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अपने जीवन का करना चाहिए सदुपयोग : पुरी
Tue, 04 Nov 2025 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 04 Nov 2025 12:56 AM IST
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कुरुक्षेत्र। शुक्रताल में गंगा स्नान करते महंत जगन्नाथ पुरी। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। मारकंडा नदी के तट पर श्री मारकंडेश्वर महादेव मंदिर ठसका मीरां जी में हर वर्ष की भांति अखिल भारतीय श्री मारकंडेश्वर जनसेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत जगन्नाथ पुरी एवं संत महापुरुषों के सान्निध्य में कार्तिक माह की पूजा व कथा चल रही है। इस कथा एवं पूजा अनुष्ठान का विधिवत 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर समापन होना है।
सोमवार को महंत जगन्नाथ पुरी श्रद्धालुओं के साथ शुक्रताल में गंगा स्नान के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर महंत जगन्नाथ पुरी ने कथा में चर्चा करते हुए बताया कि जिस भी प्राणी ने इस संसार में जन्म लिया है, उसे एक दिन यहां से जाना होगा। इस इंसान स्वरूप में प्राणी बिना उद्देश्य के वाद-विवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि हरि नाम का सिमरन करें जो काम आएगा और आपस में प्रेम भाव से जीवन यापन करें जिससे नफरत और घृणा का समूल नाश हो जाए।
महंत ने बताया कि यदि हमें कोई छोटी सी सांसारिक वस्तु दे दे तो हम उसका एहसान मानते हैं लेकिन उस परमपिता परमात्मा ने हमें इतना सुंदर इंसान रूपी चोला दिया है, जो चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ हैं जिसकी कीमत अनमोल है। उन्होंने कहा कि इंसान सृष्टि में भगवान की सबसे सुंदर कृति है, हमें भगवान का धन्यवाद करना चाहिए और प्रेम करना चाहिए। इस प्रेम को कोई विरला ही जानता है। इसके बाद महंत जगन्नाथ पुरी व श्रद्धालु सायं शुक्रताल पहुंचे, जहां उन्होंने गंगा स्नान किया।
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सोमवार को महंत जगन्नाथ पुरी श्रद्धालुओं के साथ शुक्रताल में गंगा स्नान के लिए रवाना हुए। इस अवसर पर महंत जगन्नाथ पुरी ने कथा में चर्चा करते हुए बताया कि जिस भी प्राणी ने इस संसार में जन्म लिया है, उसे एक दिन यहां से जाना होगा। इस इंसान स्वरूप में प्राणी बिना उद्देश्य के वाद-विवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि हरि नाम का सिमरन करें जो काम आएगा और आपस में प्रेम भाव से जीवन यापन करें जिससे नफरत और घृणा का समूल नाश हो जाए।
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महंत ने बताया कि यदि हमें कोई छोटी सी सांसारिक वस्तु दे दे तो हम उसका एहसान मानते हैं लेकिन उस परमपिता परमात्मा ने हमें इतना सुंदर इंसान रूपी चोला दिया है, जो चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ हैं जिसकी कीमत अनमोल है। उन्होंने कहा कि इंसान सृष्टि में भगवान की सबसे सुंदर कृति है, हमें भगवान का धन्यवाद करना चाहिए और प्रेम करना चाहिए। इस प्रेम को कोई विरला ही जानता है। इसके बाद महंत जगन्नाथ पुरी व श्रद्धालु सायं शुक्रताल पहुंचे, जहां उन्होंने गंगा स्नान किया।
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कुरुक्षेत्र। शुक्रताल में गंगा स्नान करते महंत जगन्नाथ पुरी। विज्ञप्ति