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इंटरनेट के युग में भी कम नहीं लाइब्रेरी की उपयोगिता
Updated Tue, 26 Jun 2018 12:24 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। आज इंटरनेट के युग में भी जिला पुस्तकालय में किताबें पढ़ने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। जिला लाइब्रेरी में पुस्तक प्रेमियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जहां दो साल पूर्व तक यहां रोजाना 80 से 100 लोग ही पढ़ने आते थे, वहीं अब 150 लोग आ रहे हैं। यहां पर लोगों के लिए करीब 72 हजार से अधिक किताबें रखी हैं। जिला लाइब्रेरी में सदस्यों की संख्या 2777 है, जो लगातार बढ़ती जा रही है।
लोगों को किताबी ज्ञान दिलाने व जरूरतमंद लोगों को किताबें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 जुलाई 1989 को रेवाड़ी रोड पर बस स्टैंड के पास जिला पुस्तकालय का निर्माण किया गया था। लाइब्रेरी बनने के बाद भी यहां करीब दो दशक तक काफी लोग यहां पहुंचने लगे। 2005 से 2015 के बीच में यहां पर पाठकों की संख्या कम होने लगी थी, मगर दो साल से यहां फिर से पाठक आने लगे हैं। यहां के नियमित सदस्य राजेंद्र कुमार व यादवेंद्र सिंह ने बताया कि यहां दो साल से पाठकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी भी लोगों में किताबों के प्रति रुझान है।
-अखबार पढ़ने के लिए भी आ रहे पाठक
यहां पर किताबों के अलावा अनेक पाठक अखबार पढ़ने के लिए भी आते हैं। यहां आने वाले पाठकों में 50 प्रतिशत लोगों की संख्या अखबार के पाठकों की है। इसके चलते यहां पर हिंदी के अलावा अंग्रेजी व पड़ोसी राज्य राजस्थान के अखबार भी आते हैं।
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-पांच साल में दो हजार किताबें बढ़ी
जिला पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की करीब 72 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। वर्ष 2012 में भी यहां 70 हजार किताबें थीं तथा 2015 में भी इनकी संख्या 70 हजार ही थी, मगर अब यहां पर राजाराम मोहनदास ट्रस्ट कोलकत्ता की ओर से 2000 के करीब किताबें मिली हैं। जिससे अब यहां 72 हजार किताबें हैं।
-ये किताबें उपलब्ध हैं यहां
पुस्तकालय में महान लेखकों के उपन्यास व विज्ञान, मनोविज्ञान, अध्यात्मिक, लोकसाहित्य व बच्चों के लिए अनेक प्रकार की कहानियों का हिंदी साहित्य भी उपलब्ध है। इसके अलावा अंग्रेजी साहित्य की भी हजारों पुस्तकें मौजूद हैैं। वहीं विद्यार्थियों के लिए टेस्टों की तैयारी के लिए बेहतर पुस्तकों के साथ रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित, हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोष के अलावा भी अनेक पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हैं। जिनका अध्ययन कर विद्यार्थी अपने ज्ञान का संवर्धन कर सकते है।
-बिल्डिंग को है मरम्मत की जरूरत
यहां की बिल्डिंग को अब मरम्मत की जरूरत है। करीब 25 साल पुरानी बिल्डिंग की छत का प्लास्टर कमजोर हो गया है। वहीं मुख्य गेट के ऊपर भी बिल्डिंग की दीवारें कमजोर नजर आने लगी हैं।
-बढ़ रही है सदस्यों की संख्या
वर्ष 2015 में इस लाइब्रेरी में सदस्यों की संख्या 2705 थी। तीन साल के दौरान यह बढ़कर 2777 हो गई। ऐसे में यहां सदस्यों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है।
-जानें अपने पुस्तकालय को
किताबें------72 हजार
अखबार------हिंदी, अंग्रेजी
सदस्य-----2777
समय-----सुबह 10 से शाम 05 बजे तक
पुस्तकालय की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से ठोस कदम उठाये जा रहे हैं। हाल ही में नया फर्नीचर भी मिला है। यहां पर नियमित रूप से अनेक पाठक आ रहे हैं। यहां करीब 72 हजार से अधिक ज्ञानवर्धक किताबें हैं।
