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मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने डीसी को सौंपा ज्ञापन
Updated Tue, 27 Feb 2018 12:25 AM IST
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस बार मनाएंगी काली होली : कृष्णा
नारनौल।
अपनी मांगों को लेकर सोमवार को भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल पुराने लघु सचिवालय के पार्क में जारी रहा। इस मौके पर जिला प्रधान कृष्णा देवी ने कहा कि वे पिछले कई दिनों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही है, लेकिन सरकार उनकी मांगों के बारे में कोई सुनवाई नहीं कर रही है। प्रधान ने कहा कि राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर इस बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका काली होली मनाएंगी। होली की पूर्व संध्या पर 28 फरवरी को प्रधानमंत्री का नारनौल के महावीर चौक पर पुतला फूंका जाएगा। वहीं 4 मार्च को प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका करनाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन उपायुक्त के माध्यम से सीएम के नाम भेजा।
यूनियन की जिला सचिव स्वीटी देवी ने प्रशासन से यूनियन की राज्य कार्यकारिणी से शीघ्र वार्ता करवाने का आह्वान किया। इससे पूर्व कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने 25 फरवरी को सांपला में आंदोलन के बाद घर लौट कार्यकर्ता की दुर्घटना में मौत हो जाने पर शोक जताया।
हड़ताल में हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच के महासचिव मास्टर सूबे सिंह, शेर सिंह, सुभाष चंद, बलबीर सिंह, माया देवी, समझ कौर, बिमला यादव, सविता देवी, ब्रह्मा देवी, मुनेश देवी, सविता देवी,सुमन देवी, संतोष ढिल्लो, माया देवी, कृष्णा, सुमित्रा, बिमला, निर्मला, राजकुमारी, सरोज, माया, सुनीता, विजय, मूली देवी, कमलेश नायन, अंजू, गीता, सुनीता, मंजू, सुनीता, उर्मिला धनौंदा, मंजू, बलजीत व प्रकाशी देवी आदि मौजूद थे।
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कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने
न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये
पेंशन 5 हजार रुपये प्रतिमाह व सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना,
हेल्पर के मानदेय की अनियमितता दूर कर 4070 रुपये करना
राशन और केंद्रों का सामान दिलाने
आईसीडीएस स्कीम का बजट बढ़ाने,
वेतन हर माह की पहली तिथि को देना,
रजिस्टर व स्टेशनरी कार्यालय द्वारा देना
फार्म व रजिस्टर पूरा करने की ट्रेनिंग देना
शहरी केन्द्रों का किराया तीन हजार व ग्रामीण क्षेत्र का 1500 रुपये प्रतिमाह समय पर देने
गर्मी व सर्दी की छुट्टियों में केन्द्रों की पूर्ण छुट्टी लागू करना,
तीन से छह साल तक के बच्चों का अनिवार्य दाखिला आंगनबाड़ी केंद्रों में लागू करना
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नारनौल।
अपनी मांगों को लेकर सोमवार को भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की अनिश्चितकालीन हड़ताल पुराने लघु सचिवालय के पार्क में जारी रहा। इस मौके पर जिला प्रधान कृष्णा देवी ने कहा कि वे पिछले कई दिनों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही है, लेकिन सरकार उनकी मांगों के बारे में कोई सुनवाई नहीं कर रही है। प्रधान ने कहा कि राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर इस बार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका काली होली मनाएंगी। होली की पूर्व संध्या पर 28 फरवरी को प्रधानमंत्री का नारनौल के महावीर चौक पर पुतला फूंका जाएगा। वहीं 4 मार्च को प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका करनाल में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगी।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन उपायुक्त के माध्यम से सीएम के नाम भेजा।
यूनियन की जिला सचिव स्वीटी देवी ने प्रशासन से यूनियन की राज्य कार्यकारिणी से शीघ्र वार्ता करवाने का आह्वान किया। इससे पूर्व कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं ने 25 फरवरी को सांपला में आंदोलन के बाद घर लौट कार्यकर्ता की दुर्घटना में मौत हो जाने पर शोक जताया।
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हड़ताल में हरियाणा संयुक्त कर्मचारी मंच के महासचिव मास्टर सूबे सिंह, शेर सिंह, सुभाष चंद, बलबीर सिंह, माया देवी, समझ कौर, बिमला यादव, सविता देवी, ब्रह्मा देवी, मुनेश देवी, सविता देवी,सुमन देवी, संतोष ढिल्लो, माया देवी, कृष्णा, सुमित्रा, बिमला, निर्मला, राजकुमारी, सरोज, माया, सुनीता, विजय, मूली देवी, कमलेश नायन, अंजू, गीता, सुनीता, मंजू, सुनीता, उर्मिला धनौंदा, मंजू, बलजीत व प्रकाशी देवी आदि मौजूद थे।
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कार्यकर्ताओं की मुख्य मांगें
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने
न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये
पेंशन 5 हजार रुपये प्रतिमाह व सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना,
हेल्पर के मानदेय की अनियमितता दूर कर 4070 रुपये करना
राशन और केंद्रों का सामान दिलाने
आईसीडीएस स्कीम का बजट बढ़ाने,
वेतन हर माह की पहली तिथि को देना,
रजिस्टर व स्टेशनरी कार्यालय द्वारा देना
फार्म व रजिस्टर पूरा करने की ट्रेनिंग देना
शहरी केन्द्रों का किराया तीन हजार व ग्रामीण क्षेत्र का 1500 रुपये प्रतिमाह समय पर देने
गर्मी व सर्दी की छुट्टियों में केन्द्रों की पूर्ण छुट्टी लागू करना,
तीन से छह साल तक के बच्चों का अनिवार्य दाखिला आंगनबाड़ी केंद्रों में लागू करना