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कुरुक्षेत्र के नीलकंठ की तर्ज पर विकसित होगा ढोसी पहाड़ : रामबिलास
Updated Tue, 12 Jun 2018 11:49 PM IST
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कुरुक्षेत्र के नीलकंठ की तर्ज पर विकसित होगा ढोसी पहाड़ : रामबिलास
ेअमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि राजस्थान की सीमा से सटे ढोसी की पहाड़ को कुरुक्षेत्र के नीलकंठ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां पर यात्री निवास बनाए जाएंगे। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम की तरफ से एक सड़क मार्ग का निर्माण करवाने की कार्ययोजना भी है। शर्मा इन्हीं संभावनाओं को तलाशने के लिए सोमवार शाम ढोसी की पहाड़ी पर पर्यटन विभाग के अफसरों को साथ पहुंचे और जल्द से जल्द इस कार्ययोजना को सिरे चढ़ाने के निर्देश दिए।
पर्यटन मंत्री ने लोगों से बातचीत करते हुए कहा कि ढोसी पहाड़ पर यात्री निवास के लिए पहले चरण में 50 वातानुकूलित कमरे बनाने की योजना है। इतना ही नहीं यहां पर एक रेस्टोरेंट के अलावा अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं विकसित होंगी। ये सभी सुविधाएं होने के बाद ढोसी हिल्स की आनलाइन बुकिंग होगी। उन्होंने बताया कि ढोसी की पहाड़ी पर सीढ़ियों से चढ़ना काफी मुश्किल काम है इसलिए ज्यादा पर्यटकों को लुभाने के लिए सबसे पहले पहाड़ की उत्तर-पश्चिम दिशा से एक सड़क मार्ग बनाया जाएगा। इस तरफ से पहले से ही चरवाहों के आवागमन के लिए कच्चा मार्ग है। इस मार्ग को पक्का बनाकर इसे आकर्षक बनाया जाएगा। इसके साथ ही जिले के सभी पर्यटन क्षेत्रों पर आने वाले सड़क मार्गों को भी अच्छे से विकसित किया जाएगा।
शर्मा ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, ताकि यहां के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर मुहैया हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत महेंद्रगढ़-रेवाड़ी हेरिटेज सर्किट को विकसित किया जाएगा। इन जगहों पर अतिथि-गृहों, सड़कें, पानी, बिजली व पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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पर्यटन मंत्री ने इससे पहले जल-महल, बावड़ी व बीरबल का छत्ता का भी दौरा किया। इस मौके पर उनके साथ पर्यटन विभाग के एसीएस विजय वर्धन, एमडी विकास यादव, उपायुक्त डा. गरिमा मित्तल, एसडीएम नारनौल जगदीश शर्मा, बीजेपी के जिला प्रधान शिव कुमार मेहता आदि मौजूद रहे।
जड़ी-बूटियों का खजाना है ढोसी
नारनौल से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित ढोसी के पहाड़ का इतिहास काफी पुराना एवं प्रसिद्ध है। इसकी प्रसिद्धि का एक कारण यह भी है कि यहां वैदिक काल के ऋषि च्यवन का आश्रम भी है। यह पहाड़ कई चमत्कार करने वाली जड़ी- बूटियों तथा औषधियों का खजाना है। आयुर्वेद की सबसे महान खोज च्यवनप्राश को माना जाता है जिसकी शुरूआत इसी पहाड़ी पर हुई थी। ऐसी आयुर्वेदिक दवा इसी पहाड़ी की देन है। इस पहाड़ी की एक तरफ हरियाणा के गांव कुलताजपुर, थाना व मकसूसपुर की जमीन लगती है जबकि दूसरी तरफ राजस्थान के गांव ढोसी की जमीन लगती है। कुलताजपुर की तरफ से चढ़ने के लिए कुछ दूर चढ़ाई के बाद शिव कुंड से आगे सीढ़ियों का रास्ता है, जबकि थाना गांव की तरफ से ज्यादा खड़ी सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। मकसूसपुर गांव तरफ से गायों के लिए कच्चा रास्ता जाता है। इसके अलावा राजस्थान के गांव ढोसी की तरफ से भी चढ़ने का रास्ता है लेकिन इसके बीच में बड़ी-बड़ी खाई हैं तथा यह रास्ता बहुत ही खतरनाक है।