--राजकुमार, इंचार्ज, जिला पुस्तकालय, नारनौल
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नारनौल। आज इंटरनेट के युग में भी जिला पुस्तकालय में किताबें पढ़ने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। जिला लाइब्रेरी में पुस्तक प्रेमियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जहां दो साल पूर्व तक यहां रोजाना 80 से 100 लोग ही पढ़ने आते थे, वहीं अब 150 लोग आ रहे हैं। यहां पर लोगों के लिए करीब 72 हजार से अधिक किताबें रखी हैं। जिला लाइब्रेरी में सदस्यों की संख्या 2777 है, जो लगातार बढ़ती जा रही है।
लोगों को किताबी ज्ञान दिलाने व जरूरतमंद लोगों को किताबें उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 11 जुलाई 1989 को रेवाड़ी रोड पर बस स्टैंड के पास जिला पुस्तकालय का निर्माण किया गया था। लाइब्रेरी बनने के बाद भी यहां करीब दो दशक तक काफी लोग यहां पहुंचने लगे। 2005 से 2015 के बीच में यहां पर पाठकों की संख्या कम होने लगी थी, मगर दो साल से यहां फिर से पाठक आने लगे हैं। यहां के नियमित सदस्य राजेंद्र कुमार व यादवेंद्र सिंह ने बताया कि यहां दो साल से पाठकों की संख्या में इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि अभी भी लोगों में किताबों के प्रति रुझान है।
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-अखबार पढ़ने के लिए भी आ रहे पाठक
यहां पर किताबों के अलावा अनेक पाठक अखबार पढ़ने के लिए भी आते हैं। यहां आने वाले पाठकों में 50 प्रतिशत लोगों की संख्या अखबार के पाठकों की है। इसके चलते यहां पर हिंदी के अलावा अंग्रेजी व पड़ोसी राज्य राजस्थान के अखबार भी आते हैं।
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-पांच साल में दो हजार किताबें बढ़ी
जिला पुस्तकालय में विभिन्न विषयों की करीब 72 हजार पुस्तकें उपलब्ध हैं। वर्ष 2012 में भी यहां 70 हजार किताबें थीं तथा 2015 में भी इनकी संख्या 70 हजार ही थी, मगर अब यहां पर राजाराम मोहनदास ट्रस्ट कोलकत्ता की ओर से 2000 के करीब किताबें मिली हैं। जिससे अब यहां 72 हजार किताबें हैं।
-ये किताबें उपलब्ध हैं यहां
पुस्तकालय में महान लेखकों के उपन्यास व विज्ञान, मनोविज्ञान, अध्यात्मिक, लोकसाहित्य व बच्चों के लिए अनेक प्रकार की कहानियों का हिंदी साहित्य भी उपलब्ध है। इसके अलावा अंग्रेजी साहित्य की भी हजारों पुस्तकें मौजूद हैैं। वहीं विद्यार्थियों के लिए टेस्टों की तैयारी के लिए बेहतर पुस्तकों के साथ रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित, हिन्दी-अंग्रेजी शब्दकोष के अलावा भी अनेक पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध हैं। जिनका अध्ययन कर विद्यार्थी अपने ज्ञान का संवर्धन कर सकते है।
-बिल्डिंग को है मरम्मत की जरूरत
यहां की बिल्डिंग को अब मरम्मत की जरूरत है। करीब 25 साल पुरानी बिल्डिंग की छत का प्लास्टर कमजोर हो गया है। वहीं मुख्य गेट के ऊपर भी बिल्डिंग की दीवारें कमजोर नजर आने लगी हैं।
-बढ़ रही है सदस्यों की संख्या
वर्ष 2015 में इस लाइब्रेरी में सदस्यों की संख्या 2705 थी। तीन साल के दौरान यह बढ़कर 2777 हो गई। ऐसे में यहां सदस्यों की संख्या में भी इजाफा होता जा रहा है।
-जानें अपने पुस्तकालय को
किताबें------72 हजार
अखबार------हिंदी, अंग्रेजी
सदस्य-----2777
समय-----सुबह 10 से शाम 05 बजे तक
पुस्तकालय की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन के सहयोग से ठोस कदम उठाये जा रहे हैं। हाल ही में नया फर्नीचर भी मिला है। यहां पर नियमित रूप से अनेक पाठक आ रहे हैं। यहां करीब 72 हजार से अधिक ज्ञानवर्धक किताबें हैं।
--राजकुमार, इंचार्ज, जिला पुस्तकालय, नारनौल