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स्वच्छता पर हर महीने दस लाख खर्च होने के बाद भी अपना शहर गंदा
Updated Tue, 04 Dec 2018 12:39 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। नगर पालिका की ओर से 10 लाख रुपये प्रति माह स्वच्छता पर खर्च किए जाने के बाद भी शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार होने के आसार नहीं दिख रहे। अगले माह में स्वच्छता सर्वेक्षण होना है लेकिन वर्तमान में शहर की बहुत दयनीय स्थिति है। शहर के सभी शौचालय बंद पड़े हैं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। शहर में डस्टबिन की व्यवस्था भी नहीं है। पिछली बार शहर की सफाई व्यवस्था चौपट होने के कारण प्रदेश में स्वच्छता रैंक 60वां था। पालिका स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तनिक भी गंभीर नजर नहीं आ रही।
जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए सर्वे होना है, परंतु अभी तक पालिका ने सर्वेक्षण को ध्यान में रखकर सफाई की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। सफाई के मामले में शहर की स्थिति बहुत खराब है। पालिका में लगभग 25 स्थायी तथा 53 अस्थायी सफाई कर्मचारी लगे हुए हैं। शहर की सफाई पर कर्मचारियों के वेतन सहित 10 लाख रुपये खर्च करती है। उसके बाद भी शहर की सफाई में सुधार नहीं हैं। कूड़ा कलेक्शन गाड़ियां प्रतिदिन न जाने के कारण और सड़कों या मुख्य रास्तों पर कूड़े के ढेर लग जाते हैं। पालिका की ओर से गली, मोहल्ला, बाजरों में छोटे बड़े कूड़ेदान भी नहीं लगाए हुए। दुकानदार व लोग सड़कों पर कूड़ा डाल जाते हैं।
कागजों में कर दिया था ओडीएफ घोषित
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण की तारीख आने के बाद पालिका ने आनन फानन में लाखों रुपये से 13 प्री कास्ट टॉयलेट तो लगवा दिए। परंतु उनमें बिजली, पानी का कनेक्शन नहीं किया। बाद में पालिका ने अप्रैल में कागजों में शहर को ओडीएफ भी घोषित कर दिया। प्री कॉस्ट टायलेट की हालत ऐसी है कि बनने के बाद पालिका के कर्मचारियों ने वहां झाडू़ भी नहीं लगाई। वर्तमान में प्री कॉस्ट टायलेट गंदगी से अटे पड़े हैं। जिस कारण लोगों को मजबूरी में खुले में शौच करना पड़ रहा है।
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इन बाजारों में हैं आवश्यकता
बाजार ऐसे हैं जहां टायलेट की सुविधा नहीं हैं। दुकानदार को टायलेट के लिए गली कूचों में जाना पड़ता है। शहर के बास स्कूल से मसानी चौक लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर में कोई शौचालय नहीं है। शहर का दिल कहे जाने वाला आजाद चौक पर भी टॉयलेट की व्यवस्था नहीं हैं। इसके अलावा सर्राफा बाजार, मां शेरावाली मंदिर, शंकर मार्केट, सिनेमा रोड, शॉपिंग कांप्लैक्स, अग्रसेन चौक, ब्रह्मदेव चौक, तुलाराम चौक, बस स्टैंड के बाहर कहीं भी शौचालय नहीं हैं।
एक वर्ष बीतने के बाद भी सुलभ शौचालय नहीं हुआ शुरू
लगभग एक वर्ष पहले रतन कांप्लैक्स के सामने नगरपालिका ने लगभग तीन लाख रुपये के टेंडर कर सुलभ शौचालय का काम शुरू किया था। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी शौचालय का 10 फीसदी काम पूरा नहीं हुआ है। छह माह से अधिक समय से सुलभ शौचालय का काम रुका हुआ है।
पिछली बार राज्य में था 60वां रैंक
पिछले वर्ष जनवरी माह में स्वच्छ सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण में प्रदेश के 81 शहरों को शामिल किया गया था। इन शहरों में महेंद्रगढ़ का 60वां रैंक था। अगर उत्तर भारत की बात करें तो शहर को 396वां रैंक प्राप्त किया था।
वर्जन
प्री कॉस्ट टायलेट की कई दिनों से सफाई नहीं हो रही। टायलेट के अंदर शराब की बोतलें, मल आदि पड़ा हुआ है जिस कारण खेल में ही शौच जाना पड़ता है। पालिका कर्मचारियों को मौखिक रूप से कई बार सफाई के लिए कहा जा चुका है।
- हेमंत, जूस कार्नर।
--------------
टायलेट कई दिनों से बंद पड़े हैं। पालिका की ओर से शौचालयों की सफाई नहीं किए जाने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही हैं। लोगों को इधर-उधर जाकर शौच करना पड़ता है।
- बालकिशन, कपड़ा व्यापारी।
शौचालयों सफाई नहीं हो रही। सीवरेज भी जाम रहता है जिससे सीवरेज का पानी कई बार सड़कों पर आ जाता है। इसके अलावा कूड़ेदान की भी व्यवस्था नहीं की गई जहां कूड़ा डाला जा सके।
- नवरत्न, दुकानदार।
वर्जन
कुछ दिनों पहले ही नगरपालिका में ज्वाइनिंग की है। सर्वेक्षण के लिए पालिका की ओर से योजना बनाई जाएगी। जो शौचालय खराब पड़े हैं उनको ठीक करवाएं जाएंगे। सुलभ शौचालय को भी शुरू करवाया जाएगा।
