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स्वाइन फ्लू का खतरा, चिकित्सक बेपरवाह
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:46 AM IST
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स्वाइन फ्लू का खतरा, चिकित्सक बेपरवाह
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। पूरा देश स्वाइन फ्लू की चपेट में है। आए दिन कहीं न कहीं से स्वाइन फ्लू से मौत की सूचना आ रही हैं। महेंद्रगढ़ में भी नसीबपुर गांव में स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध मामला सामने आ चुका है। प्रदेश के नजदीकी जिले भिवानी और रेवाड़ी में भी स्वाइन फ्लू के केस मिल चुके हैं। पड़ोसी राज्य राजस्थान के झुंझुनूं और जयपुर में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। इसके बावजूद नागरिक अस्पताल के चिकित्सक इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं। उनकी ये लापरवाही लोगों की जान के लिए घातक हो सकती है। नागरिक अस्पताल में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो चिकित्सक बिना किसी अतिरिक्त सावधानी के मरीजों की जांच कर रहे थे।
प्रदेश और देश में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। स्वाइन फ्लू का वायरस बड़ी ही तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसका वायरस हवा से ही दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर देता है। ये बात चिकित्सक भी जानते हैं। इसके बाद भी नागरिक अस्पताल में इस संबंध में कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे। सिविल अस्पताल के चिकित्सक यहां आने वाले मरीजों की जांच सामान्य रूप से ही कर रहे हैं। ऐसे में अगर यदि कोई स्वाइन फ्लू पीड़ित अस्पताल में आ जाता है तो चिकित्सक के साथ ही अन्य लोगों की भी संक्रामक बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
नहीं पहनते मास्क, सिर पर नहीं है कवर
सिविल अस्पताल में जब टीम पहुंची तो कोई भी चिकित्सक मास्क पहने हुए नहीं मिला। किसी चिकित्सक ने मास्क पहना भी हुआ था, तो उसने मुंह को सही तरीके से कवर नहीं किया हुआ था। इसके साथ ही सर पर लगाया जाने वाला कवर भी सिविल अस्पताल के किसी भी चिकित्सक ने नहीं लगा रखा था। स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार चिकित्सक को संक्रमण से बचने के लिए मरीजों की जांच करते समय मास्क और सिर का कवर पहनना अनिवार्य है।
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25 पेज की है गाइड लाइन
स्वाइन फ्लू को रोकने और इसके मरीजों का इलाज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों को 25 पेज की गाइड लाइन बुक दी हुई है। इसमें स्वाइन फ्लू के मरीज की पहचान, उसके इलाज, बचाव के तरीके, आइसोलेशन वार्ड में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया है। इसके बाद भी सिविल अस्पताल के चिकित्सक इन गाइड लाइन को नहीं अपना रहे।
हवा से ही फैल जाता है संक्रमण
जनरल फिजीशियन डॉ. कमल यादव ने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस बहुत ही तेजी से फैल जाता है। चिकित्सकों के अनुसार छींकने, खांसने, थूकने से स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से हवा में फैलता है और वह अपने आसपास के लोगों को जल्द ही चपेट में ले लेता है। ऐसे में सावधानी बरतना बहुत ही जरूरी है।
मरीज भी एकसाथ दिखा रहे
स्वाइन फ्लू या अन्य किसी फ्लू का प्रकोप होने पर स्वास्थ्य विभाग गाइड लाइन देता है कि इसके लिए मरीजों को एक साथ एकत्र न होने दें। मरीजों की जांच करते समय लाइन से एक-एक कर उनको आने दिया जाए, मगर यहां के सिविल अस्पताल में एक-एक करने की बजाए मरीज एक साथ ही चिकित्सक के पास आकर घेरा बनाए रहते हैं। इससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
तीन स्टेज में होता है स्वाइन फ्लू
चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू तीन स्टेजों में होता है। प्रथम स्टेज में खांसी जुकाम, कफ बनना व बुखार की शिकायत रहती है। इसके बाद छाती में दर्द व अन्य शिकायतें ज्यादा हो जाती हैं। पहले व दूसरे स्टेज में इलाज किया जा सकता है, मगर तृतीय स्टेज में गले व नाक से खून आने पर मरीज के इलाज करने में दिक्कत आ जाती है।
दिल्ली व चंडीगढ़ ही होती है जांच
तीसरी स्टेज के मरीज की जांच केवल दिल्ली एम्स और चंडीगढ़ पीजीआई में हो सकती है। चिकित्सक पीड़ित मरीज का सैंपल लेकर दिल्ली और चंडीगढ़ जांच के लिए भेजते हैं। वहां पर जांच होने के बाद ही कंफर्म होता है कि मरीज को स्वाइन फ्लू है या नहीं।
अभी तक नहीं हुई किसी की पुष्टि
जिले के गांव नसीबपुर की एक महिला स्वाइन फ्लू की संदिग्ध मरीज के रूप में सामने आ चुकी हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग ने जिले में अभी तक किसी भी मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की है। इस महिला का इलाज कई दिनों से गुरुग्राम के एक अस्पताल में चल रहा है।
बनाया गया है आइसोलेशन वार्ड
स्वाइन फ्लू के मरीज के लिए यहां के सामान्य अस्पताल में इमरजेंसी के ऊपर दूसरी मंजिल पर आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज रखने का प्रावधान है। इस वार्ड के लिए अलग से स्टाफ और चिकित्सक की नियुक्ति भी की गई है। यहां आठ बेड की भी अलग से व्यवस्था है।
स्वाइन फ्लू को देखते हुए सभी प्रकार की सावधानियां बरती जा रही हैं। अभी जिले में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज नहीं आया है। फिर भी ऐतिहात के तौर पर सभी इंतजाम कर लिए गए हैं।
-डॉ. राजेश कुमार, कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल, नारनौल
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। पूरा देश स्वाइन फ्लू की चपेट में है। आए दिन कहीं न कहीं से स्वाइन फ्लू से मौत की सूचना आ रही हैं। महेंद्रगढ़ में भी नसीबपुर गांव में स्वाइन फ्लू का एक संदिग्ध मामला सामने आ चुका है। प्रदेश के नजदीकी जिले भिवानी और रेवाड़ी में भी स्वाइन फ्लू के केस मिल चुके हैं। पड़ोसी राज्य राजस्थान के झुंझुनूं और जयपुर में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। इसके बावजूद नागरिक अस्पताल के चिकित्सक इस मामले में लापरवाही बरत रहे हैं। उनकी ये लापरवाही लोगों की जान के लिए घातक हो सकती है। नागरिक अस्पताल में जब अमर उजाला की टीम पहुंची तो चिकित्सक बिना किसी अतिरिक्त सावधानी के मरीजों की जांच कर रहे थे।
प्रदेश और देश में स्वाइन फ्लू तेजी से फैल रहा है। स्वाइन फ्लू का वायरस बड़ी ही तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। इसका वायरस हवा से ही दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर देता है। ये बात चिकित्सक भी जानते हैं। इसके बाद भी नागरिक अस्पताल में इस संबंध में कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे। सिविल अस्पताल के चिकित्सक यहां आने वाले मरीजों की जांच सामान्य रूप से ही कर रहे हैं। ऐसे में अगर यदि कोई स्वाइन फ्लू पीड़ित अस्पताल में आ जाता है तो चिकित्सक के साथ ही अन्य लोगों की भी संक्रामक बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
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नहीं पहनते मास्क, सिर पर नहीं है कवर
