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124 करोड़ से 25गांव, 9 ढाणियों के 75 हजार लोगों को मिलेगा नहरी पानी
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़।जिले के करीब 75 हजार लोगों को नहरी पानी की आपूर्ति देने के लिए 124 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट 2020 में पूरा हो जाएगा। यह स्काडा प्रोजेक्ट होगा। जिसमें सभी आधुनिक तकनीकों का उपयोग होगा। सीएम मनोहरलाल ने जनवरी में इसका शिलान्यास किया था। जिस पर काम शुरू हो गया है। यह प्रोजेक्ट अगले तीस साल की आबादी का अनुमान लगाकर तैयार किया गया है। वर्ष 2048 तक इन एरिया में पानी की समस्या नहीं आएगी।
जिले के 25 गांव, 9 ढाणी और एक कस्बे में नहरी पानी की आपूर्ति के लिए कैनाल बेस्ट वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। इस प्रोजेक्ट में स्काडा तकनीक को अपनाया जाएगा। पानी आपूर्ति में कहीं पर बाधा आई तो अधिकारियों को उनके कंप्यूटर पर ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। इसके लिए पेयजल आपूर्ति लाइन में जगह जगह पर सेंसर लगाए जाएंगे। पानी आपूर्ति बंद होते ही सेंसर के माध्यम से कंप्यूटर सिस्टम में अलर्ट का मैसेज पहुंच जाएगा। राजाबास तक रॉ यानी नहरी वाटर लाया जाएगा। राजावास में वाटर स्टोरेज टैंक बनेंगे। जिनमें पानी को एकत्र किया जाएगा। यहां पानी साफ करने के लिए फिल्टर टैंक भी होगा। पानी को साफ करने बाद पेयजल लाइनों के जरिए गांवों तक पहुंचाया जाएगा। जिसके लिए गांव राजाबास में करीब 25 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट में 18 हजार 2500 मीटर लंबी लाइन डाली जाएगी। पूरे एरिया में पानी की लाइन आरसीसी बॉक्स टाइप होगी, जिसमें कचरा, गंदगी गिरने की संभावना नहीं होगी। पानी चोरी होने के आसार भी कम होंगे।
इन गांवों को मिलेगा फायदा
जेरपुर, राजाबास, ढाणी राजाबास ,उष्मापुर, मांडोला, नांगलमाला, बलाना, राठीवास, देवराली, माधोगढ़, डालनवास, गादड़वास, बारड़ा, डिगरोता, नायन, ढाणी बीरसिंह का बास, ढाणी मंडियाली, सुरहेती जाखल, सुरहेती पिलानिया, सुरहेती मारवानिया, ढाणा, जड़वा, ढाणी जड़वा, श्यामपुरा, बासरी, सोहरी, ढाणी भालोठिया, ढाणी कुम्हारान, पाथेडवा, जवाहर नगर, ढाणी ब्राह्मणों की, नानगला, बास, सतनाली।
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30 साल के हिसाब से बनाया प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 2011 की आबादी को आधार बनाया गया है, जिसमें इन गांवों की आबादी 55898 थी। वर्ष 2018 में यह 63722 तक पहुंच गई है। वर्ष 2048 में यह आबादी 95950 तक पहुंचने का अनुमान है। पहले चरण में इन गांवों को 70 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से पानी की आपूर्ति दी जाएगी। बाद में यह 155 लीटर प्रति दिन प्रति व्यक्ति तक बढ़ाई जा सकती है। इस सिस्टम को अगले 30 साल की आबादी के हिसाब से डिजाइन कर उतनी क्षमता में तैयार किया जा रहा है।
सतनाली में 155 लीटर के हिसाब से मिलेगा पानी
सतनाली को भी इस प्रोजेक्ट में लिया गया है। जिसकी इस समय आबादी 11415 है। सतनाली को शहरी एरिया में शामिल करते हुए यहां पहले चरण में ही 155 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से पानी की आपूर्ति दी जाएगी।
स्टोरेज की क्षमता जानिए
गांव राजाबास में 8.5 एमएलडी क्षमता का वाटर टैंक बनाया जाएगा। यहां पहला स्टोरेज टैंक यहां दूसरा टैंक 161 मीटर लंबा, 161 मीटर चौड़ा, 4.90 मीटर गहरा होगा। जिसमें 25 करोड़ लीटर पानी की क्षमता होगी। 45 मीटर लंबा, तीस मीटर चौड़ा और चार फीट गहरा होगा। जिसकी क्षमता 54 लाख लीटर होगी। क्लीयर वाटर टैंक 36 मीटर चौड़ा, 24 मीटर लंबा, 2.4 मीटर गहराई वाला रहेगा।
