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जिले की तीन पीएचसी पर गर्भवती महिलाओं को 24 घंटे मिलेगी चिकित्सक सुविधा
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:00 AM IST
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अब जिले की तीन पीएचसी पर गर्भवती महिलाओं को 24 घंटे मिलेगी चिकित्सा सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिले की महिलाओं के लिए खुशखबरी है। स्वास्थ्य विभाग ने मातृ-शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों बनाए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं की देखरेख व डिलीवरी के लिए 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की शुरुआत की है। इसके तहत महेंद्रगढ़ के छीलरो, माधोगढ़ व मुंडिया खेड़ा गांव की पीएचसी में 24 घंटे चिकित्सक, नर्स और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यह सुविधा होने से करीब 25 गांवों की गर्भवती महिलाओं को उपचार और डिलीवरी के लिए नागरिक अस्पताल नारनौल नहीं जाना पड़ेगा।
पीएचसी में गर्भवती महिलाओं की देखरेख व डिलीवरी सहित अन्य चिकित्सा सुविधाओं को लेकर जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन अधिकारी दिलबाग सिंह श्योराण ने शनिवार को नागरिक अस्पताल में बैठक ली। बैठक में उन्होंने इन पीएचसी में तैनात स्टाफ सदस्यों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। दिलबाग सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने मातृ-शिशु मृत्यु दर पर रोक लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने निर्देश जारी किए हैं। क्योंकि अक्सर ऐसी महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। जिससे डिलीवरी के बाद नवजात की जान को खतरा बन जाता है। कई बार उनमें किसी की मौत भी हो जाती है। इस प्रकार की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के साथ अधिक होती है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी अस्पतालों की दूरी काफी अधिक होती है। जिस कारण डिलवरी के दौरान महिलाएं समय पर अस्पतालों में नहीं पहुंच पाती है। वहीं कई महिलाएं घर पर ही डिलीवरी करवा देती है। जिससे जच्चा-बच्चा की सही प्रकार से देखभाल नहीं हो पाती और उनकी जान को खतरा बन जाता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ही विभाग यह योजना क्रियान्वित की है। पहले स्तर पर तीन पीएचसी को सही प्रकार से चलाया जाएगा। इसके बाद जिले की तीन अन्य पीएचसी में भी इस तरह की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
सुबह और शाम को मेडिकल ऑफिसर रहेंगे ड्यूटी पर
छीलरो पीएचसी पर दो मेडिकल ऑफिसर के साथ तीन स्टाफ नर्स, पीएचसी मुडिया खेड़ा पर दो मेडिकल ऑफिसर के साथ एक स्टाफ नर्स तथा माधोगढ़ पीएचसी पर दो स्टाफ नर्स व दो मेडिकल ऑफिसर तैनात रहेंगे। इनमें एक मेडिकल आफिसर सुबह तथा एक शाम को ड्यूटी पर तैनात रहेगा। उक्त सभी पीएचसी पर एंबुलेंस भी लगाई जाएगी। ताकि डिलीवरी के बाद या पूर्व जच्चा व बच्चा को रेफर करना पड़े तो उन्हें एंबुलेंस की सहायता से पहुंचाया जा सके।
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दवाइयां सहित अन्य जांच की सुविधाएं भी मिलेगी
तीनों पीएचसी पर डिलीवरी के दौरान जरूरत पड़ने वाली सभी दवाइयां उपलब्ध होगी। इन दवाइयां के अलावा अगर तत्काल अन्य दवाइयां की जरूरत पड़ती है तो मेडिकल ऑफिसर अपने स्तर पर इनकी खरीद करेगा। इसके लिए विभाग द्वारा उन्हें बजट मुहैया करवाया गया है। इसके अलावा पीएचसी पर ब्लड व यूरिन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध होगी।
विभाग के निर्देशानुसार जिले की तीन पीएचसी पर गर्भवती महिलाओं के लिए 24 घंटे चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है। तीनों पीएचसी पर मेडिकल आफिसर सहित स्टाफ नर्स की तैनाती की गई है। ताकि गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी से पहले व बाद समय पर इलाज मिल सके।
