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Mahendragarh-Narnaul News: 9 माह में हेपेटाइटिस के 18 रोगी मिले, चल रहा है उपचार

Sun, 28 Jul 2024 12:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sun, 28 Jul 2024 12:08 AM IST
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18 hepatitis patients found in 9 months, treatment is ongoing
फोटो नंबर-16डा. जितेंद्र यादव। फिजि​शियन
नारनौल।
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हेपेटाइटिस रोगी के उपचार के लिए नागरिक अस्पताल नारनौल में सभी तरह की दवाइयां और उपचार सामग्री मौजूद हैं। पिछले 9 महीने में 18 मरीजों का उपचार किया गया है। इनमें 11 मरीज हेपेटाइटिस बी से और 7 मरीज हेपेटाइटिस सी रोग से संक्रमित थे। हेपेटाइटिस रोग का उपचार लंबा चलता है, लेकिन नियमित और समय रहते उचित उपचार द्वारा रोगी को ठीक किया जा सकता है।
ऐसे होती है हेपेटाइटिस की पहचान

काफी समय से पीलिया रहना, बार-बार उल्टी आना व भूख न लगना हेपेटाइटिस के लक्षण हैं। ऐसे में लोगों को अपना इलाज तुरंत शुरू करा देना चाहिए। प्राथमिक जांच में ही चिकित्सक मरीज को हेपेटाइटिस होने की पुष्टि कर देते हैं। इसके बाद मरीजों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। वहां मुफ्त में काला पीलिया की स्थिति व जिनोटाइप टेस्ट कराया जाता है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि के बाद मरीज का उपचार शुरू किया जाता है। मरीज का तीन माह तक उपचार चलता है। लिवर खराब है तो मरीज को छह माह तक दवा लेनी पड़ती है।
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मानसून के दौरान बढ़ जाता है खतरा
हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य हेपेटाइटिस रोग के कारक, लक्षण और उसकी रोकथाम के बारे में लोगों को जागरूक करना है। हेपेटाइटिस लीवर को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली संक्रामक बीमारियों में से एक है। मानसून के दिनों में इसका खतरा और भी बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस की समस्या लीवर में सूजन का कारण बनती है। हेपेटाइटिस के शिकार रोगी का लीवर डेमेज, लिवर फेलियर, सिरोसिस, लीवर कैंसर या मृत्यु का भी खतरा हो सकता है। हेपेटाइटिस रोग ए, बी, सी, डी और ई पांच प्रकार के होते हैं। हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई मुख्य रूप से गंदे पानी और मक्खी-मच्छर संक्रमित खाद्य पदार्थों के सेवन से फैलता है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी संक्रामक तरीके से फैलता है। जैसे इंजेक्शन लगाने में एक ही सिरिंज के इस्तेमाल करने से, बिना जांच के हेपेटाइटिस संक्रमित व्यक्ति के खून को स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाने से, संक्रमित मां से प्रसव के दौरान बच्चों को फैलने का खतरा बना रहता है। हेपेटाइटिस ए, डी और ई सामान्य प्रकार के रोग है। इसका सुचारु रूप से उपचार लेने पर ठीक हो जाता है। हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी खतरनाक श्रेणी में आते हैं। हेपेटाइटिस बी और सी रोग के उपचार में समय लगता है और लीवर का कैंसर होने का खतरा बना रहता है।
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हेपेटाइटिस रोग के उपचार के लिए नागरिक अस्पताल नारनौल में दवाइयों सहित सभी तरह की उपचार सामग्री उपलब्ध है। लोगों को हेपेटाइटिस रोग और इसकी रोकथाम के बारे में जागरूक करने के लिए कई तरह के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। पिछले 9 महीने में आए हेपेटाइटिस बी और सी ज्यादा खतरनाक है, लेकिन नियमित और समय रहते उपचार द्वारा रोगी को ठीक किया जा सकता है।



डॉ. जितेंद्र यादव, फिजिशियन एवं जिला नोडल अधिकारी हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम , नागरिक अस्पताल, नारनौल।
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