फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   30 to 40 Cataract Patients Visiting the Hospital

Mahendragarh-Narnaul News: अस्पताल में आ रहे सफेद मोतियाबिंद के 30 से 40 मरीज

Mon, 30 Mar 2026 11:24 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Mon, 30 Mar 2026 11:24 PM IST
विज्ञापन
30 to 40 Cataract Patients Visiting the Hospital
फोटो 01 नेत्र रोग विशेषज्ञ के कमरे के बाहर लगी मरीजों की लाईन। संवाद
नारनौल। नागरिक अस्पताल में सफेद मोतियाबिंद के 30 से 40 पीड़ित उपचार के लिए प्रतिदिन आ रहे हैं। वहीं काला मोतियाबिंद के पीड़ित 3 से 4 पीड़ित आ रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ का कहना है कि अगर सफेद मोतियाबिंद का समय से ऑपरेशन नहीं हुआ तो वह काला मोतिया में तब्दील हो सकता है जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है।
विज्ञापन

सफेद मोतियाबिंद आंख के लेंस का धुंधला होना है जिसका इलाज सर्जरी से दृष्टि वापस ला सकता है। इसके विपरीत काला मोतियाबिंद आंख का उच्च दबाव है जो आंख की नसों को नष्ट करता है। इससे हुई दृष्टि हानि अपरिवर्तनीय (ठीक न होने वाली) होती है। सफेद मोतिया में धुंधलापन और काला मोतिया में रोशनी कम होना प्रमुख है।
विज्ञापन


सफेद मोतिया उम्र के साथ लेंस के धुंधले होने से होता है जबकि काला मोतिया आंख के अंदर दबाव बढ़ने से होता है। सफेद मोतिया में दृष्टि धुंधली होती है, जबकि काले में दृष्टि की परिधि कम होने लगती है, जिसे मूक चोर भी कहते हैं, क्योंकि यह धीरे-धीरे दृष्टि छीनता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सफेद मोतिया में सर्जरी से नया लेंस डाला जाता है। जबकि काला मोतिया आई ड्रॉप्स, लेजर या सर्जरी से केवल नियंत्रित किया जा सकता है, जो नष्ट नस को वापस नहीं ला सकती। सफेद मोतिया में पुतली के पीछे सफेद दिखता है। काला मोतिया में पुतली का रंग सामान्य हो सकता है लेकिन दृष्टि काली पड़ती जाती है।

दृष्टि का धीरे-धीरे धुंधला होना, रात में गाड़ी चलाने में कठिनाई, रंग फीके या पीले दिखाई देना, चश्मे का नंबर बार-बार बदलना सफेद मोतिया के लक्षण हैं। ला मोतियाबिंद के शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होते और ये ही इसकी सबसे खतरनाक बात है। दृष्टि के किनारे कम होना। अचानक सिरदर्द या आंखों में तेज दर्द। आंखों में लालपन। उल्टियां या जी मिचलाना शामिल हैं।

डॉ. नीरू ने बताया कि परिवार में अगर किसी को काला मोतियाबिंद है तो उनके बच्चों को अपनी आंखों की जांच जरूर कराएं। सफेद मोतियाबिंद है तो खुद से कोई दवा न लें और 45 की उम्र के बाद अगर कम दिखाई देता है चिकित्सक से परामर्श लें व नियमित जांच कराएं।

साथ ही सर्जरी के लिए चिकित्सक ने कहा है तो देरी बिलकुल न करें और समय पर सर्जरी कराएं अन्यथा सह काला मोतिया में भी तब्दील हो सकता है।
वर्जन:
काला मोतियाबिंद आनुवांशिक होता है और नवजात बच्चे में भी हो सकता है। समय समय पर आखों की जांच करवाते रहें। कोई भी लक्षण दिखाई दे तो स्वयं कोई भी दवा या आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें और चिकित्सक से सलाह लें।

डॉ. नीरू यादव, नेत्र रोग विशेषज्ञ, सिविल अस्पताल, नारनौल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed