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134 ए के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को स्कूल के अन्य बच्चों से बैठाया अलग
Updated Thu, 17 May 2018 11:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
शिक्षा के अधिकार नियम 134ए के तहत दाखिला लेने वाले गरीब बच्चों के साथ निजी स्कूलों में दोगला व्यवहार करने की शिकायतें आ रही हैं। बच्चों व उनके अभिभावकों का कहना है कि इस नियम के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को स्कूल के अन्य बच्चों से अलग बैठाया जा रहा है। निजी स्कूल संचालकों द्वारा किए जा रहे भेदभाव को लेकर वीरवार को अभिभावक एसडीएम जगदीश शर्मा से मिलकर उन्हें एक शिकायत सौंपी।
गरीब व जरूरतमंद कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रह पाए। इसके लिए सरकार ने शिक्षा अधिनियम-134ए कानून बनाया है। इसके तहत कोई भी गरीब व जरूरतमंद विद्यार्थी उस क्षेत्र के किसी भी निजी प्रतिष्ठित स्कूल में निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर सकता है। हालांकि उस विद्यार्थी को दाखिले से पूर्व शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। अगर विद्यार्थी उस परीक्षा में उत्तीर्ण होता है तो विभाग द्वारा उसे उसके मनपसंद स्कूल में निशुल्क दाखिला दिलवाया जाएगा। हालांकि कुछ निजी स्कूलों ने सरकार व विभाग के दबाव के चलते शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत बच्चों के दाखिले तो कर लिए हैं, लेकिन अलग-अलग कक्षाओं के होने के बावजूद भी सभी बच्चों को एक साथ एक ही कक्षा में बैठाकर एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार स्कूल संचालक बच्चों के साथ दोगला व्यवहार कर रहे हैं।
बच्चों के साथ निजी स्कूल संचालकों द्वारा किए जा रहे भेदभाव को लेकर वीरवार को अभिभावकों ने एसडीएम जगदीश शर्मा को एक शिकायत सौंपी। इसके बाद एसडीएम ने उक्त शिकायत को डीईओ के नाम फारवर्ड कर दी। साथ ही डीईओ को फोन के माध्यम से अभिभावकों की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने की निर्देश दिए। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीईओ मुकेश लावणिया ने निजी स्कूलों के प्राचार्यों को अपने कार्यालय में तलब कर उन्हें सभी बच्चों को कक्षावार अन्य बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाने के निर्देश दिए। वहीं डीईओ ने निजी स्कूल संचालकों से नियम-134ए के तहत दाखिले लेने वाले बच्चों की संख्या के हिसाब से फीस का इस्टीमेट बनाकर कार्यालय भिजवाने का आग्रह किया ताकि उन्हें स्वीकृति के लिए आगे भेजा जा सके।
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अभिभावकों ने सौंपी शिकायत
एसडीएम व डीईओ को सौंपी शिकायत में अभिभावक सुरेंद्र, अशोक, सतीश, विजय लक्ष्मी, सरोज, संतलाल, मोहन सिंह, कुलदीप, नरेश व सीमा आदि ने बताया कि निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों को उनकी कक्षा के बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाने की बजाय सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों के साथ दोगला व्यवहार कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके द्वारा स्कूल बसों में आने-जाने का किराया देने के बावजूद भी स्कूल संचालक उनके बच्चों को स्कूल बसों में नहीं बैठा रहे हैं। इससे उनके बच्चों में हीन भावना पैदा होने लगी है और बच्चे डिप्रेशन में भी आने लगे हैं।
शिक्षा मंत्री से भी कर चुके हैं शिकायत
अभिभावकों ने बताया कि इसकी शिकायत 7 मई को शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा से भी की गई थी। शिक्षा मंत्री ने डीईओ को इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन 9 दिन बाद भी निजी स्कूल संचालकों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। इसके चलते वीरवार को उन्हें फिर से अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ी है। अभिभावकों ने एसडीएम व डीईओ से इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए निजी स्कूल संचालकों को नियम-134ए के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को अन्य बच्चों के साथ बैठाकर बिना किसी भेदभाव के पढ़ाने, स्कूल आने-जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने की मांग की है।
