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अच्छे विचारों को व्यवहारिक जीवन में धारण करना ही सत्संग: महंत
Updated Thu, 31 Aug 2017 12:46 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
नांगल चौधरी। धार्मिक कार्यक्रमों में अच्छे विचारों का व्यवहारिक जीवन में धारण करना ही सत्संग है। जिससे समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों पर अंकुश लगेगा।
उक्त विचार वीर हनुमान मंदिर के महंत उदयनाराणचार्य ने बुधवार को दैनिक प्रवचन के दौरान ग्रामीणों को व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में सामाजिक मर्यादाओं की अहम भूमिका होती है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के युग में युवा पीढ़ी जीवन के लक्ष्य से भटक गई। माता-पिता की सेवाभाव से विमुख हो गए तथा विभिन्न पाखंड विचारों में फंस गए। जबकि माता-पिता जीवन के सार्थक गुरु होते हैं, उनकी सेवा करने पर सभी धामों की तीर्थ जैसा फल मिलेगा। जीवनकाल में अधिकांश युवा (ग्रामीण) माता-पिता की सेवा नहीं करते तथा मरने के उपरांत प्रीतिभोज करते हैं, जिससे पुण्य की प्राप्ति संभव नहीं है। महंत ने कहा कि युवाओं को नशाखोरी के खिलाफ अभियान चलाना होगा तथा दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या आदि बुराइयों को खत्म करने में योगदान देना चाहिए। जिससे परिवार में सुख-शांति तथा एकजुटता रहेगी। शराब, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान आदि से गला, फेफड़े, गुर्दे आदि में कैंसर हो सकता है। इसके बाद ग्रामीणों को पौधरोपण एवं जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
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नांगल चौधरी। धार्मिक कार्यक्रमों में अच्छे विचारों का व्यवहारिक जीवन में धारण करना ही सत्संग है। जिससे समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों पर अंकुश लगेगा।
उक्त विचार वीर हनुमान मंदिर के महंत उदयनाराणचार्य ने बुधवार को दैनिक प्रवचन के दौरान ग्रामीणों को व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जीवन में सामाजिक मर्यादाओं की अहम भूमिका होती है, लेकिन प्रतिस्पर्धा के युग में युवा पीढ़ी जीवन के लक्ष्य से भटक गई। माता-पिता की सेवाभाव से विमुख हो गए तथा विभिन्न पाखंड विचारों में फंस गए। जबकि माता-पिता जीवन के सार्थक गुरु होते हैं, उनकी सेवा करने पर सभी धामों की तीर्थ जैसा फल मिलेगा। जीवनकाल में अधिकांश युवा (ग्रामीण) माता-पिता की सेवा नहीं करते तथा मरने के उपरांत प्रीतिभोज करते हैं, जिससे पुण्य की प्राप्ति संभव नहीं है। महंत ने कहा कि युवाओं को नशाखोरी के खिलाफ अभियान चलाना होगा तथा दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या आदि बुराइयों को खत्म करने में योगदान देना चाहिए। जिससे परिवार में सुख-शांति तथा एकजुटता रहेगी। शराब, गुटखा, तंबाकू, धूम्रपान आदि से गला, फेफड़े, गुर्दे आदि में कैंसर हो सकता है। इसके बाद ग्रामीणों को पौधरोपण एवं जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
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