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व्यापारियों की जिद्द के आगे झुका प्रशासन, पुरानी अनाज मंडी में शुरू करवाई खरीद
Updated Sun, 07 Oct 2018 12:54 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। व्यापारियों की जिद्द के आगे प्रशासन की व्यवस्था उस समय किसानों पर भारी पड़ गई, जब शनिवार को नई अनाज मंडी की बजाय पुरानी अनाज मंडी में बाजरे की खरीद शुरू हुई। क्योंकि नई अनाज मंडी की तुलना में उक्त मंडी काफी छोटी है। जिस कारण सुबह आठ बजे ही मंडी के दोनों मुख्य द्वारों से अंदर तक अनाज से भरे वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई है। इससे मंडी के अंदर व बाहर सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई।
जाम में एक एंबुलेंस भी फंस गई। यह देख कुछ व्यापारियों ने व्यवस्था बनाने का भी प्रयास किया, लेकिन एक साथ सैकड़ों किसान बाजरा लेकर मंडी में पहुंच जाने से व्यवस्था गड़बड़ा गई। इससे व्यापारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए और व्यापारी इधर-उधर निकल गए। जब किसानों को दोपहर एक बजे तक भी अपनी फसल की खरीद होने की कोई व्यवस्था दिखा नहीं दी तो किसानों ने मंडी स्थित मार्केट कमेटी चेयरमैन कार्यालय में पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया, लेकिन किसानों को वहां भी कोई अधिकारी नहीं मिला। इस पर किसान अधिकारियों के साथ-साथ व्यापारियों को भी कोसते दिखाई दिए।
बता दें कि प्रशासन ने बाजरे की खरीद के लिए नांगल चौधरी रोड स्थित नई अनाज मंडी को चयनित कर एक अक्तूबर से सरकारी समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद शुरू करवा दी थी। जोकि गत शुक्रवार तक जारी रही। इसी बीच व्यापारियों ने व्यापार ठप होने की दुहाई देते हुए पुरानी अनाज मंडी में ही बाजरे की खरीद शुरू करवाने की मांग पर अड़ गए और उन्होंने उपायुक्त डा. गरिमा मित्तल को अपने प्रतिष्ठानों पर ताले लगाकर चाबी सौंपकर रोष जताया था। इस पर उपायुक्त ने व्यापारियों को विचार-विमर्श कर खरीद शुरू करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रशासन भी वर्तमान मंडी की व्यवस्थाओं को देखते हुए इस मंडी में खरीद करवाने के पक्ष में नहीं था। इस पर व्यापारियों ने स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव से उक्त मंडी में खरीद शुरू करवाने की गुहार लगाई। विधायक के आदेशानुसार प्रशासन द्वारा शुक्रवार शाम से वर्तमान अनाज मंडी में खरीद कार्य की शुरूआत करवाई। शनिवार से यहां खरीद कार्य सुचारु किया गया, लेकिन पहले दिन ही अव्यवस्थाएं हावी रही। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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बोले, चेयरमैन
पहले दिन किसानों को असुविधा का सामना करना पड़ा है। आगे किसानों को असुविधा नहीं होने दी जाएगी। इस बारे में प्रशासन से भी विचार-विमर्श किया जाएगा। उनके आदेशानुसार खरीद करवाई जाएगी।
- जेपी सैनी, चेयरमैन मार्केट कमेटी नारनौल।
बोले, किसान
व्यापारियों की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा लिए फैसले ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है, क्योंकि वर्तमान मंडी में किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है।
- किसान श्रद्धानंद, खटोटी कलां।
वर्तमान मंडी में बाजरे की खरीद किसी भी सूरत में नहीं हो सकती है, क्योंकि यहां न बैठने व्यवस्था है और न ही वाहन खड़ा करने की। ऐसे में यहां खरीद करवाना केवल किसानों को परेशानी में डालना है।
- किसान धर्मपाल, जैलाफ।
प्रशासन वर्तमान मंडी में खरीद करवाना चाहता है तो शेड्यूल निर्धारित कर किसानों को बुलाना चाहिए। ताकि अव्यवस्था न बने और किसानों को भी परेशान न होना पड़े।
- किसान अमित कुमार, सेका।
वर्तमान मंडी में टीन शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर बारिश होती है तो खुले में पड़ा किसानों का अनाज खराब हो जाएगा। इसका जिम्मेवार कौन होगा।
