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डीएपी के लिए 8 घंटे लाइनों में लगे रहे किसान
Updated Thu, 18 Oct 2018 01:03 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। आठ घंटे लाइन में लगने के बाद भी बुधवार को 50 से अधिक किसानों को बिना डीएपी खाद लिए लौटना पड़ा। मंगलवार देर रात डीएपी खाद के 250 बैगों की एक गाड़ी रेलवे रोड स्थित को-ऑपरेटिव सोसायटी में आई थी। किसान बुधवार सुबह छह बजे से ही लाइनों में लग गए थे। दोपहर बाद चार बजे लाइन में लगे किसानों का नंबर आया तो खाद खत्म हो गया। इससे किसानों को बगैर खाद लिए लौटना पड़ा। जबकि कुछ किसान मजबूरी में निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर डीएपी खरीदकर ले गए।
डीएपी का संकट किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। मंगलवार को खाली हाथ लौटने वाले किसान बुधवार को फिर से को-ऑपरेटिव सोसायटी के कार्यालय पहुंचे। सोसायटी कार्यालय सुबह 9 बजे खुलने से तीन घंटे पहले छह बजे ही किसान लाइनों में लग गए। सोसायटी में एक ही कर्मचारी होने के कारण यहां पर्ची काटने में काफी समय लगा। एक घंटे में 10 से 12 किसानों का नंबर ही आ रहा था। 20 किसानों की पर्ची काटने के बाद वही कर्मचारी गोदाम में जाकर किसानों को डीएपी के बैग वितरित करता रहा।
बोले किसान
गांव कुुराहवटा निवासी किसान रामकिशन ने कहा 5 बैग डीएपी लेना है। मंगलवार को भी आकर पूरा दिन लाइन में लगने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा था। बुधवार भी छह घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। दोपहर तीन बजे तक लाइन में लगे रामकिशन ने कहा कि सरकार उचित व्यवस्था नहीं की।
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गांव बावनिया निवासी राजेंद्र ने कहा कि पांच बैग डीएपी के लिए चक्कर लगवा रहे हैं। सरकार को यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। अगर दो लाइन में पर्ची कटे तथा वितरण के लिए दो लोग हों तो किसानों को कई कई घंटे लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। निजी दुकानों में महंगे दाम पर बैग मिल रहे हैं।
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गांव डुलाना निवासी महेंद्र ने कहा तीन बैग के लिए सुबह से लाइन में हूं। छह बजे घर से आकर लाइन में खड़ा हो गया था। सात घंटे लाइन में लगे हुए हो चुके हैं। अभी तक नंबर नहीं आया। डीएपी के वितरण में इस बार आधार भी अनिवार्य किया गया है। किसानों को कई-कई घंटे लाइन में खड़ा करने के बाद खाद दिया जा रहा है।
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माजरा खुर्द निवासी पवन बोले डीएपी के लिए इतना संकट नहीं होना चाहिए। अगर हमें खाद के लिए इस तरह से दो तीन दिन लाइन में खड़ा होना पड़ेगा तो बिजाई कब करेंगे। वहां खेतों में बिजाई की देरी से नुकसान हो रहा है। डीएपी तो गांव में ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वर्जन
डीएपी खाद की कमी नहीं है। एक ही कर्मचारी होने के कारण वितरण में समय लग रहा है। आधार की प्रति लेने के बाद किसान के अंगूठे का निशान भी बायोमीट्रिक मशीन पर लिया जा रहा है। इसके बाद किसान को डीएपी दिया जाता है। किसान धैर्य रखें सभी को खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
- संजीव कुमार, मैनेजर, हैफेड।
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महेंद्रगढ़। आठ घंटे लाइन में लगने के बाद भी बुधवार को 50 से अधिक किसानों को बिना डीएपी खाद लिए लौटना पड़ा। मंगलवार देर रात डीएपी खाद के 250 बैगों की एक गाड़ी रेलवे रोड स्थित को-ऑपरेटिव सोसायटी में आई थी। किसान बुधवार सुबह छह बजे से ही लाइनों में लग गए थे। दोपहर बाद चार बजे लाइन में लगे किसानों का नंबर आया तो खाद खत्म हो गया। इससे किसानों को बगैर खाद लिए लौटना पड़ा। जबकि कुछ किसान मजबूरी में निजी दुकानदारों से महंगे दामों पर डीएपी खरीदकर ले गए।
डीएपी का संकट किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। मंगलवार को खाली हाथ लौटने वाले किसान बुधवार को फिर से को-ऑपरेटिव सोसायटी के कार्यालय पहुंचे। सोसायटी कार्यालय सुबह 9 बजे खुलने से तीन घंटे पहले छह बजे ही किसान लाइनों में लग गए। सोसायटी में एक ही कर्मचारी होने के कारण यहां पर्ची काटने में काफी समय लगा। एक घंटे में 10 से 12 किसानों का नंबर ही आ रहा था। 20 किसानों की पर्ची काटने के बाद वही कर्मचारी गोदाम में जाकर किसानों को डीएपी के बैग वितरित करता रहा।
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बोले किसान
गांव कुुराहवटा निवासी किसान रामकिशन ने कहा 5 बैग डीएपी लेना है। मंगलवार को भी आकर पूरा दिन लाइन में लगने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ा था। बुधवार भी छह घंटे से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। दोपहर तीन बजे तक लाइन में लगे रामकिशन ने कहा कि सरकार उचित व्यवस्था नहीं की।
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गांव बावनिया निवासी राजेंद्र ने कहा कि पांच बैग डीएपी के लिए चक्कर लगवा रहे हैं। सरकार को यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। अगर दो लाइन में पर्ची कटे तथा वितरण के लिए दो लोग हों तो किसानों को कई कई घंटे लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। निजी दुकानों में महंगे दाम पर बैग मिल रहे हैं।
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गांव डुलाना निवासी महेंद्र ने कहा तीन बैग के लिए सुबह से लाइन में हूं। छह बजे घर से आकर लाइन में खड़ा हो गया था। सात घंटे लाइन में लगे हुए हो चुके हैं। अभी तक नंबर नहीं आया। डीएपी के वितरण में इस बार आधार भी अनिवार्य किया गया है। किसानों को कई-कई घंटे लाइन में खड़ा करने के बाद खाद दिया जा रहा है।
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माजरा खुर्द निवासी पवन बोले डीएपी के लिए इतना संकट नहीं होना चाहिए। अगर हमें खाद के लिए इस तरह से दो तीन दिन लाइन में खड़ा होना पड़ेगा तो बिजाई कब करेंगे। वहां खेतों में बिजाई की देरी से नुकसान हो रहा है। डीएपी तो गांव में ही उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वर्जन
डीएपी खाद की कमी नहीं है। एक ही कर्मचारी होने के कारण वितरण में समय लग रहा है। आधार की प्रति लेने के बाद किसान के अंगूठे का निशान भी बायोमीट्रिक मशीन पर लिया जा रहा है। इसके बाद किसान को डीएपी दिया जाता है। किसान धैर्य रखें सभी को खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
- संजीव कुमार, मैनेजर, हैफेड।