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Sat, 13 Jan 2018 12:41 AM IST
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:41 AM IST
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ठंड में जच्चा बच्चा बाहर छत पर, अंदर हो रही सफाई
नारनौल। सुबह साढ़े दस बजे रोजाना आपको नागरिक अस्पताल के पुराने भवन स्थित जनरल वार्ड के सभी पेसेंट छत पर बैठे मिलेंगे। इन पेसेंट में जच्चा व बच्चा की संख्या ज्यादा है। क्योंकि डिलीवरी के बाद इस वार्ड में ज्यादातर प्रसूताओं को ही रखा जाता है। इस नजारे के बारे में जब वहां स्थित वार्ड ब्वाय से पूछा गया तो उसने बताया कि अंदर सफाई हो रही है। इसलिए सभी पेसेंट को बाहर धूप में भेजा हुआ है।
जिले के अस्पतालों में पहले ही चिकित्सकों व अन्य सुविधाओं का अभाव है। पूरे जिले में चिकित्सकों की कमी है। वहीं अटेली व नांगल चौधरी के सामान्य अस्पताल में कई वर्षों से एक्सरे मशीन तक नहीं है। यहां अन्य उपकरणों का भी टोटा बना हुआ है। वहीं नागरिक अस्पताल में जहां सुविधाएं कुछ ठीक है, वहां मरीजों के साथ सही व्यवहार नहीं हो रहा। जिसके कारण यहां आने वाले मरीजों को काफी परेशानी होती है। शुक्रवार को जब नागरिक अस्पताल का दौरा किया गया तो पाया कि सुबह दस बजे तक अधिकांश चिकित्सक तो अपने अपने कैबिन में आ गए थे। वहीं लोगों की ज्यादा लाइन भी नहीं लगी थी। इसके बाद ऊपर जच्चा बच्चा वार्ड में जाकर देखा तो नजारा कुछ अजीब था। वहां मौजूद सभी मरीजों को वार्ड ब्वाय ने बाहर निकाला हुआ था। जिसके कारण सभी मरीज बाहर छत पर अपने अपने नन्हें मुन्ने बच्चों को लेकर बैठे थे। मरीजों के अलावा उनके तीमारदार भी बाहर मरीजों के साथ बैठे थे। शुक्रवार सुबह बादल होने के कारण धूप में भी तेजी नहीं थी, वहीं तेज हवा भी चल रही थी। ऐसे में मरीजों से बात की तो उन्होंने बताया कि अभी अंदर सफाई चल रही है इसलिए उनको बाहर बैठाया हुआ है।
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-सर्दी के मौसम में हो सकता है जच्चा-बच्चा को खतरा
नारनौल का तापमान दो-तीन दिनों से तीन व चार डिग्री के बीच चल रहा है। वहीं शुक्रवार को सुबह के समय बादल छाये हुए थे तथा ठंडी हवाएं चल रही थी। ऐेसे में जच्चा व बच्चा को खुले में छत पर बैठाया जाएगा तो उनको खतरा हो सकता है। दोनों को ही जुकाम, खांसी या निमोनिया की शिकायत हो सकती है।
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-पीलिया न हो इसलिए बैठाया
इस बारे में वहां के वार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों से पूछा गया तो उन्होंने अपना नाम तो नहीं बताया, मगर यह जरूर बताया कि बच्चों को थोड़ी देर धूप में भी बैठाया जाता है, ताकि बच्चों को पीलिया की शिकायत न रहे।

%%इस बारे में मुझे को ज्यादा जानकारी नहीं है। वे चिकित्सा अधीक्षक से इस बारे में बात कर ही पूरी जानकारी दे सकते हैं।--इंद्रजीत धनखड़, सिविल सर्जन, नारनौल।
-अटेली का सामान्य अस्पताल सुविधाओं के अभाव में सफेद हाथी साबित
मंडी अटेली। अटेली का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बेशक सामान्य अस्पताल में तबदील हो गया लेकिन चिकित्सकों व सुविधा के अभाव के चलते आज भी यह अस्पताल सफेद हाथी साबित हो रहा है। ऐसे हालात में क्षेत्र के लोगों को मजबूरीवश दूर-दराज व निजी अस्पतालों में दस्तक देनी पड़ रही है जिस कारण समय व आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
पूर्व विधायक नरेश यादव के नेतृत्व में आयोजित की गई रैली में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 2008 में अटेली के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को सामान्य अस्पताल का दर्जा दिया था। उस समय लगभग साढ़े सात करोड़ की लागत से तीन मंजिला आधुनिक इमारत बनाई गई। उससे क्षेत्र के लोगों को यह उम्मीद जगी कि अब स्वास्थ्य सेवाऐं समय पर उपलब्ध हो पाएगी लेकिन हालात आज भी जैसे के तैसे बने हुए है।
अस्पताल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो आठ पद चिकित्सकों के स्वीकृत हैं, लेकिन लंबे समय से यहां नाममात्र एक ही डॉक्टर अपनी सेवा दे रहे है। स्टाफ नर्स के 13 पद स्वीकृत होने के बावजूद चार पद रिक्त हैं। अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं है। एक्स-रे मशीन नए भवन में व्यवस्था न होने के कारण पुरानी इमारत में ही चलाई जा रही है लेकिन मशीन पुरानी होने के कारण वह भी अधिकतर समय बंद रहती है। अटेली क्षेत्र के 84 गांवों के अलावा राजस्थान सीमा के गांव काठूवास, रैवाणा, तलवाना, कान्हावास, माजरी, खुंदरोठ, विजय नगर, माढंण, हुडिया खुर्द आदि गांवों के लोग भी यहां उपचार के लिए दस्तक देते है लेकिन उपकरणों व चिकित्सकों के अभाव के कारण उन्हें निराश ही लौटना पड़ रहा है। क्षेत्र के गांवों की एक लाख 53 हजार आबादी के लोग अस्पताल के अंतर्गत आते है लेकिन वह सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे। लगभग 200 से अधिक मरीजों की ओपीडी प्रतिदिन चलती है। एकाध मरीज को सही उपचार मिलने के अलावा अधिकतर मरीजों को रेफर किया जाता है। इतनी बड़े क्षेत्र के लोगों के लिए एक ही एंबुलेंस है, सड़क दुर्घटना, प्रसव के लिए आने वाली महिलाऐं व मरीजों के लिए हायर सेंटर भेजने का कार्य करना पड़ रहा है ऐसे में दिन और रात को नाममात्र मरीजों को एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध हो पा रही है।

‘चिकित्सकों व उपकरणों का अभाव महसूस किया जा रहा है जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग व सरकार को अवगत कराया गया है जल्द ही इन कमियों को पूरा करवाने का कार्य किया जाएगा।’- डा. आदित्य, सामान्य अस्पताल, अटेली मंडी
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