सिविल अस्पताल में जब टीम पहुंची तो कोई भी चिकित्सक मास्क पहने हुए नहीं मिला। किसी चिकित्सक ने मास्क पहना भी हुआ था, तो उसने मुंह को सही तरीके से कवर नहीं किया हुआ था। इसके साथ ही सर पर लगाया जाने वाला कवर भी सिविल अस्पताल के किसी भी चिकित्सक ने नहीं लगा रखा था। स्वास्थ्य विभाग की गाइड लाइन के अनुसार चिकित्सक को संक्रमण से बचने के लिए मरीजों की जांच करते समय मास्क और सिर का कवर पहनना अनिवार्य है।
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25 पेज की है गाइड लाइन
स्वाइन फ्लू को रोकने और इसके मरीजों का इलाज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला अस्पतालों को 25 पेज की गाइड लाइन बुक दी हुई है। इसमें स्वाइन फ्लू के मरीज की पहचान, उसके इलाज, बचाव के तरीके, आइसोलेशन वार्ड में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया गया है। इसके बाद भी सिविल अस्पताल के चिकित्सक इन गाइड लाइन को नहीं अपना रहे।
हवा से ही फैल जाता है संक्रमण
जनरल फिजीशियन डॉ. कमल यादव ने बताया कि स्वाइन फ्लू का वायरस बहुत ही तेजी से फैल जाता है। चिकित्सकों के अनुसार छींकने, खांसने, थूकने से स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से हवा में फैलता है और वह अपने आसपास के लोगों को जल्द ही चपेट में ले लेता है। ऐसे में सावधानी बरतना बहुत ही जरूरी है।
मरीज भी एकसाथ दिखा रहे
स्वाइन फ्लू या अन्य किसी फ्लू का प्रकोप होने पर स्वास्थ्य विभाग गाइड लाइन देता है कि इसके लिए मरीजों को एक साथ एकत्र न होने दें। मरीजों की जांच करते समय लाइन से एक-एक कर उनको आने दिया जाए, मगर यहां के सिविल अस्पताल में एक-एक करने की बजाए मरीज एक साथ ही चिकित्सक के पास आकर घेरा बनाए रहते हैं। इससे संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
तीन स्टेज में होता है स्वाइन फ्लू
चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू तीन स्टेजों में होता है। प्रथम स्टेज में खांसी जुकाम, कफ बनना व बुखार की शिकायत रहती है। इसके बाद छाती में दर्द व अन्य शिकायतें ज्यादा हो जाती हैं। पहले व दूसरे स्टेज में इलाज किया जा सकता है, मगर तृतीय स्टेज में गले व नाक से खून आने पर मरीज के इलाज करने में दिक्कत आ जाती है।
दिल्ली व चंडीगढ़ ही होती है जांच
तीसरी स्टेज के मरीज की जांच केवल दिल्ली एम्स और चंडीगढ़ पीजीआई में हो सकती है। चिकित्सक पीड़ित मरीज का सैंपल लेकर दिल्ली और चंडीगढ़ जांच के लिए भेजते हैं। वहां पर जांच होने के बाद ही कंफर्म होता है कि मरीज को स्वाइन फ्लू है या नहीं।
अभी तक नहीं हुई किसी की पुष्टि
जिले के गांव नसीबपुर की एक महिला स्वाइन फ्लू की संदिग्ध मरीज के रूप में सामने आ चुकी हैं। मगर स्वास्थ्य विभाग ने जिले में अभी तक किसी भी मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं की है। इस महिला का इलाज कई दिनों से गुरुग्राम के एक अस्पताल में चल रहा है।
बनाया गया है आइसोलेशन वार्ड
स्वाइन फ्लू के मरीज के लिए यहां के सामान्य अस्पताल में इमरजेंसी के ऊपर दूसरी मंजिल पर आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। इसमें स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीज रखने का प्रावधान है। इस वार्ड के लिए अलग से स्टाफ और चिकित्सक की नियुक्ति भी की गई है। यहां आठ बेड की भी अलग से व्यवस्था है।
स्वाइन फ्लू को देखते हुए सभी प्रकार की सावधानियां बरती जा रही हैं। अभी जिले में स्वाइन फ्लू का कोई मरीज नहीं आया है। फिर भी ऐतिहात के तौर पर सभी इंतजाम कर लिए गए हैं।
-डॉ. राजेश कुमार, कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल, नारनौल