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चार लाख की लागत से लगाए दो रिचार्ज बोर फेल, तीन साल से प्रशासन ने नहीं ली सुध
Updated Wed, 04 Jul 2018 12:17 AM IST
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चार लाख की लागत से लगाए दो रिचार्ज बोर फेल, तीन साल से प्रशासन ने नहीं ली सुध
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। भूजल का स्तर सुधारने के लिए करीब तीन साल पहले चार लाख की लागत से दो जगह लगाए गए रिचार्ज बोर देखरेख के अभाव में नकारा साबित हो गए हैं। सैन चौक व पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास लगे रिचार्ज बोर में मिट्टी जमा होने से बंद हो गए हैं। जिसकी वजह से पानी जमीन के अंदर नहीं जा रहा है और सड़कों और गलियों में जमा होने से लोगों को परेशानी हो रही। वहीं, जिले का भूजल स्तर 1500 फुट से भी नीचे चला गया है। जिसके कारण पूरा जिला डार्क जोन घोषित हो चुका है। ऐसे में बारिश के पानी बचाने की बहुत आवश्यकता है। बारिश के मौसम में अनेक जगहों पर पानी जमा हो जाता है, जो बाद में नालियों में व्यर्थ बह जाता है।
उल्लेखनीय है कि नांगल चौधरी क्षेत्र में तो पानी 1500 फुट नीचे तक चला गया है। डार्क जोन में आने के कारण यहां पर किसी भी प्रकार से पानी के दोहन पर पाबंदी है। नया ट्यूबवेल लगाने के लिए सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। केवल गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए ही नया ट्यूबवेल लगाया जाता है। इस समय बारिश का पानी शहर व गांवों की गलियों में व्यर्थ ही बह रहा है। जिससे उसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। न ही बारिश के पानी का संरक्षण करने की ओर जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हो सकते हैं कारगर
जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कारगर सिद्ध हो सकते हैं। अगर लोग रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रयोग करें या प्रशासन इनको जिला में लगवाए तो बारिश के दिनों में व्यर्थ बहने वाले पानी को जमा किया जा सकता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में लागत भी कम ही आती है। एक घर में इसको बनाने के लिए करीब 50 हजार रुपये का ही खर्चा आता है।
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शहर में कई जगह जलभराव की समस्या
शहर में अनेक जगह जलभराव की समस्या रहती है। इनमें सैन चौक, रेस्ट हाउस, पुरानी कचहरी, नई सराय, पुरानी सराय, खड़खड़ी, नलापुर जैसे स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। इन जगहों पर रिचार्ज बोर लगा कर जलसंरक्षण किया जा सकता है।
रिचार्ज बोर से आता है भूजल स्तर ऊपर
पानी जमा होने वाले स्थान पर बोर कर उस पानी को लंबे मोटे पाइप द्वारा नीचे जमीन में छोड़ दिया जाता है। जिससे बारिश का पानी जमीन में चला जाता है। इससे भू जल स्तर में सुधार होता है। रिचार्ज बोर के पाइपों में बरसाती पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी भी चली जाती है। जिसके कारण ये रिचार्ज बोर जल्दी खराब हो जाते हैं।
नगर परिषद द्वारा सैन चौक व पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास रिचार्ज बोर लगाए गए थे। अब ये बोर मिट्टी चले जाने से बंद हो गए हैं। इन बोरों को जल्द ही ठीक कराया जाएगा।
-भारती सैनी, चेयपर्सन, नगर परिषद, नारनौल
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। भूजल का स्तर सुधारने के लिए करीब तीन साल पहले चार लाख की लागत से दो जगह लगाए गए रिचार्ज बोर देखरेख के अभाव में नकारा साबित हो गए हैं। सैन चौक व पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास लगे रिचार्ज बोर में मिट्टी जमा होने से बंद हो गए हैं। जिसकी वजह से पानी जमीन के अंदर नहीं जा रहा है और सड़कों और गलियों में जमा होने से लोगों को परेशानी हो रही। वहीं, जिले का भूजल स्तर 1500 फुट से भी नीचे चला गया है। जिसके कारण पूरा जिला डार्क जोन घोषित हो चुका है। ऐसे में बारिश के पानी बचाने की बहुत आवश्यकता है। बारिश के मौसम में अनेक जगहों पर पानी जमा हो जाता है, जो बाद में नालियों में व्यर्थ बह जाता है।
उल्लेखनीय है कि नांगल चौधरी क्षेत्र में तो पानी 1500 फुट नीचे तक चला गया है। डार्क जोन में आने के कारण यहां पर किसी भी प्रकार से पानी के दोहन पर पाबंदी है। नया ट्यूबवेल लगाने के लिए सरकार से इजाजत लेनी पड़ती है। केवल गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए ही नया ट्यूबवेल लगाया जाता है। इस समय बारिश का पानी शहर व गांवों की गलियों में व्यर्थ ही बह रहा है। जिससे उसका कोई उपयोग नहीं हो पा रहा है। न ही बारिश के पानी का संरक्षण करने की ओर जिला प्रशासन ध्यान दे रहा है।
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रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम हो सकते हैं कारगर
जल संरक्षण के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम कारगर सिद्ध हो सकते हैं। अगर लोग रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का प्रयोग करें या प्रशासन इनको जिला में लगवाए तो बारिश के दिनों में व्यर्थ बहने वाले पानी को जमा किया जा सकता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में लागत भी कम ही आती है। एक घर में इसको बनाने के लिए करीब 50 हजार रुपये का ही खर्चा आता है।
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शहर में कई जगह जलभराव की समस्या
शहर में अनेक जगह जलभराव की समस्या रहती है। इनमें सैन चौक, रेस्ट हाउस, पुरानी कचहरी, नई सराय, पुरानी सराय, खड़खड़ी, नलापुर जैसे स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। इन जगहों पर रिचार्ज बोर लगा कर जलसंरक्षण किया जा सकता है।
रिचार्ज बोर से आता है भूजल स्तर ऊपर
पानी जमा होने वाले स्थान पर बोर कर उस पानी को लंबे मोटे पाइप द्वारा नीचे जमीन में छोड़ दिया जाता है। जिससे बारिश का पानी जमीन में चला जाता है। इससे भू जल स्तर में सुधार होता है। रिचार्ज बोर के पाइपों में बरसाती पानी के साथ बहकर आने वाली मिट्टी भी चली जाती है। जिसके कारण ये रिचार्ज बोर जल्दी खराब हो जाते हैं।
नगर परिषद द्वारा सैन चौक व पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस के पास रिचार्ज बोर लगाए गए थे। अब ये बोर मिट्टी चले जाने से बंद हो गए हैं। इन बोरों को जल्द ही ठीक कराया जाएगा।
-भारती सैनी, चेयपर्सन, नगर परिषद, नारनौल