{"_id":"582b50f94f1c1b59368ff070","slug":"10-acer-grain-agriculture-dam-falt","type":"story","status":"publish","title_hn":"नहर टूटी, दस एकड़ की फसल हुई जलमग्न","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नहर टूटी, दस एकड़ की फसल हुई जलमग्न
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:46 PM IST
विज्ञापन
नहर टूटी, फसल बर्बाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लहरोदा से होकर गुजरने वाली मेई डिस्ट्रीब्यूटरी नहर सोमवार देर रात को टूट गई। जिसकी वजह से उसके साथ लगने वाली करीब 10 एकड़ फसल जलमग्न हो गई। पानी भरने के कारण किसानों द्वारा हाल ही में बोई गई रबी की फसल भी पूरी तरह तबाह हो गई हैं। कई खेतों में करीब दो-दो फीट तक पानी जमा हो गया है। बर्बाद हुई फसल का किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है।
किसानों ने नहर विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर विभाग डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी छोड़ने से पहले इसकी सही तरीके से जांच करता तो किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। किसानों ने बताया कि बिजली कम आने की वजह से उन्होंने बड़ी परेशानियों के साथ किसी तरह जमीन में पानी देकर उसको जुताई के लायक बनाया था। लेकिन जुताई, खाद व बीज का हजारों रुपये खर्च किए जाने के बाद जब फसल अपने विकास पर आई थी तो अब पानी ने उसको अपने आगोश में समा लिया। किसानों का कहना है कि अब दोबारा से फसल को बुआई करने के लिए दोबारा से उनको आर्थिक नुकसान होगा। साथ सरसों की फसल बुआई की तो समय सीमा ही समाप्त हो जाएगी। अगेती फसल की तैयारी में उन्होंने गेहूं तक की बिजाई कर दी थी। लेकिन अब पूरा प्लान नहर विभाग की लापरवाही के चलते चौपट हो गया है।
किसानों के बाद विभाग ने पानी को बंद किया व अधिक खेतों में जाने से पानी को रोका। वहीं नहर विभाग का कहना है कि नहर की पटरी पर शहतूत का पेड़ उगा हुआ था। जिसके चलते उसकी जड़ों से पानी का रिसाव हो गया व रात के समय में नहर टूट गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों ने नहर विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर विभाग डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी छोड़ने से पहले इसकी सही तरीके से जांच करता तो किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। किसानों ने बताया कि बिजली कम आने की वजह से उन्होंने बड़ी परेशानियों के साथ किसी तरह जमीन में पानी देकर उसको जुताई के लायक बनाया था। लेकिन जुताई, खाद व बीज का हजारों रुपये खर्च किए जाने के बाद जब फसल अपने विकास पर आई थी तो अब पानी ने उसको अपने आगोश में समा लिया। किसानों का कहना है कि अब दोबारा से फसल को बुआई करने के लिए दोबारा से उनको आर्थिक नुकसान होगा। साथ सरसों की फसल बुआई की तो समय सीमा ही समाप्त हो जाएगी। अगेती फसल की तैयारी में उन्होंने गेहूं तक की बिजाई कर दी थी। लेकिन अब पूरा प्लान नहर विभाग की लापरवाही के चलते चौपट हो गया है।
विज्ञापन
किसानों के बाद विभाग ने पानी को बंद किया व अधिक खेतों में जाने से पानी को रोका। वहीं नहर विभाग का कहना है कि नहर की पटरी पर शहतूत का पेड़ उगा हुआ था। जिसके चलते उसकी जड़ों से पानी का रिसाव हो गया व रात के समय में नहर टूट गई।
विज्ञापन