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महेंद्रगढ़।जिले के करीब 75 हजार लोगों को नहरी पानी की आपूर्ति देने के लिए 124 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट 2020 में पूरा हो जाएगा। यह स्काडा प्रोजेक्ट होगा। जिसमें सभी आधुनिक तकनीकों का उपयोग होगा। सीएम मनोहरलाल ने जनवरी में इसका शिलान्यास किया था। जिस पर काम शुरू हो गया है। यह प्रोजेक्ट अगले तीस साल की आबादी का अनुमान लगाकर तैयार किया गया है। वर्ष 2048 तक इन एरिया में पानी की समस्या नहीं आएगी।
जिले के 25 गांव, 9 ढाणी और एक कस्बे में नहरी पानी की आपूर्ति के लिए कैनाल बेस्ट वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। इस प्रोजेक्ट में स्काडा तकनीक को अपनाया जाएगा। पानी आपूर्ति में कहीं पर बाधा आई तो अधिकारियों को उनके कंप्यूटर पर ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। इसके लिए पेयजल आपूर्ति लाइन में जगह जगह पर सेंसर लगाए जाएंगे। पानी आपूर्ति बंद होते ही सेंसर के माध्यम से कंप्यूटर सिस्टम में अलर्ट का मैसेज पहुंच जाएगा। राजाबास तक रॉ यानी नहरी वाटर लाया जाएगा। राजावास में वाटर स्टोरेज टैंक बनेंगे। जिनमें पानी को एकत्र किया जाएगा। यहां पानी साफ करने के लिए फिल्टर टैंक भी होगा। पानी को साफ करने बाद पेयजल लाइनों के जरिए गांवों तक पहुंचाया जाएगा। जिसके लिए गांव राजाबास में करीब 25 एकड़ जमीन की जरूरत पड़ेगी। इस प्रोजेक्ट में 18 हजार 2500 मीटर लंबी लाइन डाली जाएगी। पूरे एरिया में पानी की लाइन आरसीसी बॉक्स टाइप होगी, जिसमें कचरा, गंदगी गिरने की संभावना नहीं होगी। पानी चोरी होने के आसार भी कम होंगे।
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इन गांवों को मिलेगा फायदा
जेरपुर, राजाबास, ढाणी राजाबास ,उष्मापुर, मांडोला, नांगलमाला, बलाना, राठीवास, देवराली, माधोगढ़, डालनवास, गादड़वास, बारड़ा, डिगरोता, नायन, ढाणी बीरसिंह का बास, ढाणी मंडियाली, सुरहेती जाखल, सुरहेती पिलानिया, सुरहेती मारवानिया, ढाणा, जड़वा, ढाणी जड़वा, श्यामपुरा, बासरी, सोहरी, ढाणी भालोठिया, ढाणी कुम्हारान, पाथेडवा, जवाहर नगर, ढाणी ब्राह्मणों की, नानगला, बास, सतनाली।
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30 साल के हिसाब से बनाया प्रोजेक्ट
इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 2011 की आबादी को आधार बनाया गया है, जिसमें इन गांवों की आबादी 55898 थी। वर्ष 2018 में यह 63722 तक पहुंच गई है। वर्ष 2048 में यह आबादी 95950 तक पहुंचने का अनुमान है। पहले चरण में इन गांवों को 70 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से पानी की आपूर्ति दी जाएगी। बाद में यह 155 लीटर प्रति दिन प्रति व्यक्ति तक बढ़ाई जा सकती है। इस सिस्टम को अगले 30 साल की आबादी के हिसाब से डिजाइन कर उतनी क्षमता में तैयार किया जा रहा है।
सतनाली में 155 लीटर के हिसाब से मिलेगा पानी
सतनाली को भी इस प्रोजेक्ट में लिया गया है। जिसकी इस समय आबादी 11415 है। सतनाली को शहरी एरिया में शामिल करते हुए यहां पहले चरण में ही 155 लीटर प्रति व्यक्ति प्रति दिन के हिसाब से पानी की आपूर्ति दी जाएगी।
स्टोरेज की क्षमता जानिए
गांव राजाबास में 8.5 एमएलडी क्षमता का वाटर टैंक बनाया जाएगा। यहां पहला स्टोरेज टैंक यहां दूसरा टैंक 161 मीटर लंबा, 161 मीटर चौड़ा, 4.90 मीटर गहरा होगा। जिसमें 25 करोड़ लीटर पानी की क्षमता होगी। 45 मीटर लंबा, तीस मीटर चौड़ा और चार फीट गहरा होगा। जिसकी क्षमता 54 लाख लीटर होगी। क्लीयर वाटर टैंक 36 मीटर चौड़ा, 24 मीटर लंबा, 2.4 मीटर गहराई वाला रहेगा।