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नारनौल।
शिक्षा के अधिकार नियम 134ए के तहत दाखिला लेने वाले गरीब बच्चों के साथ निजी स्कूलों में दोगला व्यवहार करने की शिकायतें आ रही हैं। बच्चों व उनके अभिभावकों का कहना है कि इस नियम के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को स्कूल के अन्य बच्चों से अलग बैठाया जा रहा है। निजी स्कूल संचालकों द्वारा किए जा रहे भेदभाव को लेकर वीरवार को अभिभावक एसडीएम जगदीश शर्मा से मिलकर उन्हें एक शिकायत सौंपी।
गरीब व जरूरतमंद कोई भी विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न रह पाए। इसके लिए सरकार ने शिक्षा अधिनियम-134ए कानून बनाया है। इसके तहत कोई भी गरीब व जरूरतमंद विद्यार्थी उस क्षेत्र के किसी भी निजी प्रतिष्ठित स्कूल में निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर सकता है। हालांकि उस विद्यार्थी को दाखिले से पूर्व शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। अगर विद्यार्थी उस परीक्षा में उत्तीर्ण होता है तो विभाग द्वारा उसे उसके मनपसंद स्कूल में निशुल्क दाखिला दिलवाया जाएगा। हालांकि कुछ निजी स्कूलों ने सरकार व विभाग के दबाव के चलते शिक्षा अधिनियम 134ए के तहत बच्चों के दाखिले तो कर लिए हैं, लेकिन अलग-अलग कक्षाओं के होने के बावजूद भी सभी बच्चों को एक साथ एक ही कक्षा में बैठाकर एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार स्कूल संचालक बच्चों के साथ दोगला व्यवहार कर रहे हैं।
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बच्चों के साथ निजी स्कूल संचालकों द्वारा किए जा रहे भेदभाव को लेकर वीरवार को अभिभावकों ने एसडीएम जगदीश शर्मा को एक शिकायत सौंपी। इसके बाद एसडीएम ने उक्त शिकायत को डीईओ के नाम फारवर्ड कर दी। साथ ही डीईओ को फोन के माध्यम से अभिभावकों की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने की निर्देश दिए। मामले को गंभीरता से लेते हुए डीईओ मुकेश लावणिया ने निजी स्कूलों के प्राचार्यों को अपने कार्यालय में तलब कर उन्हें सभी बच्चों को कक्षावार अन्य बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाने के निर्देश दिए। वहीं डीईओ ने निजी स्कूल संचालकों से नियम-134ए के तहत दाखिले लेने वाले बच्चों की संख्या के हिसाब से फीस का इस्टीमेट बनाकर कार्यालय भिजवाने का आग्रह किया ताकि उन्हें स्वीकृति के लिए आगे भेजा जा सके।
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अभिभावकों ने सौंपी शिकायत
एसडीएम व डीईओ को सौंपी शिकायत में अभिभावक सुरेंद्र, अशोक, सतीश, विजय लक्ष्मी, सरोज, संतलाल, मोहन सिंह, कुलदीप, नरेश व सीमा आदि ने बताया कि निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों को उनकी कक्षा के बच्चों के साथ बैठाकर पढ़ाने की बजाय सभी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार निजी स्कूल संचालक उनके बच्चों के साथ दोगला व्यवहार कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके द्वारा स्कूल बसों में आने-जाने का किराया देने के बावजूद भी स्कूल संचालक उनके बच्चों को स्कूल बसों में नहीं बैठा रहे हैं। इससे उनके बच्चों में हीन भावना पैदा होने लगी है और बच्चे डिप्रेशन में भी आने लगे हैं।
शिक्षा मंत्री से भी कर चुके हैं शिकायत
अभिभावकों ने बताया कि इसकी शिकायत 7 मई को शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा से भी की गई थी। शिक्षा मंत्री ने डीईओ को इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन 9 दिन बाद भी निजी स्कूल संचालकों के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया है। इसके चलते वीरवार को उन्हें फिर से अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ी है। अभिभावकों ने एसडीएम व डीईओ से इस मामले में उचित कार्रवाई करते हुए निजी स्कूल संचालकों को नियम-134ए के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों को अन्य बच्चों के साथ बैठाकर बिना किसी भेदभाव के पढ़ाने, स्कूल आने-जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करने की मांग की है।