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भारतीय विविधता के रंग दक्षिण एशियाई महोत्सव के संग, वाद्य यंत्रों की हुई शानदार प्रस्तुतियां
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में चल रहे दक्षिण एशियाई युवा महोत्सव में मंगलवार को दर्शकों ने कुछ ऐसा देखा जो उनके लिए अकल्पनीय व अविश्वसनीय था। नगाड़ा, मटका, मंजीरा, मेंडोलिन न जाने क्या-क्या, कभी 46 तो कभी 36 तो कभी 58 वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति ने दक्षिण एशियाई सांस्कृृतिक महोत्सव का समां बांध दिया। हंसते, ठुमकते कभी झनझनाते दर्शक बस तालियों के साथ अभिनंदन करते ही दिखाई दिए। भारत के विभिन्न राज्यों की प्रस्तुतियां लोकवाद्य यंत्रों के जरिए जैसी ही मंच हुई तो बांग्लादेश की टीम के कलाकारों ने ऑडिटोरियम हॉल के मुख्य स्टेज के पास आकर ही ठुमकना शुरू कर दिया। ऐसी शानदार प्रस्तुतियों के नाम रहा दक्षिण एशियाई युवा महोत्सव का दूसरा दिन। मंगलवार को लोक वाद्य यंत्रों की प्रस्तुति बांग्लादेश ने अपने वाद्य यंत्रों के साथ मंच पर दूसरे दिन के कार्यक्रम का आगाज किया। टीम के सदस्यों ने गिटार, मेंडोलिन, एकतार, बाया, दोतारा की मदद से टीम के 8 सदस्यों ने बांग्लादेश के लोकवाद्य यंत्रों को जीवंत कर दिया। दर्शकों ने भी इसका आनंद लिया व कलाकारों की हौंसला अफजाई की। दूसरी प्रस्तुति राजस्थान की बनस्थली यूनिवर्सिटी ने की। अपनी प्रस्तुति की शुरूआत सोनारी धरती जाठी चांदी रो आसमां रंग रंगीलों, छैल छबीलों म्हारो प्यारो राजस्थान की पंक्तियों से शुरूआत की। करीब 12 सदस्य इस दल ने राजस्थानी लोककला के नगाड़ा, मंजीरा, मोरपंखी, अलगोजा, चिमटा, मटका, अपंक, इसराज, झांझ, चिकारा, खंजरी, शहनाई, ताशा, खडतल, ढोल, बपंक, कमाइचा, घुंघरू, हट्टी आदि यंत्रों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। अगली प्रस्तुति पुणे महाराष्ट्र से आई भारतीय विद्यापीठ के कलाकारों ने दी। उन्होंने प्रहर से लेकर श्रृृंगराज तक बजाए जाने वाले लोकयंत्रों के साथ प्रस्तुति दी। इसमें नगाड़ा, ढोल, बांसुरी, मटकी, धिमड़ी, बगलबच्चा, झांझ, टाल, संभल, हारमोनियम, डफ, हलगी, ताशा आदि यंत्रों के साथ 10 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। हरियाणा की गुरू जंभेश्वर यूनिवर्सिटी हिसार ने अपनी प्रस्तुति से हरियाणा की संस्कृृति को झलकाया। लोकवाद्य यंत्रों की प्रस्तुति में गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय की टीम ने भी हरियाणा के पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुति दी। 9 सदस्यी दल ने लोक वाद्य यंत्रों के साथ अपनी ऐसी बेजोड़ प्रस्तुति दी कि दर्शक झूमने लगे व टीम के सदस्यों को खूब हौंसला बढ़ाया। इन्होंने अपनी प्रस्तुति में नगाड़ा, बैंजो, ताशा, चिमटा, लट्ठ, डेरू, मंजीरा, ढोलक, बोतल, गढवा, सारंगी, एकतारा, बांसुरी आदि का प्रयोग किया। महाराष्ट्र की संत गडके बाबा अमरावती यूनिवर्सिटी की टीम ने कुछ नए ही अंदाज में अपने लोकवाद्य यंत्रों की प्रस्तुति दी। टीम के सदस्यों ने एक प्रोप का प्रयोग करते हुए एक कलाकार को उपर उठाया व अपना झंडा लहराकर दर्शकों का अभिवादन किया। इस प्रस्तुति में 9 कलाकारों ने बांसुरी, ढोलकी, हलगी, खजरी, मृृदंग, संभल, टाल, तुम्बी, ढोल, ताशा, ढफ, रामढोल आदि यंत्रों का प्रयोग किया। यूनिवर्सिटी आफ मुंबई के 11 सदस्य वाली टीम ने ढोलकी, ढिमडी, ढंगनी, ढोल, ताशा, बांसुरी, पखवाच आदि यंत्रों के साथ गणेश चतुर्थी तथा लावणी उत्सवों को अपनी प्रस्तुति के माध्यम प्रस्तुत किया। दक्षिण भारत के तमिलनाडू से आई गांधी ग्राम यूनिवर्सिटी के 12 कलाकारों ने उर्मि, नासिक ढोल, उडुकई, कोम्बू, ठामकु, ढोल, बेल, सांगु, कीनीमुट्टी आदि लोक यंत्रों के माध्यम से प्रस्तुति देकर सबका मन मोह लिया।
संसदीय कार्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल होंगे आज के मुख्यातिथि
युवा सांस्कृृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि 13वें दक्षिण एशियाई युवा सांस्कृृतिक महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को भारत सरकार के केंद्रीय संसदीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्यातिथि होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा करेंगे। आज के कार्यक्रम 13वें दक्षिण एशियाई सांस्कृृतिक महोत्सव के तीसरे दिन सीनेट हॉल में सुबह 10 से 12 बजे तक एलोक्यूशन, क्रश हॉल में क्ले माडलिंग, डिबेट, पोस्टर मेकिंग व सायं 2 से 5 बजे आडिटोरियम हॉल में सांस्कृृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा।
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संसदीय कार्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल होंगे आज के मुख्यातिथि
युवा सांस्कृृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. तेजेंद्र शर्मा ने बताया कि 13वें दक्षिण एशियाई युवा सांस्कृृतिक महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को भारत सरकार के केंद्रीय संसदीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्यातिथि होंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कैलाश चंद्र शर्मा करेंगे। आज के कार्यक्रम 13वें दक्षिण एशियाई सांस्कृृतिक महोत्सव के तीसरे दिन सीनेट हॉल में सुबह 10 से 12 बजे तक एलोक्यूशन, क्रश हॉल में क्ले माडलिंग, डिबेट, पोस्टर मेकिंग व सायं 2 से 5 बजे आडिटोरियम हॉल में सांस्कृृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा।
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