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आजाद हिंद फौज के सिपाही श्योराम का निधन

Tue, 03 Apr 2018 01:25 AM IST
Updated Tue, 03 Apr 2018 01:25 AM IST
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आजाद हिंद फौज के सिपाही श्योराम का निधन
अमर उजाला ब्यूरो
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नांगल चौधरी। आजाद हिंद फौज के सिपाही श्योराम रविवार की रात पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका दाह संस्कार सोमवार को उनके पैतृक गांव धोलेड़ा में किया गया। इस दौरान हरियाणा पुलिस ने सशस्त्र सलामी देकर फ्रीडम फाइटर को अंतिम विदाई दी।
परिजनों ने बताया कि फ्रीडम फाइटर श्योराम को रविवार की रात जी घबराने की समस्या उत्पन्न हुई थी। जिसके बाद वे उसे अस्पताल में लेकर जाते, इससे पहले ही उनकी सांस बंद हो गई। उनके पुत्र बिरेंद्र सिंह ने बताया कि श्योराम का जन्म 10 अगस्त 1917 को हुआ था। 1939 में उनका संपर्क नेताजी सुभाषचंद्र बोस से हुआ। उनके ओजस्वी भाषण से प्रभावित होकर आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गए। 10 अगस्त 1940 को अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें नजरबंद कर लिया। 6 साल बाद तीन मार्च 1946 को घर लौटे। इसके थोड़े दिन बाद देश को स्वतंत्रता मिल गई, लेकिन श्योराम के दिल में देशसेवा का जज्बा कम नहीं हुआ। तीन नवंबर 1951 को उन्होंने सेना की डीएससी कोर में सेवाएं देनी आरंभ कर दी। 25 साल नौकरी करने के बाद स्वतंत्रता सेनानी अक्टूबर 1977 में सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने बताया कि श्योराम अखबार के नियमित पाठक रहे हैं। जम्मू कश्मीर में उत्पन्न हालातों को लेकर उनके हृदय में हमेशा टीस रही। उनका कहना था कि राजनीतिक पार्टियों के स्वार्थ के ही देश आंतरिक व बाहरी दुश्मनों का सामना कर रहा है। सेना पर बर्बरता पूर्वक पत्थरबाजी होना चिंता का विषय है। जिस पर सरकार को तुरंत कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। अन्यहथा सेना का मनोबल टूट जाएगी। जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ सकता है। इससे पहले जिला प्रशासन की तरफ से तहसीलदार योगेश कुमार, बीडीपीओ प्रमोद कुमार ने पुष्पचक्र अर्पित किया। पुलिस हवाई फायरिंग करके सेनानी को सम्मान पूर्वक अंतिम विदाई दी। इस मौके पर थाना प्रभारी सत्यनारायण, समाजसेवी डॉ. गजेसिंह चोपड़ा, भाजपा नेता सत्यव्रत शास्त्री, संदीप टोनी व अशोक कुमार सहित विभिन्न गांवों के अनेक लोग मौजूद थे।
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सरकार की बेरुखी से रही नाराजगी
स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र बिरेंद्र सिंह ने बताया कि श्योराम ने अधिकांश जीवन देशसेवा करने में बिताया है। बावजूद सरकार ने उनके सम्मान को तव्वजों नहीं दी। 15 अगस्त 1997 में तत्कालीन सीएम बंशीलाल ने सम्मान दिया था। इसके अलावा 1985 सीएम भजनलाल ने ताम्रपात्र देकर सम्मानित किया। भाजपा सरकार द्वारा सम्मानित नहीं करने के कारण परिजनों को मलाल है।
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