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बांसड़ी-पथरवा माइनर टूटने से खेतों में भरा पानी क
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़/सतनाली मंडी। खंड के गांव पथरवा में मंगलवार शाम जड़वा डिस्ट्रीब्यूटरी की बांसड़ी-पथरवा माइनर का किनारा टूटने से 25 एकड़ चने, गेहूं और सरसों की फसल जलमग्न हो गई। नहर में मंगलवार को पानी छोड़ा गया था, पानी छोड़े जाने के कुछ घंटे बाद ही पथरवा में इसका किनारा टूट गया, जिससे माइनर का सारा पानी आसपास के खेतों में फैल गया और अनेक खेतों में खड़ी सरसों, गेहूं, चने आदि की फसल जलमग्न हो गई।
किसानों ने बताया कि माइनर टूटने की जानकारी मिलते ही नहरी विभाग द्वारा पानी बंद कर दिया गया लेकिन तब तक खेत नहरी पानी से लबालब हो चुके थे। इस नहर का पिछले दिनों ही जीर्णोद्धार किया गया था।
40 वर्ष पुरानी है माइनर
गांव पथरवा के सरपंच सतेंद्र कुमार ने बताया कि जड़वा डिस्ट्रीब्यूटरी की बासड़ी-पथरवा माइनर लगभग 40 वर्ष पुरानी है। पहले इसकी लंबाई लगभग सात किलोमीटर थी और टाइलों से बनी हुई थी। कुछ दिन पहले ही 1.15 करोड़ रुपये विभाग ने नहर के नवीनीकरण पर खर्च किए थे। इन पैसों से नहर की रिपेयरिंग की गई तथा पौने दो किलोमीटर की इसकी लंबाई भी बढ़ाई गई थी। अभी नहर के साइडों में मिट्टी डालने का काम चल भी रहा है। रिपेयरिंग करने के बाद पहली बार माइनर में पानी डाला गया था। पानी डालने के बाद लगभग चार पांच घंटे में ही माइनर गांव पथरवा के पास 10 फुट चौड़ी टूट गई।
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किसानों की मुआवजे की मांग
किसान जयपाल, मनोज, रवि गोदारा, सुरेश, पूर्ण सिंह, ओमप्रकाश, विद्याधर आदि किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में गेहूं, सरसों, चने, जो आदि फसल बोई हुई थी। खेतों में पानी भर जाने के कारण फसल खराब हो गई। उन्होंने बताया कि सरसों की फसल का तो लावनी का समय आ गया था, लेकिन पानी भर जाने के कारण पकी पकाई फसल खराब हो गई। उन्होंने कहा कि वे खेती करके ही आजीविका चलाते हैं। उन्होंने सरकार से मुआवजा दिए जाने की मांग की।
वर्जन
जड़वा डिस्ट्रीब्यूटरी की बासड़ी-पथरवा माइनर को लगभग पौने 2 किलोमीटर लंबाई बढ़ाकर 8.8 किलोमीटर किया गया है। माइनर में मंगलवार को पानी छोड़ा गया था, संभवतया ओवरफ्लो व मिट्टी कटाव के कारण किनारा टूट गया जिसकी सूचना मिलते ही नहर में पानी बंद कर दिया गया था और मौके पर कर्मचारियों को भेजकर टूटे किनारे को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है।
- सुरेंद्र जांगड़ा, एसडीओ, नहर विभाग।
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महेंद्रगढ़/सतनाली मंडी। खंड के गांव पथरवा में मंगलवार शाम जड़वा डिस्ट्रीब्यूटरी की बांसड़ी-पथरवा माइनर का किनारा टूटने से 25 एकड़ चने, गेहूं और सरसों की फसल जलमग्न हो गई। नहर में मंगलवार को पानी छोड़ा गया था, पानी छोड़े जाने के कुछ घंटे बाद ही पथरवा में इसका किनारा टूट गया, जिससे माइनर का सारा पानी आसपास के खेतों में फैल गया और अनेक खेतों में खड़ी सरसों, गेहूं, चने आदि की फसल जलमग्न हो गई।
किसानों ने बताया कि माइनर टूटने की जानकारी मिलते ही नहरी विभाग द्वारा पानी बंद कर दिया गया लेकिन तब तक खेत नहरी पानी से लबालब हो चुके थे। इस नहर का पिछले दिनों ही जीर्णोद्धार किया गया था।
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40 वर्ष पुरानी है माइनर
गांव पथरवा के सरपंच सतेंद्र कुमार ने बताया कि जड़वा डिस्ट्रीब्यूटरी की बासड़ी-पथरवा माइनर लगभग 40 वर्ष पुरानी है। पहले इसकी लंबाई लगभग सात किलोमीटर थी और टाइलों से बनी हुई थी। कुछ दिन पहले ही 1.15 करोड़ रुपये विभाग ने नहर के नवीनीकरण पर खर्च किए थे। इन पैसों से नहर की रिपेयरिंग की गई तथा पौने दो किलोमीटर की इसकी लंबाई भी बढ़ाई गई थी। अभी नहर के साइडों में मिट्टी डालने का काम चल भी रहा है। रिपेयरिंग करने के बाद पहली बार माइनर में पानी डाला गया था। पानी डालने के बाद लगभग चार पांच घंटे में ही माइनर गांव पथरवा के पास 10 फुट चौड़ी टूट गई।
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किसानों की मुआवजे की मांग
किसान जयपाल, मनोज, रवि गोदारा, सुरेश, पूर्ण सिंह, ओमप्रकाश, विद्याधर आदि किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में गेहूं, सरसों, चने, जो आदि फसल बोई हुई थी। खेतों में पानी भर जाने के कारण फसल खराब हो गई। उन्होंने बताया कि सरसों की फसल का तो लावनी का समय आ गया था, लेकिन पानी भर जाने के कारण पकी पकाई फसल खराब हो गई। उन्होंने कहा कि वे खेती करके ही आजीविका चलाते हैं। उन्होंने सरकार से मुआवजा दिए जाने की मांग की।
वर्जन
जड़वा डिस्ट्रीब्यूटरी की बासड़ी-पथरवा माइनर को लगभग पौने 2 किलोमीटर लंबाई बढ़ाकर 8.8 किलोमीटर किया गया है। माइनर में मंगलवार को पानी छोड़ा गया था, संभवतया ओवरफ्लो व मिट्टी कटाव के कारण किनारा टूट गया जिसकी सूचना मिलते ही नहर में पानी बंद कर दिया गया था और मौके पर कर्मचारियों को भेजकर टूटे किनारे को दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया है।
- सुरेंद्र जांगड़ा, एसडीओ, नहर विभाग।