- किसान रतन लाल, सेका।
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नारनौल। व्यापारियों की जिद्द के आगे प्रशासन की व्यवस्था उस समय किसानों पर भारी पड़ गई, जब शनिवार को नई अनाज मंडी की बजाय पुरानी अनाज मंडी में बाजरे की खरीद शुरू हुई। क्योंकि नई अनाज मंडी की तुलना में उक्त मंडी काफी छोटी है। जिस कारण सुबह आठ बजे ही मंडी के दोनों मुख्य द्वारों से अंदर तक अनाज से भरे वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गई है। इससे मंडी के अंदर व बाहर सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई।
जाम में एक एंबुलेंस भी फंस गई। यह देख कुछ व्यापारियों ने व्यवस्था बनाने का भी प्रयास किया, लेकिन एक साथ सैकड़ों किसान बाजरा लेकर मंडी में पहुंच जाने से व्यवस्था गड़बड़ा गई। इससे व्यापारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए और व्यापारी इधर-उधर निकल गए। जब किसानों को दोपहर एक बजे तक भी अपनी फसल की खरीद होने की कोई व्यवस्था दिखा नहीं दी तो किसानों ने मंडी स्थित मार्केट कमेटी चेयरमैन कार्यालय में पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया, लेकिन किसानों को वहां भी कोई अधिकारी नहीं मिला। इस पर किसान अधिकारियों के साथ-साथ व्यापारियों को भी कोसते दिखाई दिए।
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बता दें कि प्रशासन ने बाजरे की खरीद के लिए नांगल चौधरी रोड स्थित नई अनाज मंडी को चयनित कर एक अक्तूबर से सरकारी समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद शुरू करवा दी थी। जोकि गत शुक्रवार तक जारी रही। इसी बीच व्यापारियों ने व्यापार ठप होने की दुहाई देते हुए पुरानी अनाज मंडी में ही बाजरे की खरीद शुरू करवाने की मांग पर अड़ गए और उन्होंने उपायुक्त डा. गरिमा मित्तल को अपने प्रतिष्ठानों पर ताले लगाकर चाबी सौंपकर रोष जताया था। इस पर उपायुक्त ने व्यापारियों को विचार-विमर्श कर खरीद शुरू करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन प्रशासन भी वर्तमान मंडी की व्यवस्थाओं को देखते हुए इस मंडी में खरीद करवाने के पक्ष में नहीं था। इस पर व्यापारियों ने स्थानीय विधायक ओमप्रकाश यादव से उक्त मंडी में खरीद शुरू करवाने की गुहार लगाई। विधायक के आदेशानुसार प्रशासन द्वारा शुक्रवार शाम से वर्तमान अनाज मंडी में खरीद कार्य की शुरूआत करवाई। शनिवार से यहां खरीद कार्य सुचारु किया गया, लेकिन पहले दिन ही अव्यवस्थाएं हावी रही। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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बोले, चेयरमैन
पहले दिन किसानों को असुविधा का सामना करना पड़ा है। आगे किसानों को असुविधा नहीं होने दी जाएगी। इस बारे में प्रशासन से भी विचार-विमर्श किया जाएगा। उनके आदेशानुसार खरीद करवाई जाएगी।
- जेपी सैनी, चेयरमैन मार्केट कमेटी नारनौल।
बोले, किसान
व्यापारियों की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा लिए फैसले ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है, क्योंकि वर्तमान मंडी में किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं है।
- किसान श्रद्धानंद, खटोटी कलां।
वर्तमान मंडी में बाजरे की खरीद किसी भी सूरत में नहीं हो सकती है, क्योंकि यहां न बैठने व्यवस्था है और न ही वाहन खड़ा करने की। ऐसे में यहां खरीद करवाना केवल किसानों को परेशानी में डालना है।
- किसान धर्मपाल, जैलाफ।
प्रशासन वर्तमान मंडी में खरीद करवाना चाहता है तो शेड्यूल निर्धारित कर किसानों को बुलाना चाहिए। ताकि अव्यवस्था न बने और किसानों को भी परेशान न होना पड़े।
- किसान अमित कुमार, सेका।
वर्तमान मंडी में टीन शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर बारिश होती है तो खुले में पड़ा किसानों का अनाज खराब हो जाएगा। इसका जिम्मेवार कौन होगा।
- किसान रतन लाल, सेका।