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Mahendragarh-Narnaul News: शाम को 300 क्यूसेक पानी छोड़ा शहर में आपूर्ति के लिए नाकाफी
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फोटो संख्या:60- देवास जलघर में टैंक नंबर सूखा--संवाद
महेंद्रगढ़। जिले में रविवार शाम को 300 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, लेकिन सुबह बंद हो गया। जन स्वास्थ्य विभाग के पास रातभर में इतना पानी भी जलघरों में नहीं पहुंच पाया कि शहरी आबादी को नियमित आपूर्ति की जा सके।
हालांकि, देवास गांव स्थित शहरी आपूर्ति की जल परियोजना के टैंक नंबर एक व दो में छह से आठ फीट तक पानी स्टोर हो पाया।
जेएफ-साल्हावास पंप हाउस से महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी दो जिलों को आपूर्ति की जाती है।
महेंद्रगढ़ को जेएफ-2 से 1650 क्यूसेक पानी की क्षमता होने के बाद भी बारिश के सीजन को छोड़ 200 से 700 क्यूसेक के बीच ही पानी मिल पाता है।
पानी का स्तर कम होने के कारण महेंद्रगढ़ शुरू होते ही जेएलएन उठान पानी की विधि पर आधारित है।
अधिकांश पंप हाउसों की उठान क्षमता 23.2 फीट है। ऐसे में पानी का स्तर वृद्धि होने में बड़ी बाधा आती है। जब उठान क्षमता वाली मोटरें चलाई जाती हैं तो पंप हाउस के पीछे का पानी भी तेजी से घटता है, जिसके कारण नियमित रूप से स्तर बढ़ने में समय लगता है।
रातभर में महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी व चितलांग पंप हाउस से जलघरों के लिए पानी तो छोड़ा, लेकिन जलघर आधे भी नहीं भर पाए। नहर में नियमित आपूर्ति होने के बाद प्रथम चरण में 65 नहरों के माध्यम से 37 बड़े जलघरों में पानी आपूर्ति विभाग की प्राथमिकता है। जलघरों को भरने बाद 427 जोहड़ों से जुड़ी हुई नहरों में पानी छोड़ा जाता है। शहर की 80 हजार की आबादी को रोज छह लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। देवास जल परियोजना में 24 करोड़ लीटर क्षमता के चार टैंक हैं।
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हालांकि, देवास गांव स्थित शहरी आपूर्ति की जल परियोजना के टैंक नंबर एक व दो में छह से आठ फीट तक पानी स्टोर हो पाया।
जेएफ-साल्हावास पंप हाउस से महेंद्रगढ़ व रेवाड़ी दो जिलों को आपूर्ति की जाती है।
महेंद्रगढ़ को जेएफ-2 से 1650 क्यूसेक पानी की क्षमता होने के बाद भी बारिश के सीजन को छोड़ 200 से 700 क्यूसेक के बीच ही पानी मिल पाता है।
पानी का स्तर कम होने के कारण महेंद्रगढ़ शुरू होते ही जेएलएन उठान पानी की विधि पर आधारित है।
अधिकांश पंप हाउसों की उठान क्षमता 23.2 फीट है। ऐसे में पानी का स्तर वृद्धि होने में बड़ी बाधा आती है। जब उठान क्षमता वाली मोटरें चलाई जाती हैं तो पंप हाउस के पीछे का पानी भी तेजी से घटता है, जिसके कारण नियमित रूप से स्तर बढ़ने में समय लगता है।
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रातभर में महेंद्रगढ़ डिस्ट्रीब्यूटरी व चितलांग पंप हाउस से जलघरों के लिए पानी तो छोड़ा, लेकिन जलघर आधे भी नहीं भर पाए। नहर में नियमित आपूर्ति होने के बाद प्रथम चरण में 65 नहरों के माध्यम से 37 बड़े जलघरों में पानी आपूर्ति विभाग की प्राथमिकता है। जलघरों को भरने बाद 427 जोहड़ों से जुड़ी हुई नहरों में पानी छोड़ा जाता है। शहर की 80 हजार की आबादी को रोज छह लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। देवास जल परियोजना में 24 करोड़ लीटर क्षमता के चार टैंक हैं।

फोटो संख्या:60- देवास जलघर में टैंक नंबर सूखा--संवाद
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