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Kurukshetra News: आर्यवीरों का हुआ यज्ञोपवीत संस्कार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 05 Jun 2024 03:34 AM IST
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Yajnopavit rites of Arya warriors took place
कुरुक्षेत्र। गुरुकुल में चल रहे प्रांतीय आर्यवीर दल शिविर में आज सभी आर्यवीरों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ। आचार्य दयाशंकर शास्त्री के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच सभी आर्यवीरों ने जनेऊ धारण किया। उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत के ये तीन धागे हमें अपने देवों के प्रति, हमारे ऋषियों के प्रति तथा हमारे माता-पिता के प्रति हमारे जो ऋण, कर्तव्य और दायित्व हैं उनका स्मरण कराते हैं। पहला ऋण माता-पिता का है, दूसरा ऋण गुरुओं का है और तीसरा ऋण ऋषि का होता है। हमें इन तीनों ऋणों से उऋण होने के लिए अच्छे आचरण और उत्तम कार्य करने चाहिए।
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उन्होंने कहा कि यज्ञोपवीत धारण करने वाले युवा भाग्यशाली है, यह कोई मामूली धागा नहीं है मुगलकाल में वीर हकीकत राय ने वैदिक धर्म निभाते हुए चोटी और यज्ञोपवीत उतारने की बजाए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी इसलिए वैदिक संस्कृति में यज्ञोपवीत का बड़ा महत्त्व है।
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यज्ञोपवीत संस्कार के उपरांत सभी आर्यवीरों ने समाज से पाखण्ड, अंधविश्वास आदि बुराइयों को मिटाने का संकल्प लिया। इस दौरान युवाओं ने भारी संख्या में हाथों व गले में पहने हुए काले धागे, कंडे-ताबीज आदि उतारकर पांखंड से दूर रहने का संदेश दिया। इस अवसर पर भजनोपदेशक महाशय जयपाल आर्य, प्रचार प्रमुख विशाल आर्य, वरिष्ठ योग शिक्षक सूर्यदेव आर्य, व्यायाम शिक्षक संदीप वैदिक, अमित आर्य, सोहनवीर आर्य, नरेश आर्य, महावीर आर्य, सुरेंद्र आर्य, आर्यमित्र आर्य सहित सभी प्रशिक्षक मौजूद रहे।
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शिविर संयोजक संजीव आर्य ने कहा कि गुण और अवगुण सभी में होते हैं मगर जो लोग अपने अवगुणों को दूर करके गुणों का विकास करते हैं, हमेशा समाज कल्याण के कार्य हेतु तत्पर रहते हैं वहीं जीवन में उन्नति के शिखर पर पहुंचते हैं। हमें अपने आचरण और व्यवहार में मधुरता लानी चाहिए।


शिविर में कुरुक्षेत्र, कैथल, पानीपत, जींद, हिसार जिलों के विभिन्न गांवों से 600 युवा भाग ले रहे हैं जिन्हें आर्य वीर दल के 20 से अधिक शिक्षकों की ओर से जूड़ो-कराटे, लाठी संचलन, डंबल, लेजियम, स्तूप-निर्माण, दंड-बैठक और विभिन्न योगासनों के शारीरिक प्रशिक्षण के अतिरिक्त महाशय जयपाल आर्य, जसविंद्र आर्य, संदीप वैदिक आदि विद्वानों की ओर से बौद्धिक ज्ञान भी प्रदान किया जा रहा है।
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