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यज्ञोपवीत 16 प्रमुख संस्कारों में विशेष : आचार्य वत्स
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कुरुक्षेत्र। ब्राह्मण धर्मशाला में यज्ञोपवीत संस्कार समारोह के तहत परशुराम दरबार में एकजुट पदा
कुरुक्षेत्र। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम के जन्मोत्सव पर श्री गुरु धाम संस्कृत वेद विद्यापीठ में अनुसंधान ट्रस्ट के तत्वावधान में 26वां यज्ञोपवीत संस्कार समारोह आयोजित किया गया। मुख्य यजमान रमेश शास्त्री घराड़सी रहे।
शास्त्री ने कहा कि भगवान परशुराम ने अन्याय के विरुद्ध शस्त्र उठाए थे, अन्यथा वह तपस्वी व्यक्तित्व रहे। समाज को उनके दिखाए मार्ग पर धर्मपूर्वक चलते हुए देश की उन्नति में योगदान देना चाहिए। बतौर मुख्य अतिथि सभा के प्रधान पवन शर्मा पहलवान ने पारंपरिक रूप से मनाए जा रहे जयंती समारोह की सबको बधाई दी।
युवाओं से आह्वान किया कि भगवान परशुराम जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, समाज में संस्कारों और परंपराओं को पुन:स्थापित करने की पहल है।
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आचार्य राजेश वत्स ने बताया कि विशेषकर ब्राह्मणों के लिए यज्ञोपवीत संस्कार हिंदू धर्म के 16 प्रमुख संस्कारों में विशेष महत्व रखता है। यज्ञोपवीत संस्कार के बाद बालक ‘द्विज’ अर्थात दो बार जन्म लेने वाला कहलाता है। पहला जन्म माता के गर्भ से और दूसरा ज्ञान व संस्कार के माध्यम से। यज्ञोपवीत धारण करने के बाद व्यक्ति को शिखा और सूत्र के साथ धर्म, ज्ञान और समाजसेवा के मार्ग पर अग्रसर रहना चाहिए।
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शास्त्री ने कहा कि भगवान परशुराम ने अन्याय के विरुद्ध शस्त्र उठाए थे, अन्यथा वह तपस्वी व्यक्तित्व रहे। समाज को उनके दिखाए मार्ग पर धर्मपूर्वक चलते हुए देश की उन्नति में योगदान देना चाहिए। बतौर मुख्य अतिथि सभा के प्रधान पवन शर्मा पहलवान ने पारंपरिक रूप से मनाए जा रहे जयंती समारोह की सबको बधाई दी।
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युवाओं से आह्वान किया कि भगवान परशुराम जी के आदर्शों को जीवन में अपनाने और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लें। यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, समाज में संस्कारों और परंपराओं को पुन:स्थापित करने की पहल है।
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आचार्य राजेश वत्स ने बताया कि विशेषकर ब्राह्मणों के लिए यज्ञोपवीत संस्कार हिंदू धर्म के 16 प्रमुख संस्कारों में विशेष महत्व रखता है। यज्ञोपवीत संस्कार के बाद बालक ‘द्विज’ अर्थात दो बार जन्म लेने वाला कहलाता है। पहला जन्म माता के गर्भ से और दूसरा ज्ञान व संस्कार के माध्यम से। यज्ञोपवीत धारण करने के बाद व्यक्ति को शिखा और सूत्र के साथ धर्म, ज्ञान और समाजसेवा के मार्ग पर अग्रसर रहना चाहिए।

कुरुक्षेत्र। ब्राह्मण धर्मशाला में यज्ञोपवीत संस्कार समारोह के तहत परशुराम दरबार में एकजुट पदा