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पापाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार बढ़ा हुआ है : विज्ञानानंद
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:41 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति महेंद्रगढ़ के तत्वाधान में बाबा जयरामदास धर्मशाला में चल रही भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने प्रवचन दिए। महामंडलेश्वर ने कहा कि महाभारत सिखलाती है रहना कैसे है। रामायण सिखलाती है जीना कैसे है। गीता सिखलाती है करना कैसे है और भागवत सिखलाती है मरना कैसे है। मरने वाले को तीन कार्य करने चाहिए। ठाकुरजी का मुख में नाम हो, हृदय में ध्यान हो तथा हाथ में उनका काम हो। आज अर्थ प्रधान युग में पापाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार बढ़ा हुआ है। तमोगुण बढ़ता है तो विनाश होता है। जो बढ़ता है वह घटता भी है। जो घटता है वह बढ़ता है। यह एक क्रम है। उन्होंने कहा कि हमें प्रेम देना चाहिए, ज्ञान देना चाहिए, भूले भटकों का मार्गदर्शन करना चाहिए, धर्माचरण करना चाहिए। इस अवसर पवन नांगलिया, समिति के प्रधान श्रीकिशन मस्ताना, अरविंद खेतान, दीपक महता, अनिल, सुनील, कृष्ण सोनी, शिवचरण, सत्यनारायण आदि उपस्थित थे।
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महेंद्रगढ़। श्री गीता विज्ञान प्रचार समिति महेंद्रगढ़ के तत्वाधान में बाबा जयरामदास धर्मशाला में चल रही भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती ने प्रवचन दिए। महामंडलेश्वर ने कहा कि महाभारत सिखलाती है रहना कैसे है। रामायण सिखलाती है जीना कैसे है। गीता सिखलाती है करना कैसे है और भागवत सिखलाती है मरना कैसे है। मरने वाले को तीन कार्य करने चाहिए। ठाकुरजी का मुख में नाम हो, हृदय में ध्यान हो तथा हाथ में उनका काम हो। आज अर्थ प्रधान युग में पापाचार, दुराचार, भ्रष्टाचार बढ़ा हुआ है। तमोगुण बढ़ता है तो विनाश होता है। जो बढ़ता है वह घटता भी है। जो घटता है वह बढ़ता है। यह एक क्रम है। उन्होंने कहा कि हमें प्रेम देना चाहिए, ज्ञान देना चाहिए, भूले भटकों का मार्गदर्शन करना चाहिए, धर्माचरण करना चाहिए। इस अवसर पवन नांगलिया, समिति के प्रधान श्रीकिशन मस्ताना, अरविंद खेतान, दीपक महता, अनिल, सुनील, कृष्ण सोनी, शिवचरण, सत्यनारायण आदि उपस्थित थे।