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ेअमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि राजस्थान की सीमा से सटे ढोसी की पहाड़ को कुरुक्षेत्र के नीलकंठ की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां पर यात्री निवास बनाए जाएंगे। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम की तरफ से एक सड़क मार्ग का निर्माण करवाने की कार्ययोजना भी है। शर्मा इन्हीं संभावनाओं को तलाशने के लिए सोमवार शाम ढोसी की पहाड़ी पर पर्यटन विभाग के अफसरों को साथ पहुंचे और जल्द से जल्द इस कार्ययोजना को सिरे चढ़ाने के निर्देश दिए।
पर्यटन मंत्री ने लोगों से बातचीत करते हुए कहा कि ढोसी पहाड़ पर यात्री निवास के लिए पहले चरण में 50 वातानुकूलित कमरे बनाने की योजना है। इतना ही नहीं यहां पर एक रेस्टोरेंट के अलावा अन्य सभी प्रकार की सुविधाएं विकसित होंगी। ये सभी सुविधाएं होने के बाद ढोसी हिल्स की आनलाइन बुकिंग होगी। उन्होंने बताया कि ढोसी की पहाड़ी पर सीढ़ियों से चढ़ना काफी मुश्किल काम है इसलिए ज्यादा पर्यटकों को लुभाने के लिए सबसे पहले पहाड़ की उत्तर-पश्चिम दिशा से एक सड़क मार्ग बनाया जाएगा। इस तरफ से पहले से ही चरवाहों के आवागमन के लिए कच्चा मार्ग है। इस मार्ग को पक्का बनाकर इसे आकर्षक बनाया जाएगा। इसके साथ ही जिले के सभी पर्यटन क्षेत्रों पर आने वाले सड़क मार्गों को भी अच्छे से विकसित किया जाएगा।
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शर्मा ने कहा कि दक्षिणी हरियाणा को पर्यटन के क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, ताकि यहां के लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर मुहैया हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत महेंद्रगढ़-रेवाड़ी हेरिटेज सर्किट को विकसित किया जाएगा। इन जगहों पर अतिथि-गृहों, सड़कें, पानी, बिजली व पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
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पर्यटन मंत्री ने इससे पहले जल-महल, बावड़ी व बीरबल का छत्ता का भी दौरा किया। इस मौके पर उनके साथ पर्यटन विभाग के एसीएस विजय वर्धन, एमडी विकास यादव, उपायुक्त डा. गरिमा मित्तल, एसडीएम नारनौल जगदीश शर्मा, बीजेपी के जिला प्रधान शिव कुमार मेहता आदि मौजूद रहे।
जड़ी-बूटियों का खजाना है ढोसी
नारनौल से लगभग आठ किलोमीटर की दूरी पर स्थित ढोसी के पहाड़ का इतिहास काफी पुराना एवं प्रसिद्ध है। इसकी प्रसिद्धि का एक कारण यह भी है कि यहां वैदिक काल के ऋषि च्यवन का आश्रम भी है। यह पहाड़ कई चमत्कार करने वाली जड़ी- बूटियों तथा औषधियों का खजाना है। आयुर्वेद की सबसे महान खोज च्यवनप्राश को माना जाता है जिसकी शुरूआत इसी पहाड़ी पर हुई थी। ऐसी आयुर्वेदिक दवा इसी पहाड़ी की देन है। इस पहाड़ी की एक तरफ हरियाणा के गांव कुलताजपुर, थाना व मकसूसपुर की जमीन लगती है जबकि दूसरी तरफ राजस्थान के गांव ढोसी की जमीन लगती है। कुलताजपुर की तरफ से चढ़ने के लिए कुछ दूर चढ़ाई के बाद शिव कुंड से आगे सीढ़ियों का रास्ता है, जबकि थाना गांव की तरफ से ज्यादा खड़ी सीढ़ियों की चढ़ाई करनी पड़ती है। मकसूसपुर गांव तरफ से गायों के लिए कच्चा रास्ता जाता है। इसके अलावा राजस्थान के गांव ढोसी की तरफ से भी चढ़ने का रास्ता है लेकिन इसके बीच में बड़ी-बड़ी खाई हैं तथा यह रास्ता बहुत ही खतरनाक है।