- संदीप मलिक, सचिव, नगरपालिका महेंद्रगढ़।
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महेंद्रगढ़। नगर पालिका की ओर से 10 लाख रुपये प्रति माह स्वच्छता पर खर्च किए जाने के बाद भी शहर की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार होने के आसार नहीं दिख रहे। अगले माह में स्वच्छता सर्वेक्षण होना है लेकिन वर्तमान में शहर की बहुत दयनीय स्थिति है। शहर के सभी शौचालय बंद पड़े हैं और जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। शहर में डस्टबिन की व्यवस्था भी नहीं है। पिछली बार शहर की सफाई व्यवस्था चौपट होने के कारण प्रदेश में स्वच्छता रैंक 60वां था। पालिका स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तनिक भी गंभीर नजर नहीं आ रही।
जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए सर्वे होना है, परंतु अभी तक पालिका ने सर्वेक्षण को ध्यान में रखकर सफाई की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। सफाई के मामले में शहर की स्थिति बहुत खराब है। पालिका में लगभग 25 स्थायी तथा 53 अस्थायी सफाई कर्मचारी लगे हुए हैं। शहर की सफाई पर कर्मचारियों के वेतन सहित 10 लाख रुपये खर्च करती है। उसके बाद भी शहर की सफाई में सुधार नहीं हैं। कूड़ा कलेक्शन गाड़ियां प्रतिदिन न जाने के कारण और सड़कों या मुख्य रास्तों पर कूड़े के ढेर लग जाते हैं। पालिका की ओर से गली, मोहल्ला, बाजरों में छोटे बड़े कूड़ेदान भी नहीं लगाए हुए। दुकानदार व लोग सड़कों पर कूड़ा डाल जाते हैं।
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कागजों में कर दिया था ओडीएफ घोषित
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण की तारीख आने के बाद पालिका ने आनन फानन में लाखों रुपये से 13 प्री कास्ट टॉयलेट तो लगवा दिए। परंतु उनमें बिजली, पानी का कनेक्शन नहीं किया। बाद में पालिका ने अप्रैल में कागजों में शहर को ओडीएफ भी घोषित कर दिया। प्री कॉस्ट टायलेट की हालत ऐसी है कि बनने के बाद पालिका के कर्मचारियों ने वहां झाडू़ भी नहीं लगाई। वर्तमान में प्री कॉस्ट टायलेट गंदगी से अटे पड़े हैं। जिस कारण लोगों को मजबूरी में खुले में शौच करना पड़ रहा है।
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इन बाजारों में हैं आवश्यकता
बाजार ऐसे हैं जहां टायलेट की सुविधा नहीं हैं। दुकानदार को टायलेट के लिए गली कूचों में जाना पड़ता है। शहर के बास स्कूल से मसानी चौक लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर में कोई शौचालय नहीं है। शहर का दिल कहे जाने वाला आजाद चौक पर भी टॉयलेट की व्यवस्था नहीं हैं। इसके अलावा सर्राफा बाजार, मां शेरावाली मंदिर, शंकर मार्केट, सिनेमा रोड, शॉपिंग कांप्लैक्स, अग्रसेन चौक, ब्रह्मदेव चौक, तुलाराम चौक, बस स्टैंड के बाहर कहीं भी शौचालय नहीं हैं।
एक वर्ष बीतने के बाद भी सुलभ शौचालय नहीं हुआ शुरू
लगभग एक वर्ष पहले रतन कांप्लैक्स के सामने नगरपालिका ने लगभग तीन लाख रुपये के टेंडर कर सुलभ शौचालय का काम शुरू किया था। एक वर्ष बीत जाने के बाद भी शौचालय का 10 फीसदी काम पूरा नहीं हुआ है। छह माह से अधिक समय से सुलभ शौचालय का काम रुका हुआ है।
पिछली बार राज्य में था 60वां रैंक
पिछले वर्ष जनवरी माह में स्वच्छ सर्वेक्षण किया गया था। सर्वेक्षण में प्रदेश के 81 शहरों को शामिल किया गया था। इन शहरों में महेंद्रगढ़ का 60वां रैंक था। अगर उत्तर भारत की बात करें तो शहर को 396वां रैंक प्राप्त किया था।
वर्जन
प्री कॉस्ट टायलेट की कई दिनों से सफाई नहीं हो रही। टायलेट के अंदर शराब की बोतलें, मल आदि पड़ा हुआ है जिस कारण खेल में ही शौच जाना पड़ता है। पालिका कर्मचारियों को मौखिक रूप से कई बार सफाई के लिए कहा जा चुका है।
- हेमंत, जूस कार्नर।
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टायलेट कई दिनों से बंद पड़े हैं। पालिका की ओर से शौचालयों की सफाई नहीं किए जाने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही हैं। लोगों को इधर-उधर जाकर शौच करना पड़ता है।
- बालकिशन, कपड़ा व्यापारी।
शौचालयों सफाई नहीं हो रही। सीवरेज भी जाम रहता है जिससे सीवरेज का पानी कई बार सड़कों पर आ जाता है। इसके अलावा कूड़ेदान की भी व्यवस्था नहीं की गई जहां कूड़ा डाला जा सके।
- नवरत्न, दुकानदार।
वर्जन
कुछ दिनों पहले ही नगरपालिका में ज्वाइनिंग की है। सर्वेक्षण के लिए पालिका की ओर से योजना बनाई जाएगी। जो शौचालय खराब पड़े हैं उनको ठीक करवाएं जाएंगे। सुलभ शौचालय को भी शुरू करवाया जाएगा।
- संदीप मलिक, सचिव, नगरपालिका महेंद्रगढ़।