुए कथा वाचक आचार्य पूर्ण देव महाराज---संवा