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नशाखोरी से उत्पन्न होते हैं मानसिक विकार: सुरेंद्र
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:59 PM IST
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नांगल चौधरी। पर्यावरणविद सुरेंद्र कमानियां ने नांगल पीपा, खातोली, धोलेड़ा व मेघोत हाला में शनिवार को युवा जागरूकता सम्मेलन किया। जिसमें नशाखोरी रोकने तथा पौधरोपण के लिए जागरूक किया गया।
उन्होंने कहा कि सामाजिक विकास में नशा सबसे बड़ी रुकावट है। जिसका क्रेज युवाओं में तेजी से बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश युवा एक-दूसरे की देखादेखी शराब या धूम्रपान करना शुरू करते हैं। इसके बाद उन्हें नशे की लत हो जाती है। जिसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव फेफड़े, गला व नेत्रों पर पड़ेगा। पीड़ित का स्वभाव चिड़चिड़ा तथा क्रोधित हो जाता है। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ना असंभव नहीं है। इसके लिए संकल्प लेना पड़ेगा। शुरूआत में धूम्रपान व शराब पीने की ललक पैदा होती है, लेकिन एक-दो महीने बाद आदत सामान्य हो जाती है। इस मौके पर रविंद्र कुमार, अशोक यादव, महेश कुमार, दयाराम व विकास आदि मौजूद थे।
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उन्होंने कहा कि सामाजिक विकास में नशा सबसे बड़ी रुकावट है। जिसका क्रेज युवाओं में तेजी से बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश युवा एक-दूसरे की देखादेखी शराब या धूम्रपान करना शुरू करते हैं। इसके बाद उन्हें नशे की लत हो जाती है। जिसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव फेफड़े, गला व नेत्रों पर पड़ेगा। पीड़ित का स्वभाव चिड़चिड़ा तथा क्रोधित हो जाता है। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ना असंभव नहीं है। इसके लिए संकल्प लेना पड़ेगा। शुरूआत में धूम्रपान व शराब पीने की ललक पैदा होती है, लेकिन एक-दो महीने बाद आदत सामान्य हो जाती है। इस मौके पर रविंद्र कुमार, अशोक यादव, महेश कुमार, दयाराम व विकास आदि मौजूद थे।
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