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प्रदेश में नारनौल स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में 43वें स्थान पर
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। नगर परिषद की लापरवाही का नतीजा है कि इस बार शहर की सफाई रैंकिंग में सुधार आने के बजाय गिरावट आई है। देशभर के शहरों के स्वच्छता सर्वेक्षण में नारनौल शहर ने प्रदेश में एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में 43वां स्थान हासिल किया है। वहीं, नार्थ जोन में शहर ने 583 वां स्थान है। पिछले साल प्रदेश में 14वें स्थान पर था। वहीं नार्थ जोन में 94वां स्थान प्राप्त किया था।
लोगों का कहना है कि सफाई में सुधार होने के बजाय गिरावट का जिम्मेदार नप है। हालांकि इस बार नगर परिषद नारनौल के सफाई में सुधार आना चाहिए था। लेकिन, समय से संसाधन न मिलने पर शहर की रैंकिंग में गिरावट आई है। नप ने करीब 70 लाख रुपये से बड़े डस्टबिन, 200 छोटे डस्टबिन, डंपर प्लेसर समेत अन्य सामान लिए थे। लेकिन, इस सामानों का स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान लाभ नहीं मिल सका। क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण पहले ही हो चुका था।
बता दें कि नप ने पिछल साल दिसंबर से ही स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तैयारियां शुरू कर दी थी। पूरे शहर में होर्डिंग लगाकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान शहर के प्रमुख सड़कों और टॉयलेट की सफाई कराई गई थी। अवैध होर्डिंगों को हटाया गया था। जिससे स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में बेहतर रैंकिंग की जा सके। लेकिन, स्वच्छता सर्वेक्षण रैैंकिंग का रिजल्ट आने पर नप की उम्मीदों पर पानी फिर गया। प्रदेेश स्तर पर भी रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ है। शहर ने प्रदेश में एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में 43वां स्थान हासिल किया है। वहीं, नार्थ जोन में शहर ने 583 वां स्थान है।
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ये माने पिछड़ने के कारण
सिटीजन फीडबैक में शहर की स्थिति खराब रही है। करीब छह लोगों ने ही ऑनलाइन फीडबैक दिया। इससे भी नप को कम नंबर मिले। दूसरा नप को विभाग की ओर से सफाई से संबंधित छोटे-बड़े डस्टबिन समय से नहीं मिल सके। सफाई कर्मचारियों के लिए ट्रॉली, डस्टबिन और डंपर प्लेसर सर्वेक्षण के बाद मिले। इससे रैंकिंग में सुधार नहीं मिल सका।
नप चेयरपर्सन भारती सैनी का कहना है कि रैंकिंग आशा के अनुसार नहीं रहा। इसमें सुधार किया जाएगा। शहर के सभी प्रमुख स्थानों पर बड़े और छोटे डस्टबिन रखवा दिए हैं। सफाई विंग के साथ बैठक पर सफाई को बेहतर करने पर चर्चा की गई है। नगर परिषद के सचिव नवल किशोर ने बताया कि साफ-सफाई व शौचालयों के हुए सर्वेक्षण में शहरों को रैंकिंग दी गई है। जिसमें नारनौल जिले में पहले स्थान पर है। सफाई में और सुधार किया जाएगी।
बोले से बातचीत
शहर में सफाई को बेहतर करने की जरूरत है। इसके साथ लोगों को भी सफाई के लिए जागरूक होना चाहिए। शहर में कई जगहों पर सफाई में सुधार हुआ है। हालांकि इस बार रैंकिंग में काफी गिरावट आई है।
- मनोज जांगड़ा, उप प्रधान, नप
नारनौल को स्वच्छ और सुंदर रखा जा सकता है। लेकिन, छोटी-छोटी कमियों से अच्छी रैंकिंग नहीं मिल पाती। बेहतर होगा कि नप पूरे साल सफाई पर ध्यान दे। ताकि शहर सफाई में रोल मॉडल बनाया सके। लोगों की शिकायतों पर सुनवाई करें।
- दिनेश शर्मा, कारोबारी पुल बाजार।
शहर की रैंकिंग में सुधार होना जरूरी है। अभी कई जगह गंदगी के ढेर पड़े हुए हैं। साफ सफाई की ओर भी ज्यादा ध्यान दिया जाए तो बेहतर रहेगा। इसके लिए लगातार काम करने की जरूरत है। अभी भी कई जगहों पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
- जितेंद्र गोयल, स्थानीय निवासी।
वर्जन
इस बार शहर की रैंकिंग उम्मीद के अनुसार नहीं रहा है। लोगों को भी सफाई में पूरा सहयोग करना चाहिए। नप को सामान तो मिले लेकिन देर से। इससे भी सफाई पर असर पड़ा है। आगे इसे बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
- भारती सैनी, चेयरपर्सन, नप नारनौल।
नप/नपा रैंक स्कोर
नारनौल नप 583 1586.22
