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सर्दियां शुरू, प्रशासन नहीं ले रहा रैन बसेरों की सुध
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:39 PM IST
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सर्दियां शुरू, प्रशासन नहीं ले रहा रैन बसेरों की सुध
-शहर में बने दोनों रैन बसेरों के लटके हैं ताले
-40 लाख रुपये की लागत से शहर में बने दो रैन बसेरे
फोटो नंबर एक से पांच
राजकुमार प्रजापत
नारनौल। सर्दियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। रात का तापमान भी 14 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में रात के समय बेसहारा व जरूरतमंद लोगों को सोने के लिए छत की आवश्यकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर में दिसंबर 2015 में 40 लाख रुपये की लागत से बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के बाहर रैन बसेरों का निर्माण करवाया। इन रैन बसेरों में कुछ दिन तो चहल-पहल रही, मगर कुछ दिन बाद ही बंद हो गए। परंतु अब सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। पिछले तीन-चार दिनों से रात का तापमान 13 से 14 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए ये रैन बसेरे खोल देने चाहिए। मगर प्रशासन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। इस कारण ये दोनों रैन बसेरे बंद पड़े हैं।
सर्दियों के मौसम के अलावा अन्य मौसम में जरूरतमंद व बेसहारा लोगों को सोने के लिए एक छत नसीब हो इस बात को ध्यान रखते हुए प्रशासन ने दिसंबर 2015 में शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के बाहर 20-20 लाख रुपयों की लागत से दो रैन बसेरों का निर्माण करवाया था। निर्माण के समय ये रैन बसेरे आधुनिक तरीके से बनाए गए थे। इसमें जरूरतमंद लोगों के लिए सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध थीं। बिस्तर आदि का इंतजाम नगर परिषद ने किया था। इन रैन बसेरों में कुछ दिन तो लोगों के लिए खुला रखा गया, मगर जैसे-जैसे सर्दी कम होती गई, इन्हें बंद कर दिया गया। तब से लेकर अब तक ये रैन बसेरे बंद ही पड़े हैं। इस कारण जरूरतमंद अपनी रात यहां-वहां सड़कों, बस अड्डों या रेलवे स्टेशन पर बिता रहे हैं। अब फिर से सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है तो जरूरतमंद लोगों को इनकी याद आने लगी है।
आधुनिक सुविधा है इन रैन बसेरों में
शहर में बस स्टेंड व अस्पताल के पास बने इन दोनों रैन बसेरों में आधुनिक सुविधाएं हैं। चारों तरफ से टाइल व सिलिंग से इनको कवर्ड किया है। इसमें पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। वहीं बिस्तर आदि की सुविधा भी यहीं है। साथ ही शौचालय की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन दोनों रैन बसेरों में करीब 100 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। दोनों में बिस्तर फर्श पर लगाए गए हैं। इनमें अलग-अलग रूम में करीब 100 लोग ठहर सकते हैं।
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तीन-चार दिनों से पड़ रही ठंड
पिछले चार-पांच दिनों से क्षेत्र में ठंड भी पड़ने लगी है। रात का तापमान 14 से 13 डिग्री तक पहुंच गया है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए ये रैन बसेरे बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। प्रशासन इनकी सुध लेकर इनको खोल दे तो कई लोग रात के समय इनमें विश्राम कर सकते हैं।
एक पर ताला व तो दूसरा भी बंद
जरूरतमंद व बेसहारा लोगों के लिए शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास दो रैन बसेरे बनाए गए है, लेकिन बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा में जाकर देखा तो वह अंदर से बंद था। जब रैन बसेरे के नीचे बने सुलभ शौचालय के कर्मचारी से पूछा गया तो उसने बताया कि रैन बसेरे का कर्मचारी अंदर ही है। अर्थात कर्मचारी रैन बसेरे में कुंडी लगाकर सोया हुआ था। जबकि अस्पताल के नजदीक स्थित रैन बसेरे पर ताला लटका हुआ मिला। ऐसे में जरूरतमंद व बेसहारा लोग इस सर्दी में खुले में सोने को मजबूर है।
जरूरतमंद व बेसहारा लोगों के लिए बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास दो रैन बसेरे चल रहे हैं। दोनों रैन बसेरों की साफ-सफाई करवा उन्हें जल्द ही खुलवा दिया जाएगा। बस स्टैंड के पास बना रैन बसेरा खुला है।