-डा. इंद्रजीत धनखड़, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल नारनौल
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। जिले की महिलाओं के लिए खुशखबरी है। स्वास्थ्य विभाग ने मातृ-शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों बनाए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गर्भवती महिलाओं की देखरेख व डिलीवरी के लिए 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने की शुरुआत की है। इसके तहत महेंद्रगढ़ के छीलरो, माधोगढ़ व मुंडिया खेड़ा गांव की पीएचसी में 24 घंटे चिकित्सक, नर्स और एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी। यह सुविधा होने से करीब 25 गांवों की गर्भवती महिलाओं को उपचार और डिलीवरी के लिए नागरिक अस्पताल नारनौल नहीं जाना पड़ेगा।
पीएचसी में गर्भवती महिलाओं की देखरेख व डिलीवरी सहित अन्य चिकित्सा सुविधाओं को लेकर जिला निरीक्षण एवं मूल्यांकन अधिकारी दिलबाग सिंह श्योराण ने शनिवार को नागरिक अस्पताल में बैठक ली। बैठक में उन्होंने इन पीएचसी में तैनात स्टाफ सदस्यों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। दिलबाग सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने मातृ-शिशु मृत्यु दर पर रोक लगाने के उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने निर्देश जारी किए हैं। क्योंकि अक्सर ऐसी महिलाओं को समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। जिससे डिलीवरी के बाद नवजात की जान को खतरा बन जाता है। कई बार उनमें किसी की मौत भी हो जाती है। इस प्रकार की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के साथ अधिक होती है, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी अस्पतालों की दूरी काफी अधिक होती है। जिस कारण डिलवरी के दौरान महिलाएं समय पर अस्पतालों में नहीं पहुंच पाती है। वहीं कई महिलाएं घर पर ही डिलीवरी करवा देती है। जिससे जच्चा-बच्चा की सही प्रकार से देखभाल नहीं हो पाती और उनकी जान को खतरा बन जाता है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ही विभाग यह योजना क्रियान्वित की है। पहले स्तर पर तीन पीएचसी को सही प्रकार से चलाया जाएगा। इसके बाद जिले की तीन अन्य पीएचसी में भी इस तरह की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
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सुबह और शाम को मेडिकल ऑफिसर रहेंगे ड्यूटी पर
छीलरो पीएचसी पर दो मेडिकल ऑफिसर के साथ तीन स्टाफ नर्स, पीएचसी मुडिया खेड़ा पर दो मेडिकल ऑफिसर के साथ एक स्टाफ नर्स तथा माधोगढ़ पीएचसी पर दो स्टाफ नर्स व दो मेडिकल ऑफिसर तैनात रहेंगे। इनमें एक मेडिकल आफिसर सुबह तथा एक शाम को ड्यूटी पर तैनात रहेगा। उक्त सभी पीएचसी पर एंबुलेंस भी लगाई जाएगी। ताकि डिलीवरी के बाद या पूर्व जच्चा व बच्चा को रेफर करना पड़े तो उन्हें एंबुलेंस की सहायता से पहुंचाया जा सके।
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दवाइयां सहित अन्य जांच की सुविधाएं भी मिलेगी
तीनों पीएचसी पर डिलीवरी के दौरान जरूरत पड़ने वाली सभी दवाइयां उपलब्ध होगी। इन दवाइयां के अलावा अगर तत्काल अन्य दवाइयां की जरूरत पड़ती है तो मेडिकल ऑफिसर अपने स्तर पर इनकी खरीद करेगा। इसके लिए विभाग द्वारा उन्हें बजट मुहैया करवाया गया है। इसके अलावा पीएचसी पर ब्लड व यूरिन टेस्ट की सुविधा उपलब्ध होगी।
विभाग के निर्देशानुसार जिले की तीन पीएचसी पर गर्भवती महिलाओं के लिए 24 घंटे चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की गई है। तीनों पीएचसी पर मेडिकल आफिसर सहित स्टाफ नर्स की तैनाती की गई है। ताकि गर्भवती महिलाओं को डिलीवरी से पहले व बाद समय पर इलाज मिल सके।
-डा. इंद्रजीत धनखड़, सिविल सर्जन नागरिक अस्पताल नारनौल