कनीना 747 1360.43
नांगल चौधरी 701 1424.41
अटेली 837 1284.39
महेंद्रगढ़ 880 1182.91
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नारनौल। नगर परिषद की लापरवाही का नतीजा है कि इस बार शहर की सफाई रैंकिंग में सुधार आने के बजाय गिरावट आई है। देशभर के शहरों के स्वच्छता सर्वेक्षण में नारनौल शहर ने प्रदेश में एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में 43वां स्थान हासिल किया है। वहीं, नार्थ जोन में शहर ने 583 वां स्थान है। पिछले साल प्रदेश में 14वें स्थान पर था। वहीं नार्थ जोन में 94वां स्थान प्राप्त किया था।
लोगों का कहना है कि सफाई में सुधार होने के बजाय गिरावट का जिम्मेदार नप है। हालांकि इस बार नगर परिषद नारनौल के सफाई में सुधार आना चाहिए था। लेकिन, समय से संसाधन न मिलने पर शहर की रैंकिंग में गिरावट आई है। नप ने करीब 70 लाख रुपये से बड़े डस्टबिन, 200 छोटे डस्टबिन, डंपर प्लेसर समेत अन्य सामान लिए थे। लेकिन, इस सामानों का स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान लाभ नहीं मिल सका। क्योंकि स्वच्छता सर्वेक्षण पहले ही हो चुका था।
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बता दें कि नप ने पिछल साल दिसंबर से ही स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर तैयारियां शुरू कर दी थी। पूरे शहर में होर्डिंग लगाकर लोगों को सफाई के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान शहर के प्रमुख सड़कों और टॉयलेट की सफाई कराई गई थी। अवैध होर्डिंगों को हटाया गया था। जिससे स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में बेहतर रैंकिंग की जा सके। लेकिन, स्वच्छता सर्वेक्षण रैैंकिंग का रिजल्ट आने पर नप की उम्मीदों पर पानी फिर गया। प्रदेेश स्तर पर भी रैंकिंग में सुधार नहीं हुआ है। शहर ने प्रदेश में एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में 43वां स्थान हासिल किया है। वहीं, नार्थ जोन में शहर ने 583 वां स्थान है।
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ये माने पिछड़ने के कारण
सिटीजन फीडबैक में शहर की स्थिति खराब रही है। करीब छह लोगों ने ही ऑनलाइन फीडबैक दिया। इससे भी नप को कम नंबर मिले। दूसरा नप को विभाग की ओर से सफाई से संबंधित छोटे-बड़े डस्टबिन समय से नहीं मिल सके। सफाई कर्मचारियों के लिए ट्रॉली, डस्टबिन और डंपर प्लेसर सर्वेक्षण के बाद मिले। इससे रैंकिंग में सुधार नहीं मिल सका।
नप चेयरपर्सन भारती सैनी का कहना है कि रैंकिंग आशा के अनुसार नहीं रहा। इसमें सुधार किया जाएगा। शहर के सभी प्रमुख स्थानों पर बड़े और छोटे डस्टबिन रखवा दिए हैं। सफाई विंग के साथ बैठक पर सफाई को बेहतर करने पर चर्चा की गई है। नगर परिषद के सचिव नवल किशोर ने बताया कि साफ-सफाई व शौचालयों के हुए सर्वेक्षण में शहरों को रैंकिंग दी गई है। जिसमें नारनौल जिले में पहले स्थान पर है। सफाई में और सुधार किया जाएगी।
बोले से बातचीत
शहर में सफाई को बेहतर करने की जरूरत है। इसके साथ लोगों को भी सफाई के लिए जागरूक होना चाहिए। शहर में कई जगहों पर सफाई में सुधार हुआ है। हालांकि इस बार रैंकिंग में काफी गिरावट आई है।
- मनोज जांगड़ा, उप प्रधान, नप
नारनौल को स्वच्छ और सुंदर रखा जा सकता है। लेकिन, छोटी-छोटी कमियों से अच्छी रैंकिंग नहीं मिल पाती। बेहतर होगा कि नप पूरे साल सफाई पर ध्यान दे। ताकि शहर सफाई में रोल मॉडल बनाया सके। लोगों की शिकायतों पर सुनवाई करें।
- दिनेश शर्मा, कारोबारी पुल बाजार।
शहर की रैंकिंग में सुधार होना जरूरी है। अभी कई जगह गंदगी के ढेर पड़े हुए हैं। साफ सफाई की ओर भी ज्यादा ध्यान दिया जाए तो बेहतर रहेगा। इसके लिए लगातार काम करने की जरूरत है। अभी भी कई जगहों पर गंदगी के ढेर लगे हैं।
- जितेंद्र गोयल, स्थानीय निवासी।
वर्जन
इस बार शहर की रैंकिंग उम्मीद के अनुसार नहीं रहा है। लोगों को भी सफाई में पूरा सहयोग करना चाहिए। नप को सामान तो मिले लेकिन देर से। इससे भी सफाई पर असर पड़ा है। आगे इसे बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
- भारती सैनी, चेयरपर्सन, नप नारनौल।
नप/नपा रैंक स्कोर
नारनौल नप 583 1586.22
कनीना 747 1360.43
नांगल चौधरी 701 1424.41
अटेली 837 1284.39
महेंद्रगढ़ 880 1182.91