-अभय सिंह यादव, ईओ, नगर परिषद नारनौल।
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-शहर में बने दोनों रैन बसेरों के लटके हैं ताले
-40 लाख रुपये की लागत से शहर में बने दो रैन बसेरे
फोटो नंबर एक से पांच
राजकुमार प्रजापत
नारनौल। सर्दियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। रात का तापमान भी 14 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में रात के समय बेसहारा व जरूरतमंद लोगों को सोने के लिए छत की आवश्यकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर में दिसंबर 2015 में 40 लाख रुपये की लागत से बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के बाहर रैन बसेरों का निर्माण करवाया। इन रैन बसेरों में कुछ दिन तो चहल-पहल रही, मगर कुछ दिन बाद ही बंद हो गए। परंतु अब सर्दियों की शुरुआत हो चुकी है। पिछले तीन-चार दिनों से रात का तापमान 13 से 14 डिग्री सेल्सियस के बीच चल रहा है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए ये रैन बसेरे खोल देने चाहिए। मगर प्रशासन इनकी कोई सुध नहीं ले रहा है। इस कारण ये दोनों रैन बसेरे बंद पड़े हैं।
सर्दियों के मौसम के अलावा अन्य मौसम में जरूरतमंद व बेसहारा लोगों को सोने के लिए एक छत नसीब हो इस बात को ध्यान रखते हुए प्रशासन ने दिसंबर 2015 में शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के बाहर 20-20 लाख रुपयों की लागत से दो रैन बसेरों का निर्माण करवाया था। निर्माण के समय ये रैन बसेरे आधुनिक तरीके से बनाए गए थे। इसमें जरूरतमंद लोगों के लिए सभी प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध थीं। बिस्तर आदि का इंतजाम नगर परिषद ने किया था। इन रैन बसेरों में कुछ दिन तो लोगों के लिए खुला रखा गया, मगर जैसे-जैसे सर्दी कम होती गई, इन्हें बंद कर दिया गया। तब से लेकर अब तक ये रैन बसेरे बंद ही पड़े हैं। इस कारण जरूरतमंद अपनी रात यहां-वहां सड़कों, बस अड्डों या रेलवे स्टेशन पर बिता रहे हैं। अब फिर से सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है तो जरूरतमंद लोगों को इनकी याद आने लगी है।
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आधुनिक सुविधा है इन रैन बसेरों में
शहर में बस स्टेंड व अस्पताल के पास बने इन दोनों रैन बसेरों में आधुनिक सुविधाएं हैं। चारों तरफ से टाइल व सिलिंग से इनको कवर्ड किया है। इसमें पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था है। वहीं बिस्तर आदि की सुविधा भी यहीं है। साथ ही शौचालय की सुविधा भी प्रदान की गई है। इन दोनों रैन बसेरों में करीब 100 लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। दोनों में बिस्तर फर्श पर लगाए गए हैं। इनमें अलग-अलग रूम में करीब 100 लोग ठहर सकते हैं।
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तीन-चार दिनों से पड़ रही ठंड
पिछले चार-पांच दिनों से क्षेत्र में ठंड भी पड़ने लगी है। रात का तापमान 14 से 13 डिग्री तक पहुंच गया है। ऐसे में जरूरतमंद लोगों के लिए ये रैन बसेरे बहुत ही लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। प्रशासन इनकी सुध लेकर इनको खोल दे तो कई लोग रात के समय इनमें विश्राम कर सकते हैं।
एक पर ताला व तो दूसरा भी बंद
जरूरतमंद व बेसहारा लोगों के लिए शहर के बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास दो रैन बसेरे बनाए गए है, लेकिन बस स्टैंड स्थित रैन बसेरा में जाकर देखा तो वह अंदर से बंद था। जब रैन बसेरे के नीचे बने सुलभ शौचालय के कर्मचारी से पूछा गया तो उसने बताया कि रैन बसेरे का कर्मचारी अंदर ही है। अर्थात कर्मचारी रैन बसेरे में कुंडी लगाकर सोया हुआ था। जबकि अस्पताल के नजदीक स्थित रैन बसेरे पर ताला लटका हुआ मिला। ऐसे में जरूरतमंद व बेसहारा लोग इस सर्दी में खुले में सोने को मजबूर है।
जरूरतमंद व बेसहारा लोगों के लिए बस स्टैंड व नागरिक अस्पताल के पास दो रैन बसेरे चल रहे हैं। दोनों रैन बसेरों की साफ-सफाई करवा उन्हें जल्द ही खुलवा दिया जाएगा। बस स्टैंड के पास बना रैन बसेरा खुला है।
-अभय सिंह यादव, ईओ, नगर परिषद नारनौल।