{"_id":"5abe9a814f1c1bf4618b494b","slug":"161522440833-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"घोषणा के 10 दिन बाद तक नहीं हुई सरसों की खरीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घोषणा के 10 दिन बाद तक नहीं हुई सरसों की खरीद
Updated Sat, 31 Mar 2018 01:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
घोषणा के बाद तक नहीं हुई सरसों की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी अटेली। कांग्रेस के प्रदेश संगठन सचिव सुरेंद्र पटवा ने सरकार से मांग की है कि किसानों की सरसों की सरकारी खरीद को सुचारु रूप से किया जाए। किसान हितैषी होने का ठोंग पीटने वाली भाजपा सरकार में लोग अपना अनाज भी नहीं बेच पा रहे है। कृषि मंत्री सरसों 19 मार्च से खरीदने की बात करते हैं। खरीद समय के दस दिन बाद भी मंडी से एक भी ढेरी नहीं खरीदी जा रही है। किसान को फर्द समय पर नहीं मिल रही है और गिरदावरी के लिए पटवारियों के चक्कर लगा रहे है।
एक बयान में पटवा ने बताया कि किसानों को अपनी सरसों सरकारी रेट पर बेचने पर अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की तरफ से अनेकों नाजायज शर्तें थोपी जा रही है। इस झंझट के चलते किसान अपनी फसल मंडी के आढ़तियों को औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। सरकार ने अभी तक सुचारु रूप से मंडी में सरकारी खरीद शुरू नहीं की है। इतना ही नहीं सरकार ने एक किसान से 25 क्विंटल से अधिक सरसों खरीदने से इनकार कर रही है। ऐसा कर किसानों का अपमान किया जा रहा है। किसी किसान के पास 30 क्विंटल सरसों है तो पांच क्विंटल सरसों उनको अपने पास ही रखनी पड़ेगी।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी अटेली। कांग्रेस के प्रदेश संगठन सचिव सुरेंद्र पटवा ने सरकार से मांग की है कि किसानों की सरसों की सरकारी खरीद को सुचारु रूप से किया जाए। किसान हितैषी होने का ठोंग पीटने वाली भाजपा सरकार में लोग अपना अनाज भी नहीं बेच पा रहे है। कृषि मंत्री सरसों 19 मार्च से खरीदने की बात करते हैं। खरीद समय के दस दिन बाद भी मंडी से एक भी ढेरी नहीं खरीदी जा रही है। किसान को फर्द समय पर नहीं मिल रही है और गिरदावरी के लिए पटवारियों के चक्कर लगा रहे है।
एक बयान में पटवा ने बताया कि किसानों को अपनी सरसों सरकारी रेट पर बेचने पर अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की तरफ से अनेकों नाजायज शर्तें थोपी जा रही है। इस झंझट के चलते किसान अपनी फसल मंडी के आढ़तियों को औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है। सरकार ने अभी तक सुचारु रूप से मंडी में सरकारी खरीद शुरू नहीं की है। इतना ही नहीं सरकार ने एक किसान से 25 क्विंटल से अधिक सरसों खरीदने से इनकार कर रही है। ऐसा कर किसानों का अपमान किया जा रहा है। किसी किसान के पास 30 क्विंटल सरसों है तो पांच क्विंटल सरसों उनको अपने पास ही रखनी पड़ेगी।
विज्ञापन